अल-अहकाफ · 2/35
अनुवाद उच्चारण — अल-अहकाफ
تَنزِيلُ الْكِتَابِ مِنَ اللَّهِ الْعَزِيزِ الْحَكِيمِ ۝٢
Tanzeelul Kitaabi minal laahil-`Azeezil Hakeem
📖 हिंदी अर्थ
ये किताब ग़ालिब (व) हकीम ख़ुदा की तरफ से नाज़िल हुई है

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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • तन्ज़ील – उतारना, अवतरित करना
  • अल-किताब – यह क़ुरआन
  • अल-अज़ीज़ – वह शक्तिशाली जिसे कोई पराजित न कर सके
  • अल-हकीम – पूर्ण ज्ञान और हिकमत वाला, जो हर काम में युक्तिपूर्ण कार्य करता है

तफ़सीर:

यह आयत क़ुरआन की महानता और उसके स्रोत की पवित्रता को स्पष्ट करती है। अल्लाह तआला फ़रमाता है कि यह किताब (क़ुरआन) किसी इंसान का बनाया हुआ नहीं है, बल्कि यह अल्लाह की ओर से अवतरित हुई है। यह वह अल्लाह है जो अज़ीज़ है, यानी वह सर्वशक्तिमान और अजेय है, उसकी शक्ति के आगे कोई नहीं टिक सकता, कोई उसे मात नहीं दे सकता। और वह हकीम है, यानी वह हर काम में गहरी हिकमत और युक्ति रखता है — चाहे वह उसकी सृष्टि हो, उसका प्रबंधन हो, या उसके द्वारा भेजे गए आदेश और शरीअत हों।

यह आयत हमें बताती है कि क़ुरआन कोई साधारण पुस्तक नहीं है। यह उस अल्लाह का कलाम है जो सबसे शक्तिशाली है और जिसकी हर बात में हिकमत है। इसलिए इस किताब में कोई कमी, कोई विरोधाभास, कोई त्रुटि नहीं हो सकती। जो व्यक्ति इस किताब को अपनाता है, वह उस शक्तिशाली और हकीम अल्लाह से जुड़ जाता है जो उसकी रक्षा करता है और उसे सही रास्ता दिखाता है।

दावती पहलू:

प्यारे भाइयों और बहनों! ज़रा सोचिए — अगर यह क़ुरआन किसी इंसान की रचना होती, तो उसमें कमियाँ होतीं, बदलाव आते, और वह समय के साथ पुराना पड़ जाता। लेकिन यह क़ुरआन उस अल्लाह का कलाम है जो अज़ीज़ है — उसे कोई हरा नहीं सकता — और हकीम है — उसकी हर बात में भलाई है। यही वजह है कि आज 1400 से अधिक वर्षों के बाद भी यह किताब उतनी ही ताज़ा, उतनी ही सच्ची और उतनी ही मार्गदर्शक है।

यह आयत हमें दावत देती है कि हम इस किताब को अपने जीवन में उतारें। जिस अल्लाह ने यह किताब उतारी है, वह हमें कभी अकेला नहीं छोड़ेगा। जब हम क़ुरआन को पढ़ते हैं, समझते हैं और उस पर अमल करते हैं, तो हम उस अज़ीज़ और हकीम अल्लाह की पनाह में आ जाते हैं। क्या इससे बड़ी कोई भलाई हो सकती है कि हमारा रब हमारा रक्षक और मार्गदर्शक बने?

आओ, हम इस किताब को सिर्फ़ सजावट के लिए न रखें, बल्कि इसे पढ़ें, समझें और अपने जीवन का नक्शा बनाएँ। यही हमारी कामयाबी है, यही हमारी नजात है।



📜 आयत 1-4 — अल-अहकाफ

1حم
हा मीम
2تَنزِيلُ الْكِتَابِ مِنَ اللَّهِ الْعَزِيزِ الْحَكِيمِ
ये किताब ग़ालिब (व) हकीम ख़ुदा की तरफ से नाज़िल हुई है
3مَا خَلَقْنَا السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضَ وَمَا بَيْنَهُمَا إِلَّا بِالْحَقِّ وَأَجَلٍ مُّسَمًّى ۚ وَالَّذِينَ كَفَرُوا عَمَّا أُنذِرُوا مُعْرِضُونَ
हमने तो सारे आसमान व ज़मीन और जो कुछ इन दोनों के दरमियान है हिकमत ही से एक ख़ास वक्त तक के लिए ही पैदा किया है और कुफ्फ़ार जिन चीज़ों से डराए जाते हैं उन से मुँह फेर लेते हैं
4قُلْ أَرَأَيْتُم مَّا تَدْعُونَ مِن دُونِ اللَّهِ أَرُونِي مَاذَا خَلَقُوا مِنَ الْأَرْضِ أَمْ لَهُمْ شِرْكٌ فِي السَّمَاوَاتِ ۖ ائْتُونِي بِكِتَابٍ مِّن قَبْلِ هَٰذَا أَوْ أَثَارَةٍ مِّنْ عِلْمٍ إِن كُنتُمْ صَادِقِينَ
(ऐ रसूल) तुम पूछो कि ख़ुदा को छोड़ कर जिनकी तुम इबादत करते हो क्या तुमने उनको देखा है मुझे भी तो दिखाओ कि उन लोगों ने ज़मीन में क्या चीज़े पैदा की हैं या आसमानों (के बनाने) में उनकी शिरकत है तो अगर तुम सच्चे हो तो उससे पहले की कोई किताब (या अगलों के) इल्म का बक़िया हो तो मेरे सामने पेश करो
अल-अहकाफकुरान सूची
35आयत
मक्कीRevelation
2आयत

अनुवाद — अल-अहकाफ 2

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पवित्र क़ुरआन


Tuesday, August 18, 2026

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