अल-जासिया · 36/37
अनुवाद उच्चारण — अल-जासिया
فَلِلَّهِ الْحَمْدُ رَبِّ السَّمَاوَاتِ وَرَبِّ الْأَرْضِ رَبِّ الْعَالَمِينَ ۝٣٦
Falillaahil hamdu Rabbis samaawaati wa Rabbil ardi Rabbil-`aalameen
📖 हिंदी अर्थ
पस सब तारीफ ख़ुदा ही के लिए सज़ावार है जो सारे आसमान का मालिक और ज़मीन का मालिक (ग़रज़) सारे जहॉन का मालिक है

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • فَلِلَّهِ الْحَمْدُ: सारी प्रशंसा और स्तुति अकेले अल्लाह के लिए है।
  • رَبِّ السَّمَاوَاتِ: आसमानों का पालनहार, उनका रचयिता और प्रबंधक।
  • رَبِّ الْأَرْضِ: धरती का पालनहार, उसका रचयिता और प्रबंधक।
  • رَبِّ الْعَالَمِينَ: सभी संसारों और सृष्टियों का पालनहार।

विस्तृत व्याख्या:

इस पवित्र आयत में अल्लाह तआला अपने बंदों को सिखा रहा है कि सारी प्रशंसा, स्तुति और शुक्र अकेले उसी का हक़ है। जो नेमतें और भलाइयाँ इस कायनात में मौजूद हैं, चाहे वे आसमानों की बुलंदियों में हों या धरती की गहराइयों में, सब कुछ उसी की देन है। वही इन सबका पालनहार है, रचयिता है और प्रबंधक है। आसमानों की रौशनी, बारिश का इंतज़ाम, धरती की फ़सलें, जानवर, इंसान, फ़रिश्ते, जिन्नात — यानी हर वो चीज़ जो इस कायनात में है, वो उसी के हुक्म से चल रही है।

ये आयत हमें सिखाती है कि जब हम अल्लाह की नेमतों को देखें, जब हम सुबह उठें और शाम करें, जब हम अपने चारों ओर की सृष्टि पर ग़ौर करें, तो हमारी ज़ुबान से बस यही निकलना चाहिए: "अल्हम्दुलिल्लाह!" क्योंकि वही असली मालिक है, और उसके सिवा कोई पूजा के लायक़ नहीं। ये आयत उन लोगों के लिए एक कड़ा जवाब भी है जो पत्थरों और मूर्तियों की पूजा करते थे, जो अपनी मन-घड़त चीज़ों को ख़ुदा का दर्जा देते थे। अल्लाह फ़रमाता है कि जब सारी कायनात का पालनहार, रचयिता और मालिक सिर्फ़ अल्लाह है, तो फिर किसी और की इबादत कैसे जायज़ हो सकती है?

प्यारे बंदो! जब हम इस आयत को पढ़ते हैं, तो हमें अपने दिल में अल्लाह की अज़मत और क़ुदरत का एहसास होना चाहिए। हमें ये यक़ीन करना चाहिए कि हर चीज़ उसी के हाथ में है, और उसी की तरफ़ हमें लौटकर जाना है। ये आयत हमें तौहीद की तालीम देती है — यानी अल्लाह की वहदानियत (एकता) का सबूत देती है और शिर्क (किसी और को अल्लाह का साझी बनाने) की जड़ें काटती है। इसलिए हमें चाहिए कि हम अपनी ज़िंदगी के हर पल में अल्लाह का शुक्र अदा करें, उसकी इबादत करें और उसी से मदद माँगें। यही हमारी कामयाबी है, यही हमारी नजात है।



📜 आयत 34-37 — अल-जासिया

34وَقِيلَ الْيَوْمَ نَنسَاكُمْ كَمَا نَسِيتُمْ لِقَاءَ يَوْمِكُمْ هَٰذَا وَمَأْوَاكُمُ النَّارُ وَمَا لَكُم مِّن نَّاصِرِينَ
और (उनसे) कहा जाएगा कि जिस तरह तुमने उस दिन के आने को भुला दिया था उसी तरह आज हम तुमको अपनी रहमत से अमदन भुला देंगे और तुम्हारा ठिकाना दोज़ख़ है और कोई तुम्हारा मददगार नहीं
35ذَٰلِكُم بِأَنَّكُمُ اتَّخَذْتُمْ آيَاتِ اللَّهِ هُزُوًا وَغَرَّتْكُمُ الْحَيَاةُ الدُّنْيَا ۚ فَالْيَوْمَ لَا يُخْرَجُونَ مِنْهَا وَلَا هُمْ يُسْتَعْتَبُونَ
ये इस सबब से कि तुम लोगों ने ख़ुदा की आयतों को हँसी ठट्ठा बना रखा था और दुनयावी ज़िन्दगी ने तुमको धोखे में डाल दिया था ग़रज़ ये लोग न तो आज दुनिया से निकाले जाएँगे और न उनको इसका मौका दिया जाएगा कि (तौबा करके ख़ुदा को) राज़ी कर ले
36فَلِلَّهِ الْحَمْدُ رَبِّ السَّمَاوَاتِ وَرَبِّ الْأَرْضِ رَبِّ الْعَالَمِينَ
पस सब तारीफ ख़ुदा ही के लिए सज़ावार है जो सारे आसमान का मालिक और ज़मीन का मालिक (ग़रज़) सारे जहॉन का मालिक है
37وَلَهُ الْكِبْرِيَاءُ فِي السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضِ ۖ وَهُوَ الْعَزِيزُ الْحَكِيمُ
और सारे आसमान व ज़मीन में उसके लिए बड़ाई है और वही (सब पर) ग़ालिब हिकमत वाला है
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अनुवाद — अल-जासिया 36

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Tuesday, August 18, 2026

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