अल-माइदा · 9/120
अनुवाद उच्चारण — अल-माइदा
وَعَدَ اللَّهُ الَّذِينَ آمَنُوا وَعَمِلُوا الصَّالِحَاتِ ۙ لَهُم مَّغْفِرَةٌ وَأَجْرٌ عَظِيمٌ ۝٩
Wa`adal laahul lazeena aamanoo wa `amilus saalihaati lahum maghfiratunw wa ajrun `azeem
📖 हिंदी अर्थ
और जिन लोगों ने ईमान क़ुबूल किया और अच्छे अच्छे काम किए ख़ुदा ने वायदा किया है कि उनके लिए (आख़िरत में) मग़फेरत और बड़ा सवाब है

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • وَعَدَ اللهُ: अल्लाह ने वादा किया।
  • الَّذِينَ آمَنُوا: जो लोग ईमान लाए (अल्लाह और उसके रसूल पर विश्वास किया)।
  • وَعَمِلُوا الصَّالِحَاتِ: और अच्छे कर्म किए (नेक काम किए)।
  • مَغْفِرَةٌ: क्षमा (गुनाहों की माफी)।
  • أَجْرٌ عَظِيمٌ: बहुत बड़ा प्रतिफल (इनाम)।

तफसीर (व्याख्या):

अल्लाह तआला ने इस आयत में अपने ईमानदार और नेक बंदों को एक ऐसा वादा दिया है जो कभी टूटता नहीं। जो लोग अल्लाह पर ईमान लाए, उसके रसूल (ﷺ) पर विश्वास किया, और अपने ईमान को सिर्फ ज़ुबान तक सीमित नहीं रखा, बल्कि उसे अपने अमल में भी उतारा — यानी अच्छे कर्म किए, नेकियाँ कीं, अल्लाह के हुक्मों पर चले और उसकी मनाही से बचे — तो उनके लिए दो बड़ी खुशखबरी है:

पहली खुशखबरी: मगफिरत (क्षमा) — यानी उनके सारे गुनाह माफ कर दिए जाएँगे। अल्लाह की रहमत इतनी वसीअ है कि वह अपने बंदों की गलतियों को मिटा देता है, बशर्ते वे सच्चे दिल से ईमान लाएँ और नेक अमल करें।

दूसरी खुशखबरी: अज्रुन अज़ीम (बड़ा प्रतिफल) — यानी उन्हें जन्नत मिलेगी, जो हर उस चीज़ से बेहतर है जिसकी कल्पना इंसान कर सकता है। यह प्रतिफल इतना महान है कि न किसी आँख ने देखा, न किसी कान ने सुना, और न किसी दिल ने उसकी कल्पना की।

यह वादा अल्लाह का है, और अल्लाह कभी अपने वादे के खिलाफ नहीं करता। वह सच्चा है, और उसका वादा अटल है। यही वह चीज़ है जो एक मोमिन को जीवन में सबसे बड़ी उम्मीद और सुकून देती है — यह जानना कि उसका रब उससे रिज़ा (प्रसन्न) है और उसके लिए ऐसा इनाम तैयार है जो कभी खत्म नहीं होगा।


दावती पहलू (प्रेरणादायक संदेश):

यह आयत हर उस इंसान के लिए एक रोशनी है जो अपनी गलतियों और कमजोरियों की वजह से निराश हो जाता है। अल्लाह कहता है कि ईमान और नेक अमल की राह पर चलने वालों के लिए माफी और बड़ा इनाम तैयार है। चाहे आपने कितने भी गुनाह किए हों, अल्लाह की रहमत का दरवाजा हमेशा खुला है। बस ज़रूरत है सच्चे दिल से ईमान लाने की और अपने अमल को सुधारने की। यह वादा हमें बताता है कि इस दुनिया की मुश्किलें और इम्तिहान अस्थायी हैं, लेकिन अल्लाह का इनाम हमेशा रहने वाला है। तो आइए, हम सब इस वादे पर भरोसा करें, अपने ईमान को मजबूत करें, और नेक कर्मों में लगे रहें — क्योंकि अल्लाह का वादा सच्चा है, और उसकी रहमत से कोई निराश नहीं होता।



