अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- لَا أَمْلِكُ — मेरा कोई अधिकार नहीं, मेरे वश में नहीं।
- فَافْرُقْ — तो फ़ैसला कर दे, हमारे और उनके बीच अलगाव कर दे।
- الْفَاسِقِينَ — आज्ञा न मानने वाले, सीमा से बाहर निकल जाने वाले।
तफ़सीर:
जब हज़रत मूसा (अलैहिस्सलाम) ने देखा कि बनी इसराईल की क़ौम हठधर्मी और सरकशी पर उतर आई है, और वे अल्लाह के हुक्म को मानने से इनकार कर रहे हैं, तो वे अपने रब की तरफ रुजू करते हुए दुआ में कहने लगे: "ऐ मेरे रब! मेरा अधिकार केवल अपनी जान और अपने भाई हारून पर है। मैं इन सरकश लोगों को मजबूर नहीं कर सकता, न ही मेरे पास उन्हें बदलने की ताकत है। तो तू ही हमारे और इन आज्ञा न मानने वालों के बीच फ़ैसला कर दे, और हमें इनके शर से अलग कर दे।"
यह दुआ हज़रत मूसा (अलैहिस्सलाम) की मजबूरी और अल्लाह पर पूर्ण भरोसे का इज़हार है। वे यह बताना चाहते थे कि हिदायत देना मेरा काम है, लेकिन दिलों को बदलना सिर्फ अल्लाह के हाथ में है। जब कोई क़ौम ज़िद और सरकशी पर अड़ जाए, तो नबी का फर्ज़ सिर्फ पैग़ाम पहुंचाना है, और फैसला अल्लाह ही करता है।
इस आयत में हमारे लिए बड़ा सबक है — जब हमारे सामने कोई मुश्किल आए, या हम किसी की हिदायत से मायूस हो जाएं, तो हमें अल्लाह की तरफ रुजू करना चाहिए, उसी से मदद मांगनी चाहिए। अल्लाह के नबी भी जब मुश्किल में पड़े तो उन्होंने अल्लाह ही का सहारा लिया, तो हमें भी चाहिए कि हर हाल में अल्लाह पर भरोसा रखें और उसी से दुआ करें। यही ईमान की निशानी है कि इंसान अपनी कमजोरी का इज़हार करे और अल्लाह की कुदरत पर यकीन रखे। अल्लाह तआला अपने नबी की यह दुआ कबूल करते हुए आगे की आयत में फ़ैसला सुनाते हैं, जो हमें बताता है कि अल्लाह अपने नेक बंदों को कभी अकेला नहीं छोड़ता।
📜 आयत 23-27 — अल-माइदा
अनुवाद — अल-माइदा 25
सूरा अल-माइदा आयत 25 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : तब मूसा ने अर्ज़ की ख़ुदावन्दा तू ख़ूब वाक़िफ़ है…सूरा आयत 25/120 — अल-माइदा المائدة (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-माइदा सुनें, अल-माइदा अनुवाद, अल-माइदा mp3, अल-माइदा pdf. आयत 23–27. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए








