अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- أَفَلَا يَتَدَبَّرُونَ – क्या वे विचार-मनन नहीं करते?
- الْقُرْآنَ – कुरआन (की आयतों और शिक्षाओं पर)
- أَمْ – बल्कि (यहाँ इसका अर्थ 'बल्कि' है, प्रश्नवाचक नहीं)
- عَلَىٰ قُلُوبٍ – उनके दिलों पर
- أَقْفَالُهَا – उनके ताले (जो उन्हें बंद किए हुए हैं)
विस्तृत तफ़सीर (व्याख्या):
अल्लाह तआला इस आयत में मुनाफ़िक़ीन (कपटियों) और कुरआन से मुँह मोड़ने वालों पर करारा सवाल करते हुए फ़रमाते हैं: क्या ये लोग कुरआन पर ग़ौर-ओ-फ़िक्र नहीं करते? क्या वे इसकी आयतों को पढ़कर उन पर विचार नहीं करते? क्या वे इसकी नसीहतों और हिदायतों को समझने की कोशिश नहीं करते?
अगर ये लोग सच्चे दिल से कुरआन पर ध्यान देते, तो यह किताब उन्हें हर भलाई का रास्ता दिखाती और हर बुराई से दूर करती। यह उन्हें सच्चाई, ईमान, अच्छे आचरण और सीधे रास्ते की ओर बुलाती। लेकिन सवाल यह है कि आख़िर ये लोग इतनी आसान और स्पष्ट किताब को समझ क्यों नहीं पाते?
इसका जवाब अल्लाह तआला ख़ुद देते हैं: "बल्कि उनके दिलों पर ताले लगे हुए हैं।" यानी असली वजह यह नहीं कि कुरआन में कोई कमी है या वह अस्पष्ट है, बल्कि असली वजह यह है कि इन लोगों के दिल बंद हैं। उन्होंने ख़ुद अपने दिलों पर अहंकार, हठधर्मिता, पापों और दुनिया की मोहब्बत के ताले लगा रखे हैं। जब दिल पर यह ताला लग जाता है, तो न कोई नसीहत उसमें असर करती है, न कोई नसीहत उसे छू पाती है।
यह आयत हमें बताती है कि कुरआन से फ़ायदा उठाने के लिए सबसे ज़रूरी चीज़ एक खुला और नर्म दिल है। जो दिल अल्लाह की याद से भरा हो, जो सच्चाई को क़बूल करने के लिए तैयार हो, उसी दिल पर कुरआन की आयतें असर करती हैं। इसलिए हमें चाहिए कि हम अपने दिलों को साफ़ रखें, पापों से बचें, अहंकार और हठधर्मिता को छोड़ें, ताकि कुरआन की रोशनी हमारे दिलों में उतर सके और हमें इस दुनिया और आख़िरत की भलाई मिल सके।
याद रखिए! कुरआन हर उस दिल के लिए हिदायत है जो सच्चाई की तलाश में है। अल्लाह तआला ने इस किताब को आसान बनाया है, लेकिन जो लोग इसे नकारते हैं और इस पर विचार नहीं करते, वे ख़ुद अपने ऊपर ज़ुल्म करते हैं। आइए, हम अपने दिलों के ताले खोलें और अल्लाह की इस रहमत भरी किताब को अपनी ज़िंदगी का रहनुमा बनाएँ। यही हमारी कामयाबी का रास्ता है।
📜 आयत 22-26 — मुहम्मद
अनुवाद — मुहम्मद 24
सूरा मुहम्मद आयत 24 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : तो क्या लोग क़ुरान में (ज़रा भी) ग़ौर नहीं करते…सूरा आयत 24/38 — मुहम्मद محمد (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: मुहम्मद सुनें, मुहम्मद अनुवाद, मुहम्मद mp3, मुहम्मद pdf. आयत 22–26. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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