मुहम्मद · 25/38
अनुवाद उच्चारण — मुहम्मद
إِنَّ الَّذِينَ ارْتَدُّوا عَلَىٰ أَدْبَارِهِم مِّن بَعْدِ مَا تَبَيَّنَ لَهُمُ الْهُدَى ۙ الشَّيْطَانُ سَوَّلَ لَهُمْ وَأَمْلَىٰ لَهُمْ ۝٢٥
Innal lazeenar taddoo `alaaa adbaarihim mim ba`di maa tabaiyana lahumul hudash Shaitaanu sawwala lahum wa amlaa lahum
📖 हिंदी अर्थ
बेशक जो लोग राहे हिदायत साफ़ साफ़ मालूम होने के बाद उलटे पाँव (कुफ़्र की तरफ) फिर गये शैतान ने उन्हें (बुते देकर) ढील दे रखी है और उनकी (तमन्नाओं) की रस्सियाँ दराज़ कर दी हैं

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • ارْتَدُّوا عَلَىٰ أَدْبَارِهِم: अपनी एड़ियों के बल पलट गए, यानी ईमान से कुफ्र की ओर लौट गए।
  • تَبَيَّنَ لَهُمُ الْهُدَى: उनके लिए हिदायत (सत्य मार्ग) स्पष्ट हो गया था।
  • سَوَّلَ لَهُمْ: शैतान ने उनके कर्मों को सुंदर बनाकर दिखाया और उन्हें धोखा दिया।
  • أَمْلَىٰ لَهُمْ: शैतान ने उन्हें लंबी आयु और दुनिया की आशाओं में मोहित कर दिया, यानी उन्हें झूठी उम्मीदें दीं।

तफसीर (व्याख्या):

यह आयत उन लोगों के बारे में बताती है जो सत्य को जानने और समझने के बाद भी ईमान से फिर गए और कुफ्र व निफाक़ (पाखंड) की ओर लौट गए। उन्होंने हिदायत का रास्ता छोड़कर गुमराही को अपना लिया, जबकि उनके सामने सत्य पूरी तरह वाज़ेह हो चुका था। यह वे लोग हैं जिन्होंने अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) की सच्चाई को पहचान लिया था, फिर भी उन्होंने अहंकार और दुनियावी मोह के कारण उसे ठुकरा दिया।

इस आयत में बताया गया है कि इन लोगों के इस कृत्य का असली कारण शैतान है, जिसने उनके बुरे कर्मों को उनकी नज़रों में सुंदर बना दिया और उन्हें लंबी उम्र और दुनिया की झूठी आशाओं में उलझा दिया। शैतान ने उन्हें यह वहम दिया कि उन्हें माफ़ कर दिया जाएगा या उनके पास अभी बहुत समय है, जिससे उन्होंने तौबा को टाल दिया और गुमराही पर ही डटे रहे।

यह आयत हमें एक बहुत बड़ा सबक देती है: जब अल्लाह की तरफ से सत्य स्पष्ट हो जाए, तो उसे कबूल करने में देरी नहीं करनी चाहिए। शैतान का सबसे बड़ा हथियार यही है कि वह इंसान को टालमटोल में डाल दे और उसे लंबी उम्र की झूठी उम्मीद देकर ईमान और अच्छे कर्मों से दूर रखे।

अल्लाह तआला हमें सत्य को पहचानने और उस पर साबित क़दम रहने की तौफ़ीक़ दे, और शैतान के धोखों से हमारी हिफ़ाज़त करे। याद रखें, दुनिया की यह ज़िंदगी बहुत छोटी है, और आख़िरत की ज़िंदगी हमेशा की है। जो लोग सत्य को जानकर भी उसे ठुकरा देते हैं, वे सबसे बड़े नुक़सान में हैं। अल्लाह हमें हिदायत पर चलने की तौफ़ीक़ दे और हमारे दिलों को ईमान पर साबित रखे। आमीन।



📜 आयत 23-27 — मुहम्मद

23أُولَٰئِكَ الَّذِينَ لَعَنَهُمُ اللَّهُ فَأَصَمَّهُمْ وَأَعْمَىٰ أَبْصَارَهُمْ
और (गोया ख़ुद उसने) उन (के कानों) को बहरा और ऑंखों को अंधा कर दिया है
24أَفَلَا يَتَدَبَّرُونَ الْقُرْآنَ أَمْ عَلَىٰ قُلُوبٍ أَقْفَالُهَا
तो क्या लोग क़ुरान में (ज़रा भी) ग़ौर नहीं करते या (उनके) दिलों पर ताले लगे हुए हैं
25إِنَّ الَّذِينَ ارْتَدُّوا عَلَىٰ أَدْبَارِهِم مِّن بَعْدِ مَا تَبَيَّنَ لَهُمُ الْهُدَى ۙ الشَّيْطَانُ سَوَّلَ لَهُمْ وَأَمْلَىٰ لَهُمْ
बेशक जो लोग राहे हिदायत साफ़ साफ़ मालूम होने के बाद उलटे पाँव (कुफ़्र की तरफ) फिर गये शैतान ने उन्हें (बुते देकर) ढील दे रखी है और उनकी (तमन्नाओं) की रस्सियाँ दराज़ कर दी हैं
26ذَٰلِكَ بِأَنَّهُمْ قَالُوا لِلَّذِينَ كَرِهُوا مَا نَزَّلَ اللَّهُ سَنُطِيعُكُمْ فِي بَعْضِ الْأَمْرِ ۖ وَاللَّهُ يَعْلَمُ إِسْرَارَهُمْ
यह इसलिए जो लोग ख़ुदा की नाज़िल की हुई(किताब) से बेज़ार हैं ये उनसे कहते हैं कि बाज़ कामों में हम तुम्हारी ही बात मानेंगे और ख़ुदा उनके पोशीदा मशवरों से वाक़िफ है
27فَكَيْفَ إِذَا تَوَفَّتْهُمُ الْمَلَائِكَةُ يَضْرِبُونَ وُجُوهَهُمْ وَأَدْبَارَهُمْ
तो जब फ़रिश्तें उनकी जान निकालेंगे उस वक्त उनका क्या हाल होगा कि उनके चेहरों पर और उनकी पुश्त पर मारते जाएँगे
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अनुवाद — मुहम्मद 25

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Wednesday, August 19, 2026

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