मुहम्मद · 26/38
अनुवाद उच्चारण — मुहम्मद
ذَٰلِكَ بِأَنَّهُمْ قَالُوا لِلَّذِينَ كَرِهُوا مَا نَزَّلَ اللَّهُ سَنُطِيعُكُمْ فِي بَعْضِ الْأَمْرِ ۖ وَاللَّهُ يَعْلَمُ إِسْرَارَهُمْ ۝٢٦
Zaalika bi annahum qaaloo lillazeena karihoo maa nazzalal laahu sanutee`ukum fee ba`dil amri wallaahu ya`lamu israarahum
📖 हिंदी अर्थ
यह इसलिए जो लोग ख़ुदा की नाज़िल की हुई(किताब) से बेज़ार हैं ये उनसे कहते हैं कि बाज़ कामों में हम तुम्हारी ही बात मानेंगे और ख़ुदा उनके पोशीदा मशवरों से वाक़िफ है
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • إِسْرَارَهُمْ (उनके राज़): यानी वो बातें जो वे अपने दिलों में छिपाते हैं और आपस में चुपके-चुपके कहते हैं।

तफ़सीर (व्याख्या):

यह अल्लाह का वह फ़ैसला और उनकी सज़ा, जो मुनाफ़िक़ों (कपटियों) को मिली, इस वजह से था कि उन्होंने उन लोगों (मुशरिकों और यहूदियों) से, जिन्होंने अल्लाह द्वारा उतारी गई वही (क़ुरआन) को नापसंद किया, यह कहा: "हम कुछ मामलों में तुम्हारी बात मान लेंगे" — यानी वे उनसे मिलकर नबी (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) की दुश्मनी और जिहाद से रोकने में सहयोग करने का वादा कर रहे थे। उन्होंने यह बात चुपके से कही, लेकिन अल्लाह तआला ने उनके इस राज़ को खोलकर रख दिया। अल्लाह उन सब बातों को खूब जानता है जो वे अपने दिलों में छिपाते हैं और आपस में चुपके-चुपके कहते हैं। उसके ज्ञान से कोई चीज़ छिपी नहीं है, और वह जो चाहता है, अपने नबी (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) पर प्रकट कर देता है।

दावती पहलू:

यह आयत हर मुसलमान के लिए एक बड़ी सीख और चेतावनी है कि किसी भी हालत में अल्लाह और उसके रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) के हुक्म के खिलाफ किसी और की बात न मानी जाए। चाहे वह कितना ही बड़ा, ताकतवर या करीबी क्यों न हो। मोमिन की पहचान यह है कि वह अल्लाह की राह में जिहाद करे, दीन की मदद करे और किसी भी दुश्मन से मिलकर दीन को कमज़ोर करने की कोशिश न करे। अल्लाह तआला हर छिपी बात को जानता है, और क़ियामत के दिन हर राज़ खोल दिया जाएगा। इसलिए इंसान को चाहिए कि वह अपने दिल और ज़ुबान दोनों को साफ रखे, और अल्लाह से डरता हुआ वही कहे जो सच और सही हो। याद रखें, अल्लाह की नज़र से कोई चीज़ छिपी नहीं है — न छोटी, न बड़ी, न ज़ाहिर, न छिपी।

🎧 सुनें

📜 आयत 24-28 — मुहम्मद

24أَفَلَا يَتَدَبَّرُونَ الْقُرْآنَ أَمْ عَلَىٰ قُلُوبٍ أَقْفَالُهَا
तो क्या लोग क़ुरान में (ज़रा भी) ग़ौर नहीं करते या (उनके) दिलों पर ताले लगे हुए हैं
25إِنَّ الَّذِينَ ارْتَدُّوا عَلَىٰ أَدْبَارِهِم مِّن بَعْدِ مَا تَبَيَّنَ لَهُمُ الْهُدَى ۙ الشَّيْطَانُ سَوَّلَ لَهُمْ وَأَمْلَىٰ لَهُمْ
बेशक जो लोग राहे हिदायत साफ़ साफ़ मालूम होने के बाद उलटे पाँव (कुफ़्र की तरफ) फिर गये शैतान ने उन्हें (बुते देकर) ढील दे रखी है और उनकी (तमन्नाओं) की रस्सियाँ दराज़ कर दी हैं
26ذَٰلِكَ بِأَنَّهُمْ قَالُوا لِلَّذِينَ كَرِهُوا مَا نَزَّلَ اللَّهُ سَنُطِيعُكُمْ فِي بَعْضِ الْأَمْرِ ۖ وَاللَّهُ يَعْلَمُ إِسْرَارَهُمْ
यह इसलिए जो लोग ख़ुदा की नाज़िल की हुई(किताब) से बेज़ार हैं ये उनसे कहते हैं कि बाज़ कामों में हम तुम्हारी ही बात मानेंगे और ख़ुदा उनके पोशीदा मशवरों से वाक़िफ है
27فَكَيْفَ إِذَا تَوَفَّتْهُمُ الْمَلَائِكَةُ يَضْرِبُونَ وُجُوهَهُمْ وَأَدْبَارَهُمْ
तो जब फ़रिश्तें उनकी जान निकालेंगे उस वक्त उनका क्या हाल होगा कि उनके चेहरों पर और उनकी पुश्त पर मारते जाएँगे
28ذَٰلِكَ بِأَنَّهُمُ اتَّبَعُوا مَا أَسْخَطَ اللَّهَ وَكَرِهُوا رِضْوَانَهُ فَأَحْبَطَ أَعْمَالَهُمْ
ये इस सबब से कि जिस चीज़ों से ख़ुदा नाख़ुश है उसकी तो ये लोग पैरवी करते हैं और जिसमें ख़ुदा की ख़ुशी है उससे बेज़ार हैं तो ख़ुदा ने भी उनकी कारस्तानियों को अकारत कर दिया
मुहम्मदकुरान सूची
38आयत
मदनीRevelation
26आयत

अनुवाद — मुहम्मद 26

सूरा मुहम्मद आयत 26 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : यह इसलिए जो लोग ख़ुदा की नाज़िल की हुई(किताब) से…

सूरा आयत 26/38 — मुहम्मद محمد (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: मुहम्मद सुनें, मुहम्मद अनुवाद, मुहम्मद mp3, मुहम्मद pdf. आयत 24–28. हिंदी अर्थ: اردو.




पवित्र क़ुरआन


Tuesday, August 18, 2026

अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए