अल-जासिया · 22/37
अनुवाद उच्चारण — अल-जासिया
وَخَلَقَ اللَّهُ السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضَ بِالْحَقِّ وَلِتُجْزَىٰ كُلُّ نَفْسٍ بِمَا كَسَبَتْ وَهُمْ لَا يُظْلَمُونَ ۝٢٢
Wa khalaqal laahus samaawaati wal arda bilhaqqi wa litujzaa kullu nafsim bimaa kasabat wa hum laa yuzlamoon
📖 हिंदी अर्थ
और ख़ुदा ने सारे आसमान व ज़मीन को हिकमत व मसलेहत से पैदा किया और ताकि हर शख़्श को उसके किये का बदला दिया जाए और उन पर (किसी तरह का) ज़ुल्म नहीं किया जाएगा

🎧 सुनें
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • بِالْحَقِّ: सत्य, न्याय और उद्देश्य के साथ — यानी यह सृष्टि व्यर्थ नहीं है, बल्कि एक गंभीर योजना और हिकमत पर आधारित है।
  • لِتُجْزَىٰ: ताकि बदला दिया जाए — प्रत्येक आत्मा को उसके कर्मों का पूरा-पूरा प्रतिफल मिले।
  • لَا يُظْلَمُونَ: उन पर कोई ज़ुल्म नहीं होगा — न उनके अच्छे कर्मों में कमी की जाएगी, न बुरे कर्मों में वृद्धि।

तफ़सीर (व्याख्या):

अल्लाह तआला ने आसमानों और ज़मीन को बेहद हिकमत और सत्य के साथ पैदा किया है। यह सृष्टि कोई खिलौना नहीं है, न ही इसे बेकार और अंधाधुंध बनाया गया है। इस पूरी कायनात में एक गहरा उद्देश्य छिपा है — वह यह कि हर इंसान को उसके कर्मों का पूरा-पूरा बदला मिले। जिसने भलाई की, उसे भलाई मिलेगी, और जिसने बुराई की, उसे उसका अंजाम भुगतना होगा।

यह आयत हमें बताती है कि यह दुनिया अंतिम मंज़िल नहीं है, बल्कि एक परीक्षा का मैदान है। अल्लाह ने यह सब कुछ इसलिए बनाया ताकि न्याय का दिन आए और हर आत्मा को उसकी कमाई का हिसाब मिले। और उस दिन अल्लाह किसी पर ज़ुल्म नहीं करेगा — नेकियों में कोई कमी नहीं की जाएगी, और गुनाहों में कोई अतिरिक्त वृद्धि नहीं होगी। हर किसी को उसके किए का सटीक और निष्पक्ष बदला मिलेगा।

इस आयत से हमें यह सीख मिलती है कि जीवन व्यर्थ नहीं है। हमारा हर अच्छा काम, हर नेक नीयत, हर छोटी-सी भलाई — सब अल्लाह के यहाँ सुरक्षित है। और जो लोग यह सोचते हैं कि उनके बुरे कर्मों का कोई हिसाब नहीं होगा, वे बड़ी भूल में हैं। अल्लाह की न्याय-व्यवस्था इतनी परिपूर्ण है कि कोई भी कर्म, चाहे वह राई के दाने के बराबर ही क्यों न हो, उसका हिसाब अवश्य होगा।

यह आयत हमें न्याय के दिन पर ईमान लाने की तरफ बुलाती है और हमें आश्वस्त करती है कि अल्लाह का न्याय बिल्कुल सटीक है। इसलिए हमें चाहिए कि हम अपनी ज़िंदगी को उद्देश्यपूर्ण बनाएँ, अच्छे कर्म करें, और यह याद रखें कि हमारा रब हर चीज़ का हिसाब रखने वाला है। यही इस सृष्टि का असली मक़सद है — कि हम अपने रब की इबादत करें, उसके बताए रास्ते पर चलें, और उस दिन के लिए तैयार रहें जब हर आत्मा को उसकी कमाई का पूरा बदला मिलेगा।



📜 आयत 20-24 — अल-जासिया

20هَٰذَا بَصَائِرُ لِلنَّاسِ وَهُدًى وَرَحْمَةٌ لِّقَوْمٍ يُوقِنُونَ
ये (क़ुरान) लोगों (की) हिदायत के लिए दलीलो का मजमूआ है और बातें करने वाले लोगों के लिए (अज़सरतापा) हिदायत व रहमत है
21أَمْ حَسِبَ الَّذِينَ اجْتَرَحُوا السَّيِّئَاتِ أَن نَّجْعَلَهُمْ كَالَّذِينَ آمَنُوا وَعَمِلُوا الصَّالِحَاتِ سَوَاءً مَّحْيَاهُمْ وَمَمَاتُهُمْ ۚ سَاءَ مَا يَحْكُمُونَ
जो लोग बुरा काम किया करते हैं क्या वह ये समझते हैं कि हम उनको उन लोगों के बराबर कर देंगे जो ईमान लाए और अच्छे अच्छे काम भी करते रहे और उन सब का जीना मरना एक सा होगा ये लोग (क्या) बुरे हुक्म लगाते हैं
22وَخَلَقَ اللَّهُ السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضَ بِالْحَقِّ وَلِتُجْزَىٰ كُلُّ نَفْسٍ بِمَا كَسَبَتْ وَهُمْ لَا يُظْلَمُونَ
और ख़ुदा ने सारे आसमान व ज़मीन को हिकमत व मसलेहत से पैदा किया और ताकि हर शख़्श को उसके किये का बदला दिया जाए और उन पर (किसी तरह का) ज़ुल्म नहीं किया जाएगा
23أَفَرَأَيْتَ مَنِ اتَّخَذَ إِلَٰهَهُ هَوَاهُ وَأَضَلَّهُ اللَّهُ عَلَىٰ عِلْمٍ وَخَتَمَ عَلَىٰ سَمْعِهِ وَقَلْبِهِ وَجَعَلَ عَلَىٰ بَصَرِهِ غِشَاوَةً فَمَن يَهْدِيهِ مِن بَعْدِ اللَّهِ ۚ أَفَلَا تَذَكَّرُونَ
भला तुमने उस शख़्श को भी देखा है जिसने अपनी नफसियानी ख़वाहिशों को माबूद बना रखा है और (उसकी हालत) समझ बूझ कर ख़ुदा ने उसे गुमराही में छोड़ दिया है और उसके कान और दिल पर अलामत मुक़र्रर कर दी है (कि ये ईमान न लाएगा) और उसकी ऑंख पर पर्दा डाल दिया है फिर ख़ुदा के बाद उसकी हिदायत कौन कर सकता है तो क्या तुम लोग (इतना भी) ग़ौर नहीं करते
24وَقَالُوا مَا هِيَ إِلَّا حَيَاتُنَا الدُّنْيَا نَمُوتُ وَنَحْيَا وَمَا يُهْلِكُنَا إِلَّا الدَّهْرُ ۚ وَمَا لَهُم بِذَٰلِكَ مِنْ عِلْمٍ ۖ إِنْ هُمْ إِلَّا يَظُنُّونَ
और वह लोग कहते हैं कि हमारी ज़िन्दगी तो बस दुनिया ही की है (यहीं) मरते हैं और (यहीं) जीते हैं और हमको बस ज़माना ही (जिलाता) मारता है और उनको इसकी कुछ ख़बर तो है नहीं ये लोग तो बस अटकल की बातें करते हैं
अल-जासियाकुरान सूची
37आयत
मक्कीRevelation
22आयत

अनुवाद — अल-जासिया 22

सूरा अल-जासिया आयत 22 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और ख़ुदा ने सारे आसमान व ज़मीन को हिकमत व…

सूरा आयत 22/37 — अल-जासिया الجاثية (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-जासिया सुनें, अल-जासिया अनुवाद, अल-जासिया mp3, अल-जासिया pdf. आयत 20–24. हिंदी अर्थ: اردو.




पवित्र क़ुरआन


Tuesday, August 18, 2026

अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए