अल-माइदा · 10/120
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-माइदा
وَالَّذِينَ كَفَرُوا وَكَذَّبُوا بِآيَاتِنَا أُولَٰئِكَ أَصْحَابُ الْجَحِيمِ ۝١٠
Wallazeena kafaroo wa kazzaboo bi Aayaatinaaa ulaaa`ika Ashaabul Jaheem
📖 हिंदी अर्थ
और जिन लोगों ने कुफ़्र इख्तेयार किया और हमारी आयतों को झुठलाया वह जहन्नुमी हैं (

M Mishary Rashid Alafasy ✓
M Mahmoud Khalil Al-Husary ✓
A Abdurrahman As-Sudais ✓
M Mohamed Siddiq Al-Minshawi ✓
A Abdul Basit Abdul Samad ✓
A Ali Al-Hudhaify ✓
A Ahmed ibn Ali al-Ajamy ✓
A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
M Muhammad Ayyoub ✓
A Abdullah Basfar ✓
A Abdullah Al-Juhani ✓
M Maher Al Muaiqly ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • كَفَرُوا: इनकार किया, अविश्वास किया।
  • كَذَّبُوا: झुठलाया, झूठा कहा।
  • بِآيَاتِنَا: हमारी निशानियों और प्रमाणों को।
  • أَصْحَابُ الْجَحِيمِ: नरक (जहन्नम) के साथी, यानी उसमें हमेशा रहने वाले।

विस्तृत व्याख्या:

इस आयत में अल्लाह तआला उन लोगों का हाल बयान कर रहा है जिन्होंने उसकी वहदानियत (एकता) का इनकार किया और उसकी आयतों—चाहे वे क़ुरआन की आयतें हों या क़ुदरत के निशान या पैग़म्बरों के माध्यम से आए प्रमाण—को झुठलाया। ऐसे लोगों के लिए अल्लाह ने स्पष्ट कर दिया कि वे जहन्नम (नरक) के साथी हैं, यानी वे उस आग में हमेशा के लिए रहेंगे। जिस तरह एक साथी अपने साथी से अलग नहीं होता, उसी तरह ये लोग नरक से कभी अलग नहीं होंगे। यह उनके कुफ्र (इनकार) और तकज़ीब (झुठलाने) की सज़ा है।

यह आयत बनी नज़ीर (यहूदियों के एक क़बीले) के बारे में भी नाज़िल हुई, लेकिन इसका हुक्म आम है और हर उस व्यक्ति पर लागू होता है जो अल्लाह के साथ कुफ्र करे और उसकी आयतों को झुठलाए। यहाँ "आयतों" से मुराद अल्लाह की वे दलीलें और निशानियाँ हैं जो उसके पैग़म्बरों के ज़रिए आईं, जो सच्चाई को साफ़-साफ़ बयान करती हैं। इनकार करने वालों के पास कोई उज़्र (बहाना) नहीं, क्योंकि सच्चाई उनके सामने रख दी गई थी।

फ़ायदे और सबक:

  1. अल्लाह की आयतों का इनकार और झुठलाना सबसे बड़ा गुनाह है, जो इंसान को जहन्नम तक पहुँचाता है।
  2. यह आयत हमें डराती है कि हम अपने ईमान की हिफ़ाज़त करें और किसी भी ऐसे काम से बचें जो कुफ्र या तकज़ीब की तरफ ले जाए।
  3. अल्लाह की रहमत और इंसाफ़ दोनों ज़ाहिर होते हैं—जो सच्चाई पर चले उसके लिए जन्नत, और जो इनकार करे उसके लिए जहन्नम।
  4. यह आयत हमें क़ुरआन और पैग़म्बरों की लाई हुई हिदायत की क़द्र करना सिखाती है, क्योंकि यही वह रास्ता है जो हमें अल्लाह की खुशी और जन्नत तक पहुँचाता है।
  5. मोमिन के लिए यह ख़ुशख़बरी है कि उसका रब्ब उसके अच्छे कर्मों को देखता है और उसे उसका पूरा इनाम देगा, जबकि काफ़िरों का अंजाम बुरा है।


