अनुवाद — Tafsir
कठिन शब्दों के अर्थ:
- مُهَيْمِنًا: रक्षक, निगरानी करने वाला, सत्यापित करने वाला।
- شِرْعَةً: शरीयत, धार्मिक कानून, जीवन का तरीका।
- مِنْهَاجًا: स्पष्ट मार्ग, व्यवस्था, रास्ता।
- لِيَبْلُوَكُمْ: ताकि वह तुम्हारी परीक्षा ले।
- فَاسْتَبِقُوا: जल्दी करो, प्रतिस्पर्धा करो।
तफसीर (व्याख्या):
ऐ प्यारे नबी (ﷺ)! हमने आप पर यह कुरआन सत्य के साथ उतारा है। यह वह किताब है जो अपने से पहले आई हुई सभी आसमानी किताबों (तौरात, इंजील, ज़बूर) की सच्चाई की गवाही देती है। जो कुछ उन किताबों में सही और सच्चा है, वह इसकी पुष्टि करती है, और जो कुछ उनमें बदलाव और मिलावट हो गई थी, उसे स्पष्ट करती है। यह कुरआन उन सभी किताबों पर निगरानी रखने वाला, उनकी रक्षा करने वाला और उनका फैसला करने वाला है।
अतः ऐ नबी! जब अहले-किताब (यहूदी और ईसाई) अपने झगड़ों को लेकर आपके पास आएँ, तो आप उनके बीच उसी कानून के अनुसार फैसला करें जो अल्लाह ने आप पर उतारा है—यानी कुरआन और सुन्नत के अनुसार। और सावधान रहें! उनकी इच्छाओं और मनमानी के पीछे न चलें, क्योंकि आपके पास स्पष्ट सत्य आ चुका है। उनकी बातों, उनके दबाव या उनके रीति-रिवाजों के कारण सत्य को न छोड़ें।
अल्लाह ने हर उम्मत के लिए एक शरीयत (कानून) और एक स्पष्ट मार्ग निर्धारित किया है। पहले के नबियों के लिए अलग कानून थे, और आपके लिए एक अलग और पूर्ण कानून है। यह अंतर उनकी बुद्धिमत्ता और योजना का हिस्सा है। अगर अल्लाह चाहता, तो वह सभी लोगों को एक ही उम्मत और एक ही कानून पर इकट्ठा कर देता। लेकिन उसने ऐसा इसलिए नहीं किया ताकि वह तुम्हारी परीक्षा ले—कि कौन सच्चे दिल से उसकी आज्ञा का पालन करता है और कौन अपनी इच्छाओं का।
इसलिए, ऐ मुसलमानों! तुम अपने जीवन में अच्छाई और नेकी के कामों में एक-दूसरे से आगे बढ़ने की कोशिश करो। नेकियों में प्रतिस्पर्धा करो, क्योंकि यही सच्ची सफलता का रास्ता है। याद रखो, तुम सबको एक दिन अल्लाह की ओर लौटना है। वही तुम्हारा अंतिम फैसला करने वाला है। जिस दिन तुम उसके सामने खड़े होंगे, वह तुम्हें बता देगा कि जिन चीज़ों में तुम मतभेद करते थे, उनका सही फैसला क्या था। वह हर एक को उसके कर्मों के अनुसार बदला देगा—नेकी का नेक बदला और बुराई का उचित दंड।
यह आयत हमें सिखाती है कि कुरआन ही हमारा मार्गदर्शक है, और हमें हर मामले में उसी को अपनाना चाहिए। यह हमें यह भी सिखाती है कि हमें अच्छाई के कामों में आगे रहना चाहिए, क्योंकि यही हमारी सच्ची पहचान है। अल्लाह ने हमें जो कुरआन दिया है, वह सबसे पूर्ण और अंतिम मार्गदर्शन है, और उस पर चलना ही हमारी सफलता है।
📜 आयत 46-50 — अल-माइदा
अनुवाद — अल-माइदा 48
सूरा अल-माइदा आयत 48 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और (ऐ रसूल) हमने तुम पर भी बरहक़ किताब नाज़िल…सूरा आयत 48/120 — अल-माइदा المائدة (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-माइदा सुनें, अल-माइदा अनुवाद, अल-माइदा mp3, अल-माइदा pdf. आयत 46–50. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Wednesday, August 19, 2026
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