अल-माइदा · 112/120
अनुवाद उच्चारण — अल-माइदा
إِذْ قَالَ الْحَوَارِيُّونَ يَا عِيسَى ابْنَ مَرْيَمَ هَلْ يَسْتَطِيعُ رَبُّكَ أَن يُنَزِّلَ عَلَيْنَا مَائِدَةً مِّنَ السَّمَاءِ ۖ قَالَ اتَّقُوا اللَّهَ إِن كُنتُم مُّؤْمِنِينَ ۝١١٢
Iz qaalal hawaariyyoona yaa `Eesab na Maryama hal yastatee`u Rabbuka ai yunaz zila `alinaa maaa`idatam minas samaaa`i qaalat taqul laaha in kuntum mu`mineen
📖 हिंदी अर्थ
(वह वक्त याद करो) जब हवारियों ने ईसा से अर्ज़ की कि ऐ मरियम के बेटे ईसा क्या आप का ख़ुदा उस पर क़ादिर है कि हम पर आसमान से (नेअमत की) एक ख्वान नाज़िल फरमाए ईसा ने कहा अगर तुम सच्चे ईमानदार हो तो ख़ुदा से डरो (ऐसी फरमाइश जिसमें इम्तेहान मालूम हो न करो)

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • الحواريون (हवारियून): हज़रत ईसा अलैहिस्सलाम के विशेष सहायक और अनुयायी, जो उन पर सबसे पहले ईमान लाए थे।
  • माइदा (مَائِدَة): वह थाली या दस्तरख़्वान जिस पर खाना रखा गया हो, यहाँ आसमान से उतरने वाले खाने के दस्तरख़्वान का ज़िक्र है।
  • يَسْتَطِيعُ (यस्ततीउ): सामर्थ्य रखना, कर सकना। यहाँ इसका अर्थ है कि क्या आपका रब इस पर क़ादिर है।

तफ़सीर (व्याख्या):

अल्लाह तआला अपने नबी हज़रत मुहम्मद ﷺ को संबोधित करते हुए उस समय की याद दिलाता है जब हवारियों ने हज़रत ईसा अलैहिस्सलाम से कहा: "ऐ ईसा इब्ने मरियम! क्या आपका रब यह कर सकता है कि हम पर आसमान से खाने का दस्तरख़्वान उतार दे?" यह सवाल उन्होंने इसलिए किया था कि वे अपने दिलों के तसल्ली और अल्लाह की क़ुदरत का प्रत्यक्ष प्रमाण देखना चाहते थे। हज़रत ईसा ने उन्हें नरमी से समझाते हुए कहा: "अल्लाह से डरो और ऐसी माँगों से बचो जिनमें तुम्हारे लिए फ़ितना (परीक्षा) का ख़तरा हो। अगर तुम सच्चे ईमानवाले हो तो अल्लाह की क़ुदरत पर भरोसा रखो और उसी से रिज़्क़ की उम्मीद रखो, क्योंकि वह हर चीज़ पर क़ादिर है।" यह जवाब उन्हें उनके सवाल की बेजा होने की तरफ़ इशारा करता है, क्योंकि ईमान का तक़ाज़ा यह है कि इंसान अल्लाह की क़ुदरत पर पूरा यक़ीन रखे और बेवजह निशानियों की माँग न करे।

फ़ायदे (लाभ और सीख):

  1. अल्लाह की क़ुदरत पर पूरा भरोसा रखना चाहिए, बिना किसी प्रत्यक्ष चमत्कार की माँग किए, क्योंकि सच्चा ईमान ग़ैब पर ईमान लाने का नाम है।
  2. नबियों का अदब यह है कि उनसे ऐसे सवाल न किए जाएँ जिनमें शक या बेअदबी का पहलू हो, बल्कि उनकी बात को बिना किसी शर्त के क़बूल किया जाए।
  3. मुसलमान को चाहिए कि वह अपनी ज़रूरतों के लिए अल्लाह से दुआ करे, लेकिन दुआ में भी अदब और अच्छे अल्फ़ाज़ का ख़याल रखे, और ऐसी चीज़ों की माँग न करे जो फ़ितने का सबब बन सकती हैं।
  4. यह आयत हज़रत ईसा अलैहिस्सलाम की उम्मत के लिए एक नसीहत है कि दीन में ग़ुलू (अतिशयोक्ति) न करें और अल्लाह की रहमत पर भरोसा रखते हुए सीधे रास्ते पर चलें।


