अल-जासिया · 35/37
अनुवाद उच्चारण — अल-जासिया
ذَٰلِكُم بِأَنَّكُمُ اتَّخَذْتُمْ آيَاتِ اللَّهِ هُزُوًا وَغَرَّتْكُمُ الْحَيَاةُ الدُّنْيَا ۚ فَالْيَوْمَ لَا يُخْرَجُونَ مِنْهَا وَلَا هُمْ يُسْتَعْتَبُونَ ۝٣٥
Zaalikum bi annakumut takhaztum aayaatil laahi huzuwanw wa gharratkumul hayaatud dunyaa; fal yawma laa yukhrajoona minhaa wa laahum yusta`taboon
📖 हिंदी अर्थ
ये इस सबब से कि तुम लोगों ने ख़ुदा की आयतों को हँसी ठट्ठा बना रखा था और दुनयावी ज़िन्दगी ने तुमको धोखे में डाल दिया था ग़रज़ ये लोग न तो आज दुनिया से निकाले जाएँगे और न उनको इसका मौका दिया जाएगा कि (तौबा करके ख़ुदा को) राज़ी कर ले

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • آيَاتِ اللَّهِ: अल्लाह की निशानियाँ और उसकी आयतें (क़ुरआन और उसके प्रमाण)।
  • هُزُوًا: मज़ाक़, ठट्ठा, उपहास।
  • غَرَّتْكُمُ: धोखा दिया, भ्रम में डाला।
  • الْحَيَاةُ الدُّنْيَا: दुनिया की ज़िंदगी, उसकी चमक-धमक और लज़्ज़तें।
  • لَا يُخْرَجُونَ مِنْهَا: वे (आग) से निकाले नहीं जाएँगे।
  • وَلَا هُمْ يُسْتَعْتَبُونَ: उनसे तौबा और माफ़ी माँगने का तक़ाज़ा नहीं किया जाएगा, न ही उन्हें अल्लाह को राज़ी करने का मौक़ा दिया जाएगा।

तफ़सीर:

यह आयत उन लोगों के लिए एक सख़्त चेतावनी और अफ़सोसनाक अंजाम का ज़िक्र है, जिन्होंने अल्लाह की आयतों और उसके भेजे हुए प्रमाणों को मज़ाक़ बना लिया था। अल्लाह तआला फ़रमाता है कि यह अज़ाब जो आज तुम्हें घेरे हुए है, वह तुम्हारे उसी बुरे रवैये का नतीजा है। तुमने अल्लाह की आयतों को सुनकर उनका मज़ाक़ उड़ाया, उन्हें झुठलाया और उन पर हँसे। तुम्हारे दिलों में उनके लिए कोई अदब और इज़्ज़त न थी। साथ ही, दुनिया की ज़िंदगी ने अपनी चमक-दमक, माल-दौलत और शहवतों से तुम्हें धोखे में डाल दिया। तुमने सोचा कि यही ज़िंदगी सब कुछ है, कोई मौत के बाद जीना नहीं, कोई हिसाब-किताब नहीं, कोई जज़ा-सज़ा नहीं। इसी ग़फ़लत और धोखे ने तुम्हें अंधा कर दिया और तुम अल्लाह के दीन से दूर होते चले गए।

आज, जब वह दिन आ गया है, तो उनके लिए कोई रास्ता नहीं बचा। वे आग से निकल नहीं सकते, क्योंकि यह उनका हमेशा का ठिकाना है। और न ही उनसे यह कहा जाएगा कि तुम अल्लाह से माफ़ी माँगो या उसे राज़ी करने की कोशिश करो, क्योंकि तौबा का दरवाज़ा बंद हो चुका है। वह मौक़ा उन्हें दुनिया में दिया गया था, लेकिन उन्होंने उसे गँवा दिया। आज न कोई उनकी सुनने वाला है, न कोई उनकी तरफ़दारी करने वाला है।

यह आयत हमें बहुत बड़ी सीख देती है कि अल्लाह की आयतों और उसके दीन के साथ कभी मज़ाक़ नहीं करना चाहिए। क़ुरआन और हदीस को सुनकर दिल में अदब और इज़्ज़त पैदा करनी चाहिए। दुनिया की चमक-दमक हमें धोखे में न डाले, क्योंकि यह ज़िंदगी तो बहुत छोटी है और आख़िरत हमेशा की ज़िंदगी है। जो लोग दुनिया को ही सब कुछ समझ बैठते हैं, वे आख़िरत में बहुत पछताएँगे, लेकिन पछताने का वक़्त तब निकल चुका होगा। अल्लाह हमें इस धोखे से बचाए और हमें अपनी आयतों का अदब करने वाला बनाए। आमीन।



📜 आयत 33-37 — अल-जासिया

33وَبَدَا لَهُمْ سَيِّئَاتُ مَا عَمِلُوا وَحَاقَ بِهِم مَّا كَانُوا بِهِ يَسْتَهْزِئُونَ
और उनके करतूतों की बुराईयाँ उस पर ज़ाहिर हो जाएँगी और जिस (अज़ाब) की ये हँसी उड़ाया करते थे उन्हें (हर तरफ से) घेर लेगा
34وَقِيلَ الْيَوْمَ نَنسَاكُمْ كَمَا نَسِيتُمْ لِقَاءَ يَوْمِكُمْ هَٰذَا وَمَأْوَاكُمُ النَّارُ وَمَا لَكُم مِّن نَّاصِرِينَ
और (उनसे) कहा जाएगा कि जिस तरह तुमने उस दिन के आने को भुला दिया था उसी तरह आज हम तुमको अपनी रहमत से अमदन भुला देंगे और तुम्हारा ठिकाना दोज़ख़ है और कोई तुम्हारा मददगार नहीं
35ذَٰلِكُم بِأَنَّكُمُ اتَّخَذْتُمْ آيَاتِ اللَّهِ هُزُوًا وَغَرَّتْكُمُ الْحَيَاةُ الدُّنْيَا ۚ فَالْيَوْمَ لَا يُخْرَجُونَ مِنْهَا وَلَا هُمْ يُسْتَعْتَبُونَ
ये इस सबब से कि तुम लोगों ने ख़ुदा की आयतों को हँसी ठट्ठा बना रखा था और दुनयावी ज़िन्दगी ने तुमको धोखे में डाल दिया था ग़रज़ ये लोग न तो आज दुनिया से निकाले जाएँगे और न उनको इसका मौका दिया जाएगा कि (तौबा करके ख़ुदा को) राज़ी कर ले
36فَلِلَّهِ الْحَمْدُ رَبِّ السَّمَاوَاتِ وَرَبِّ الْأَرْضِ رَبِّ الْعَالَمِينَ
पस सब तारीफ ख़ुदा ही के लिए सज़ावार है जो सारे आसमान का मालिक और ज़मीन का मालिक (ग़रज़) सारे जहॉन का मालिक है
37وَلَهُ الْكِبْرِيَاءُ فِي السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضِ ۖ وَهُوَ الْعَزِيزُ الْحَكِيمُ
और सारे आसमान व ज़मीन में उसके लिए बड़ाई है और वही (सब पर) ग़ालिब हिकमत वाला है
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अनुवाद — अल-जासिया 35

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Tuesday, August 18, 2026

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