Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- بِالْحَقِّ: सत्य, न्याय और उद्देश्य के साथ — यानी यह सृष्टि व्यर्थ नहीं है, बल्कि एक गंभीर योजना और हिकमत पर आधारित है।
- لِتُجْزَىٰ: ताकि बदला दिया जाए — प्रत्येक आत्मा को उसके कर्मों का पूरा-पूरा प्रतिफल मिले।
- لَا يُظْلَمُونَ: उन पर कोई ज़ुल्म नहीं होगा — न उनके अच्छे कर्मों में कमी की जाएगी, न बुरे कर्मों में वृद्धि।
तफ़सीर (व्याख्या):
अल्लाह तआला ने आसमानों और ज़मीन को बेहद हिकमत और सत्य के साथ पैदा किया है। यह सृष्टि कोई खिलौना नहीं है, न ही इसे बेकार और अंधाधुंध बनाया गया है। इस पूरी कायनात में एक गहरा उद्देश्य छिपा है — वह यह कि हर इंसान को उसके कर्मों का पूरा-पूरा बदला मिले। जिसने भलाई की, उसे भलाई मिलेगी, और जिसने बुराई की, उसे उसका अंजाम भुगतना होगा।
यह आयत हमें बताती है कि यह दुनिया अंतिम मंज़िल नहीं है, बल्कि एक परीक्षा का मैदान है। अल्लाह ने यह सब कुछ इसलिए बनाया ताकि न्याय का दिन आए और हर आत्मा को उसकी कमाई का हिसाब मिले। और उस दिन अल्लाह किसी पर ज़ुल्म नहीं करेगा — नेकियों में कोई कमी नहीं की जाएगी, और गुनाहों में कोई अतिरिक्त वृद्धि नहीं होगी। हर किसी को उसके किए का सटीक और निष्पक्ष बदला मिलेगा।
इस आयत से हमें यह सीख मिलती है कि जीवन व्यर्थ नहीं है। हमारा हर अच्छा काम, हर नेक नीयत, हर छोटी-सी भलाई — सब अल्लाह के यहाँ सुरक्षित है। और जो लोग यह सोचते हैं कि उनके बुरे कर्मों का कोई हिसाब नहीं होगा, वे बड़ी भूल में हैं। अल्लाह की न्याय-व्यवस्था इतनी परिपूर्ण है कि कोई भी कर्म, चाहे वह राई के दाने के बराबर ही क्यों न हो, उसका हिसाब अवश्य होगा।
यह आयत हमें न्याय के दिन पर ईमान लाने की तरफ बुलाती है और हमें आश्वस्त करती है कि अल्लाह का न्याय बिल्कुल सटीक है। इसलिए हमें चाहिए कि हम अपनी ज़िंदगी को उद्देश्यपूर्ण बनाएँ, अच्छे कर्म करें, और यह याद रखें कि हमारा रब हर चीज़ का हिसाब रखने वाला है। यही इस सृष्टि का असली मक़सद है — कि हम अपने रब की इबादत करें, उसके बताए रास्ते पर चलें, और उस दिन के लिए तैयार रहें जब हर आत्मा को उसकी कमाई का पूरा बदला मिलेगा।
📜 आयत 20-24 — सूरा अल-जासिया
अनुवाद — अल-जासिया 22
सूरा अल-जासिया आयत 22 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और ख़ुदा ने सारे आसमान व ज़मीन को हिकमत व…सूरा आयत 22/37 — सूरा अल-जासिया الجاثية (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अल-जासिया सुनें, सूरा अल-जासिया अनुवाद, सूरा अल-जासिया mp3, सूरा अल-जासिया pdf. आयत 20–24. हिंदी अर्थ: اردو.
सूरा अल-जासिया
पवित्र क़ुरआन
Wednesday, September 30, 2026
अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए


