अल-माइदा · 24/120
अनुवाद उच्चारण — अल-माइदा
قَالُوا يَا مُوسَىٰ إِنَّا لَن نَّدْخُلَهَا أَبَدًا مَّا دَامُوا فِيهَا ۖ فَاذْهَبْ أَنتَ وَرَبُّكَ فَقَاتِلَا إِنَّا هَاهُنَا قَاعِدُونَ ۝٢٤
Qaaloo yaa Moosaaa innaa lan nadkhulahaa abadam maa daamoo feehaa fazhab anta wa Rabbuka faqaatilaaa innaa haahunaa qaa`idoon
📖 हिंदी अर्थ
वह कहने लगे एक मूसा (चाहे जो कुछ हो) जब तक वह लोग इसमें हैं हम तो उसमें हरगिज़ (लाख बरस) पॉव न रखेंगे हॉ तुम जाओ और तुम्हारा ख़ुदा जाए ओर दोनों (जाकर) लड़ो हम तो यहीं जमे बैठे हैं
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • لَن نَّدْخُلَهَا: हम कभी भी उसमें प्रवेश नहीं करेंगे (शहर में)।
  • مَّا دَامُوا فِيهَا: जब तक वे (जबरूर/बलशाली) उसमें मौजूद हैं।
  • فَاذْهَبْ أَنتَ وَرَبُّكَ: तो जाओ तुम और तुम्हारा रब।
  • فَقَاتِلَا: तो तुम दोनों (मूसा और अल्लाह) उनसे युद्ध करो।
  • إِنَّا هَاهُنَا قَاعِدُونَ: हम तो यहीं बैठे रहेंगे (जंग नहीं लड़ेंगे)।

तफसीर (व्याख्या):

जब हज़रत मूसा (अलैहिस्सलाम) ने अपनी कौम (बनी इसराइल) को अल्लाह के हुक्म से उस पवित्र भूमि (बैतुल-मुक़द्दस) में जिहाद और दाख़िल होने का आदेश दिया, तो उनके लोगों ने अत्यंत घमंड, कायरता और नाफ़रमानी के साथ जवाब दिया। उन्होंने कहा: "ऐ मूसा! हम उस शहर में हरगिज़ दाख़िल नहीं होंगे जब तक कि वे ज़ालिम और ताक़तवर लोग (जाबिरून) उसमें मौजूद हैं।" यह कहकर उन्होंने अल्लाह के हुक्म को नकार दिया और अपने नबी की बात मानने से इनकार कर दिया।

फिर उन्होंने बड़ी ही बेअदबी और जिगर के साथ कहा: "तो जाओ तुम और तुम्हारा रब, तुम दोनों मिलकर उनसे जंग करो। हम तो यहीं बैठे रहेंगे।" यह कहना उनकी निहायत जहालत और अल्लाह के नबी के साथ बेहद बदसुलूकी थी। उन्होंने अल्लाह को उसके नबी के साथ जोड़कर ऐसा अल्फाज़ इस्तेमाल किया जो उनके ईमान की कमज़ोरी और अल्लाह की क़ुदरत को समझने में नाकामी को दर्शाता है। वे यह भूल गए कि अल्लाह जब चाहता है, अपने बंदों की मदद करता है और उसके हुक्म के आगे कोई ताक़त नहीं टिक सकती।

यह वाक़िया हमें सिखाता है कि मोमिन को कभी भी अल्लाह के वादे पर भरोसा नहीं खोना चाहिए और न ही उसके हुक्म से पीछे हटना चाहिए। जब अल्लाह किसी काम का हुक्म देता है, तो उसमें भलाई होती है, चाहे ज़ाहिरी तौर पर मुश्किलें ही क्यों न दिखें। कायरता और अल्लाह के हुक्म से मुँह मोड़ना इंसान को रुसवाई और अज़ाब में डाल देता है। इसके बाद अल्लाह ने बनी इसराइल को चालीस साल तक बयाबान में भटकने की सज़ा दी, क्योंकि उन्होंने जिहाद से इनकार किया था।

आज हमें इससे सबक लेना चाहिए कि अल्लाह पर भरोसा रखें, उसके दीन की मदद करें, और जब वह हमें किसी नेक काम का हुक्म दे, तो बिना झिझक उस पर अमल करें। अल्लाह उन्हीं की मदद करता है जो उसके दीन की मदद करते हैं।