📜 आयत 8-12 — सूरा अल-माइदा

8يَا أَيُّهَا الَّذِينَ آمَنُوا كُونُوا قَوَّامِينَ لِلَّهِ شُهَدَاءَ بِالْقِسْطِ ۖ وَلَا يَجْرِمَنَّكُمْ شَنَآنُ قَوْمٍ عَلَىٰ أَلَّا تَعْدِلُوا ۚ اعْدِلُوا هُوَ أَقْرَبُ لِلتَّقْوَىٰ ۖ وَاتَّقُوا اللَّهَ ۚ إِنَّ اللَّهَ خَبِيرٌ بِمَا تَعْمَلُونَ
ऐ ईमानदारों ख़ुदा (की ख़ुशनूदी) के लिए इन्साफ़ के साथ गवाही देने के लिए तैयार रहो और तुम्हें किसी क़बीले की अदावत इस जुर्म में न फॅसवा दे कि तुम नाइन्साफी करने लगो (ख़बरदार बल्कि) तुम (हर हाल में) इन्साफ़ करो यही परहेज़गारी से बहुत क़रीब है और ख़ुदा से डरो क्योंकि जो कुछ तुम करते हो (अच्छा या बुरा) ख़ुदा उसे ज़रूर जानता है
9وَعَدَ اللَّهُ الَّذِينَ آمَنُوا وَعَمِلُوا الصَّالِحَاتِ ۙ لَهُم مَّغْفِرَةٌ وَأَجْرٌ عَظِيمٌ
और जिन लोगों ने ईमान क़ुबूल किया और अच्छे अच्छे काम किए ख़ुदा ने वायदा किया है कि उनके लिए (आख़िरत में) मग़फेरत और बड़ा सवाब है
10وَالَّذِينَ كَفَرُوا وَكَذَّبُوا بِآيَاتِنَا أُولَٰئِكَ أَصْحَابُ الْجَحِيمِ
और जिन लोगों ने कुफ़्र इख्तेयार किया और हमारी आयतों को झुठलाया वह जहन्नुमी हैं (
11يَا أَيُّهَا الَّذِينَ آمَنُوا اذْكُرُوا نِعْمَتَ اللَّهِ عَلَيْكُمْ إِذْ هَمَّ قَوْمٌ أَن يَبْسُطُوا إِلَيْكُمْ أَيْدِيَهُمْ فَكَفَّ أَيْدِيَهُمْ عَنكُمْ ۖ وَاتَّقُوا اللَّهَ ۚ وَعَلَى اللَّهِ فَلْيَتَوَكَّلِ الْمُؤْمِنُونَ
ऐ ईमानदारों ख़ुदा ने जो एहसानात तुमपर किए हैं उनको याद करो और ख़ूसूसन जब एक क़बीले ने तुम पर दस्त दराज़ी का इरादा किया था तो ख़ुदा ने उनके हाथों को तुम तक पहुंचने से रोक दिया और ख़ुदा से डरते रहो और मोमिनीन को ख़ुदा ही पर भरोसा रखना चाहिए
12۞ وَلَقَدْ أَخَذَ اللَّهُ مِيثَاقَ بَنِي إِسْرَائِيلَ وَبَعَثْنَا مِنْهُمُ اثْنَيْ عَشَرَ نَقِيبًا ۖ وَقَالَ اللَّهُ إِنِّي مَعَكُمْ ۖ لَئِنْ أَقَمْتُمُ الصَّلَاةَ وَآتَيْتُمُ الزَّكَاةَ وَآمَنتُم بِرُسُلِي وَعَزَّرْتُمُوهُمْ وَأَقْرَضْتُمُ اللَّهَ قَرْضًا حَسَنًا لَّأُكَفِّرَنَّ عَنكُمْ سَيِّئَاتِكُمْ وَلَأُدْخِلَنَّكُمْ جَنَّاتٍ تَجْرِي مِن تَحْتِهَا الْأَنْهَارُ ۚ فَمَن كَفَرَ بَعْدَ ذَٰلِكَ مِنكُمْ فَقَدْ ضَلَّ سَوَاءَ السَّبِيلِ
और इसमें भी शक नहीं कि ख़ुदा ने बनी इसराईल से (भी ईमान का) एहद व पैमान ले लिया था और हम (ख़ुदा) ने इनमें के बारह सरदार उनपर मुक़र्रर किए और ख़ुदा ने बनी इसराईल से फ़रमाया था कि मैं तो यक़ीनन तुम्हारे साथ हूं अगर तुम भी पाबन्दी से नमाज़ पढ़ते और ज़कात देते रहो और हमारे पैग़म्बरों पर ईमान लाओ और उनकी मदद करते रहो और ख़ुदा (की ख़ुशनूदी के वास्ते लोगों को) क़र्जे हसना देते रहो तो मैं भी तुम्हारे गुनाह तुमसे ज़रूर दूर करूंगा और तुमको बेहिश्त के उन (हरे भरे ) बाग़ों में जा पहुंचाऊॅगा जिनके (दरख्तों के) नीचे नहरें जारी हैं फिर तुममें से जो शख्स इसके बाद भी इन्कार करे तो यक़ीनन वह राहे रास्त से भटक गया
अल-माइदाकुरान सूची
120आयत
मदनीअवतरण स्थान
10आयत

अनुवाद — अल-माइदा 10

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Thursday, October 1, 2026

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