📜 आयत 7-11 — अल-माइदा

7وَاذْكُرُوا نِعْمَةَ اللَّهِ عَلَيْكُمْ وَمِيثَاقَهُ الَّذِي وَاثَقَكُم بِهِ إِذْ قُلْتُمْ سَمِعْنَا وَأَطَعْنَا ۖ وَاتَّقُوا اللَّهَ ۚ إِنَّ اللَّهَ عَلِيمٌ بِذَاتِ الصُّدُورِ
और जो एहसानात ख़ुदा ने तुमपर किए हैं उनको और उस (एहद व पैमान) को याद करो जिसका तुमसे पक्का इक़रार ले चुका है जब तुमने कहा था कि हमने (एहकामे ख़ुदा को) सुना और दिल से मान लिया और ख़ुदा से डरते रहो क्योंकि इसमें ज़रा भी शक नहीं कि ख़ुदा दिलों के राज़ से भी बाख़बर है
8يَا أَيُّهَا الَّذِينَ آمَنُوا كُونُوا قَوَّامِينَ لِلَّهِ شُهَدَاءَ بِالْقِسْطِ ۖ وَلَا يَجْرِمَنَّكُمْ شَنَآنُ قَوْمٍ عَلَىٰ أَلَّا تَعْدِلُوا ۚ اعْدِلُوا هُوَ أَقْرَبُ لِلتَّقْوَىٰ ۖ وَاتَّقُوا اللَّهَ ۚ إِنَّ اللَّهَ خَبِيرٌ بِمَا تَعْمَلُونَ
ऐ ईमानदारों ख़ुदा (की ख़ुशनूदी) के लिए इन्साफ़ के साथ गवाही देने के लिए तैयार रहो और तुम्हें किसी क़बीले की अदावत इस जुर्म में न फॅसवा दे कि तुम नाइन्साफी करने लगो (ख़बरदार बल्कि) तुम (हर हाल में) इन्साफ़ करो यही परहेज़गारी से बहुत क़रीब है और ख़ुदा से डरो क्योंकि जो कुछ तुम करते हो (अच्छा या बुरा) ख़ुदा उसे ज़रूर जानता है
9وَعَدَ اللَّهُ الَّذِينَ آمَنُوا وَعَمِلُوا الصَّالِحَاتِ ۙ لَهُم مَّغْفِرَةٌ وَأَجْرٌ عَظِيمٌ
और जिन लोगों ने ईमान क़ुबूल किया और अच्छे अच्छे काम किए ख़ुदा ने वायदा किया है कि उनके लिए (आख़िरत में) मग़फेरत और बड़ा सवाब है
10وَالَّذِينَ كَفَرُوا وَكَذَّبُوا بِآيَاتِنَا أُولَٰئِكَ أَصْحَابُ الْجَحِيمِ
और जिन लोगों ने कुफ़्र इख्तेयार किया और हमारी आयतों को झुठलाया वह जहन्नुमी हैं (
11يَا أَيُّهَا الَّذِينَ آمَنُوا اذْكُرُوا نِعْمَتَ اللَّهِ عَلَيْكُمْ إِذْ هَمَّ قَوْمٌ أَن يَبْسُطُوا إِلَيْكُمْ أَيْدِيَهُمْ فَكَفَّ أَيْدِيَهُمْ عَنكُمْ ۖ وَاتَّقُوا اللَّهَ ۚ وَعَلَى اللَّهِ فَلْيَتَوَكَّلِ الْمُؤْمِنُونَ
ऐ ईमानदारों ख़ुदा ने जो एहसानात तुमपर किए हैं उनको याद करो और ख़ूसूसन जब एक क़बीले ने तुम पर दस्त दराज़ी का इरादा किया था तो ख़ुदा ने उनके हाथों को तुम तक पहुंचने से रोक दिया और ख़ुदा से डरते रहो और मोमिनीन को ख़ुदा ही पर भरोसा रखना चाहिए
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अनुवाद — अल-माइदा 9

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Tuesday, August 18, 2026

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