🎧 सुनें

📜 आयत 22-26 — अल-माइदा

22قَالُوا يَا مُوسَىٰ إِنَّ فِيهَا قَوْمًا جَبَّارِينَ وَإِنَّا لَن نَّدْخُلَهَا حَتَّىٰ يَخْرُجُوا مِنْهَا فَإِن يَخْرُجُوا مِنْهَا فَإِنَّا دَاخِلُونَ
वह लोग कहने लगे कि ऐ मूसा इस मुल्क में तो बड़े ज़बरदस्त (सरकश) लोग रहते हैं और जब तक वह लोग इसमें से निकल न जाएं हम तो उसमें कभी पॉव भी न रखेंगे हॉ अगर वह लोग ख़ुद इसमें से निकल जाएं तो अलबत्ता हम ज़रूर जाएंगे
23قَالَ رَجُلَانِ مِنَ الَّذِينَ يَخَافُونَ أَنْعَمَ اللَّهُ عَلَيْهِمَا ادْخُلُوا عَلَيْهِمُ الْبَابَ فَإِذَا دَخَلْتُمُوهُ فَإِنَّكُمْ غَالِبُونَ ۚ وَعَلَى اللَّهِ فَتَوَكَّلُوا إِن كُنتُم مُّؤْمِنِينَ
(मगर) वह आदमी (यूशा कालिब) जो ख़ुदा का ख़ौफ़ रखते थे और जिनपर ख़ुदा ने ख़ास अपना फ़ज़ल (करम) किया था बेधड़क बोल उठे कि (अरे) उनपर हमला करके (बैतुल मुक़दस के फाटक में तो घुस पड़ो फिर देखो तो यह ऐसे बोदे हैं कि) इधर तुम फाटक में घुसे और (ये सब भाग खड़े हुए और) तुम्हारी जीत हो गयी और अगर सच्चे ईमानदार हो तो ख़ुदा ही पर भरोसा रखो
24قَالُوا يَا مُوسَىٰ إِنَّا لَن نَّدْخُلَهَا أَبَدًا مَّا دَامُوا فِيهَا ۖ فَاذْهَبْ أَنتَ وَرَبُّكَ فَقَاتِلَا إِنَّا هَاهُنَا قَاعِدُونَ
वह कहने लगे एक मूसा (चाहे जो कुछ हो) जब तक वह लोग इसमें हैं हम तो उसमें हरगिज़ (लाख बरस) पॉव न रखेंगे हॉ तुम जाओ और तुम्हारा ख़ुदा जाए ओर दोनों (जाकर) लड़ो हम तो यहीं जमे बैठे हैं
25قَالَ رَبِّ إِنِّي لَا أَمْلِكُ إِلَّا نَفْسِي وَأَخِي ۖ فَافْرُقْ بَيْنَنَا وَبَيْنَ الْقَوْمِ الْفَاسِقِينَ
तब मूसा ने अर्ज़ की ख़ुदावन्दा तू ख़ूब वाक़िफ़ है कि अपनी ज़ाते ख़ास और अपने भाई के सिवा किसी पर मेरा क़ाबू नहीं बस अब हमारे और उन नाफ़रमान लोगों के दरमियान जुदाई डाल दे
26قَالَ فَإِنَّهَا مُحَرَّمَةٌ عَلَيْهِمْ ۛ أَرْبَعِينَ سَنَةً ۛ يَتِيهُونَ فِي الْأَرْضِ ۚ فَلَا تَأْسَ عَلَى الْقَوْمِ الْفَاسِقِينَ
हमारा उनका साथ नहीं हो सकता (ख़ुदा ने फ़रमाया) (अच्छा) तो उनकी सज़ा यह है कि उनको चालीस बरस तक की हुकूमत नसीब न होगा (और उस मुद्दते दराज़ तक) यह लोग (मिस्र के) जंगल में सरगरदॉ रहेंगे तो फिर तुम इन बदचलन बन्दों पर अफ़सोस न करना
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अनुवाद — अल-माइदा 24

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Tuesday, August 18, 2026

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