अल-फतह · 8/29
अनुवाद उच्चारण — अल-फतह
إِنَّا أَرْسَلْنَاكَ شَاهِدًا وَمُبَشِّرًا وَنَذِيرًا ۝٨
Innaaa arsalnaaka shaahi danw wa mubashshiranw wa nazeera
📖 हिंदी अर्थ
(ऐ रसूल) हमने तुमको (तमाम आलम का) गवाह और ख़ुशख़बरी देने वाला और धमकी देने वाला (पैग़म्बर बनाकर) भेजा
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • शाहिदन (شَاهِدًا): गवाह बनाने वाला, उपस्थित रहने वाला
  • मुबश्शिरन (مُبَشِّرًا): खुशखबरी देने वाला
  • नज़ीरन (نَذِيرًا): डराने वाला, सचेत करने वाला

तफ़सीर (व्याख्या):

यह आयत हमारे प्यारे नबी ﷺ के उच्च पद और महान मिशन को बयान करती है। अल्लाह तआला फ़रमाता है कि हमने आपको ﷺ भेजा है:

पहला: शाहिद (गवाह) — यानी आप ﷺ अपनी उम्मत पर गवाह होंगे, कि आपने उन्हें अल्लाह का संदेश पूरा पहुँचा दिया। आप ﷺ क़ियामत के दिन गवाही देंगे कि जिन लोगों ने आपकी बात मानी उन्होंने भलाई पाई, और जिन्होंने झुठलाया उन्होंने अपना नुक़सान किया। यह बात हमें बताती है कि हमारे नबी ﷺ की गवाही हमारे लिए रहमत और हिदायत का ज़रिया है।

दूसरा: मुबश्शिर (खुशखबरी देने वाला) — आप ﷺ उन लोगों को जन्नत की खुशखबरी देते हैं जो ईमान लाते हैं, नेक अमल करते हैं, और अल्लाह के दीन की मदद करते हैं। यह खुशखबरी सिर्फ आख़िरत तक सीमित नहीं, बल्कि दुनिया में भी अल्लाह उन्हें नुसरत (मदद), इज़्ज़त और तमकीन (अधिकार) अता करता है। यह हमारे लिए बहुत बड़ी उम्मीद और खुशी की बात है कि हमारा रब हमें जन्नत की दावत दे रहा है।

तीसरा: नज़ीर (डराने वाला) — आप ﷺ उन लोगों को आगाह करते हैं जो अल्लाह की नाफ़रमानी करते हैं, कि उनके लिए दुनिया में ज़िल्लत और हार है, और आख़िरत में दर्दनाक अज़ाब है। यह अल्लाह का इंसाफ़ है कि उसने अपने रसूल के ज़रिए लोगों को साफ़-साफ़ चेतावनी दे दी, ताकि कोई बहाना न बना सके।

इस आयत में हमारे लिए बहुत बड़ी नसीहत है — हमें अपने नबी ﷺ पर ईमान लाना चाहिए, उनकी सुन्नत पर चलना चाहिए, और उनके बताए रास्ते पर क़दम बढ़ाना चाहिए। जो आपकी बात मानेगा वह दुनिया और आख़िरत दोनों में कामयाब होगा, और जो मुँह मोड़ेगा वह नुक़सान उठाएगा।

अल्लाह तआला हम सबको अपने नबी ﷺ की सच्ची उम्मत बनाए, और उनकी शफ़ाअत हमें नसीब करे। आमीन।

🎧 सुनें

📜 आयत 6-10 — अल-फतह

6وَيُعَذِّبَ الْمُنَافِقِينَ وَالْمُنَافِقَاتِ وَالْمُشْرِكِينَ وَالْمُشْرِكَاتِ الظَّانِّينَ بِاللَّهِ ظَنَّ السَّوْءِ ۚ عَلَيْهِمْ دَائِرَةُ السَّوْءِ ۖ وَغَضِبَ اللَّهُ عَلَيْهِمْ وَلَعَنَهُمْ وَأَعَدَّ لَهُمْ جَهَنَّمَ ۖ وَسَاءَتْ مَصِيرًا
और मुनाफिक़ मर्द और मुनाफ़िक़ औरतों और मुशरिक मर्द और मुशरिक औरतों पर जो ख़ुदा के हक़ में बुरे बुरे ख्याल रखते हैं अज़ाब नाज़िल करे उन पर (मुसीबत की) बड़ी गर्दिश है (और ख़ुदा) उन पर ग़ज़बनाक है और उसने उस पर लानत की है और उनके लिए जहन्नुम को तैयार कर रखा है और वह (क्या) बुरी जगह है
7وَلِلَّهِ جُنُودُ السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضِ ۚ وَكَانَ اللَّهُ عَزِيزًا حَكِيمًا
और सारे आसमान व ज़मीन के लश्कर ख़ुदा ही के हैं और ख़ुदा तो बड़ा वाक़िफ़कार (और) ग़ालिब है
8إِنَّا أَرْسَلْنَاكَ شَاهِدًا وَمُبَشِّرًا وَنَذِيرًا
(ऐ रसूल) हमने तुमको (तमाम आलम का) गवाह और ख़ुशख़बरी देने वाला और धमकी देने वाला (पैग़म्बर बनाकर) भेजा
9لِّتُؤْمِنُوا بِاللَّهِ وَرَسُولِهِ وَتُعَزِّرُوهُ وَتُوَقِّرُوهُ وَتُسَبِّحُوهُ بُكْرَةً وَأَصِيلًا
ताकि (मुसलमानों) तुम लोग ख़ुदा और उसके रसूल पर ईमान लाओ और उसकी मदद करो और उसको बुज़ुर्ग़ समझो और सुबह और शाम उसी की तस्बीह करो
10إِنَّ الَّذِينَ يُبَايِعُونَكَ إِنَّمَا يُبَايِعُونَ اللَّهَ يَدُ اللَّهِ فَوْقَ أَيْدِيهِمْ ۚ فَمَن نَّكَثَ فَإِنَّمَا يَنكُثُ عَلَىٰ نَفْسِهِ ۖ وَمَنْ أَوْفَىٰ بِمَا عَاهَدَ عَلَيْهُ اللَّهَ فَسَيُؤْتِيهِ أَجْرًا عَظِيمًا
बेशक जो लोग तुमसे बैयत करते हैं वह ख़ुदा ही से बैयत करते हैं ख़ुदा की क़ूवत (कुदरत तो बस सबकी कूवत पर) ग़ालिब है तो जो अहद को तोड़ेगा तो अपने अपने नुक़सान के लिए अहद तोड़ता है और जिसने उस बात को जिसका उसने ख़ुदा से अहद किया है पूरा किया तो उसको अनक़रीब ही अज्रे अज़ीम अता फ़रमाएगा
अल-फतहकुरान सूची
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8आयत

अनुवाद — अल-फतह 8

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Tuesday, August 18, 2026

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