📜 आयत 110-114 — अल-माइदा

110إِذْ قَالَ اللَّهُ يَا عِيسَى ابْنَ مَرْيَمَ اذْكُرْ نِعْمَتِي عَلَيْكَ وَعَلَىٰ وَالِدَتِكَ إِذْ أَيَّدتُّكَ بِرُوحِ الْقُدُسِ تُكَلِّمُ النَّاسَ فِي الْمَهْدِ وَكَهْلًا ۖ وَإِذْ عَلَّمْتُكَ الْكِتَابَ وَالْحِكْمَةَ وَالتَّوْرَاةَ وَالْإِنجِيلَ ۖ وَإِذْ تَخْلُقُ مِنَ الطِّينِ كَهَيْئَةِ الطَّيْرِ بِإِذْنِي فَتَنفُخُ فِيهَا فَتَكُونُ طَيْرًا بِإِذْنِي ۖ وَتُبْرِئُ الْأَكْمَهَ وَالْأَبْرَصَ بِإِذْنِي ۖ وَإِذْ تُخْرِجُ الْمَوْتَىٰ بِإِذْنِي ۖ وَإِذْ كَفَفْتُ بَنِي إِسْرَائِيلَ عَنكَ إِذْ جِئْتَهُم بِالْبَيِّنَاتِ فَقَالَ الَّذِينَ كَفَرُوا مِنْهُمْ إِنْ هَٰذَا إِلَّا سِحْرٌ مُّبِينٌ
(वह वक्त याद करो) जब ख़ुदा फरमाएगा कि ये मरियम के बेटे ईसा हमने जो एहसानात तुम पर और तुम्हारी माँ पर किये उन्हे याद करो जब हमने रूहुलक़ुदूस (जिबरील) से तुम्हारी ताईद की कि तुम झूले में (पड़े पड़े) और अधेड़ होकर (शक़ सा बातें) करने लगे और जब हमने तुम्हें लिखना और अक़ल व दानाई की बातें और (तौरेत व इन्जील (ये सब चीजे) सिखायी और जब तुम मेरे हुक्म से मिट्टी से चिड़िया की मूरत बनाते फिर उस पर कुछ दम कर देते तो वह मेरे हुक्म से (सचमुच) चिड़िया बन जाती थी और मेरे हुक्म से मादरज़ाद (पैदायशी) अंधे और कोढ़ी को अच्छा कर देते थे और जब तुम मेरे हुक्म से मुर्दों को ज़िन्दा (करके क़ब्रों से) निकाल खड़ा करते थे और जिस वक्त तुम बनी इसराईल के पास मौजिज़े लेकर आए और उस वक्त मैने उनको तुम (पर दस्त दराज़ी करने) से रोका तो उनमें से बाज़ कुफ्फ़ार कहने लगे ये तो बस खुला हुआ जादू है
111وَإِذْ أَوْحَيْتُ إِلَى الْحَوَارِيِّينَ أَنْ آمِنُوا بِي وَبِرَسُولِي قَالُوا آمَنَّا وَاشْهَدْ بِأَنَّنَا مُسْلِمُونَ
और जब मैने हवारियों से इलहाम किया कि मुझ पर और मेरे रसूल पर ईमान लाओ तो अर्ज़ करने लगे हम ईमान लाए और तू गवाह रहना कि हम तेरे फरमाबरदार बन्दे हैं
112إِذْ قَالَ الْحَوَارِيُّونَ يَا عِيسَى ابْنَ مَرْيَمَ هَلْ يَسْتَطِيعُ رَبُّكَ أَن يُنَزِّلَ عَلَيْنَا مَائِدَةً مِّنَ السَّمَاءِ ۖ قَالَ اتَّقُوا اللَّهَ إِن كُنتُم مُّؤْمِنِينَ
(वह वक्त याद करो) जब हवारियों ने ईसा से अर्ज़ की कि ऐ मरियम के बेटे ईसा क्या आप का ख़ुदा उस पर क़ादिर है कि हम पर आसमान से (नेअमत की) एक ख्वान नाज़िल फरमाए ईसा ने कहा अगर तुम सच्चे ईमानदार हो तो ख़ुदा से डरो (ऐसी फरमाइश जिसमें इम्तेहान मालूम हो न करो)
113قَالُوا نُرِيدُ أَن نَّأْكُلَ مِنْهَا وَتَطْمَئِنَّ قُلُوبُنَا وَنَعْلَمَ أَن قَدْ صَدَقْتَنَا وَنَكُونَ عَلَيْهَا مِنَ الشَّاهِدِينَ
वह अर्ज़ करने लगे हम तो फक़त ये चाहते है कि इसमें से (बरतकन) कुछ खाएँ और हमारे दिल को (आपकी रिसालत का पूरा पूरा) इत्मेनान हो जाए और यक़ीन कर लें कि आपने हमसे (जो कुछ कहा था) सच फरमाया था और हम लोग इस पर गवाह रहें
114قَالَ عِيسَى ابْنُ مَرْيَمَ اللَّهُمَّ رَبَّنَا أَنزِلْ عَلَيْنَا مَائِدَةً مِّنَ السَّمَاءِ تَكُونُ لَنَا عِيدًا لِّأَوَّلِنَا وَآخِرِنَا وَآيَةً مِّنكَ ۖ وَارْزُقْنَا وَأَنتَ خَيْرُ الرَّازِقِينَ
(तब) मरियम के बेटे ईसा ने (बारगाहे ख़ुदा में) अर्ज़ की ख़ुदा वन्दा ऐ हमारे पालने वाले हम पर आसमान से एक ख्वान (नेअमत) नाज़िल फरमा कि वह दिन हम लोगों के लिए हमारे अगलों के लिए और हमारे पिछलों के लिए ईद का करार पाए (और हमारे हक़ में) तेरी तरफ से एक बड़ी निशानी हो और तू हमें रोज़ी दे और तू सब रोज़ी देने वालो से बेहतर है
अल-माइदाकुरान सूची
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112आयत

अनुवाद — अल-माइदा 112

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Tuesday, August 18, 2026

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