Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- أَفَحُكْمَ الْجَاهِلِيَّةِ يَبْغُونَ: क्या वे जाहिलियत (अज्ञानता) का फैसला चाहते हैं? अर्थात, क्या वे इस्लाम से पहले के अरबों के रीति-रिवाजों और अंधविश्वासों पर आधारित निर्णय की इच्छा रखते हैं?
- يَبْغُونَ: वे चाहते हैं, तलाश करते हैं।
- يُوقِنُونَ: वे जो विश्वास रखते हैं, पक्का यकीन रखने वाले।
तफसीर (व्याख्या):
यह आयत उन लोगों की स्थिति को उजागर करती है जो अल्लाह के फैसले को छोड़कर दूसरे फैसलों की ओर मुड़ते हैं। अल्लाह तआला पूछते हैं: क्या ये लोग जाहिलियत (अज्ञानता) का फैसला चाहते हैं? यानी, क्या वे उस ज़माने के रीति-रिवाजों, अंधविश्वासों और मनमानी पर आधारित निर्णयों को पसंद करते हैं, जब लोग अपनी इच्छाओं और अहंकार के अनुसार फैसले करते थे, बिना किसी ईश्वरीय मार्गदर्शन के? यह प्रश्न उन लोगों के लिए है जो अल्लाह के नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के फैसले से इनकार करते हैं और दूसरे नियमों-कानूनों की तरफ भागते हैं।
फिर अल्लाह तआला फरमाते हैं: "और अल्लाह से बेहतर फैसला करने वाला कौन है, उन लोगों के लिए जो यकीन रखते हैं?" यानी, जो लोग सच्चे दिल से अल्लाह पर ईमान रखते हैं और उसकी रहमत, हिकमत और इंसाफ पर पक्का विश्वास रखते हैं, वे अच्छी तरह जानते हैं कि अल्लाह का फैसला सबसे अच्छा, सबसे न्यायपूर्ण और सबसे सही है। अल्लाह का फैसला इंसानी फैसलों से कहीं बेहतर है, क्योंकि वह सर्वज्ञ है, सब कुछ जानता है, और उसका फैसला पूर्ण न्याय और हिकमत पर आधारित होता है। जो लोग यकीन रखते हैं, वे अल्लाह के फैसले को खुशी से स्वीकार करते हैं, क्योंकि वे जानते हैं कि इसमें उनकी भलाई है।
फायदे (शिक्षाएँ):
- अल्लाह का फैसला ही सबसे अच्छा और सबसे न्यायपूर्ण है। इंसानी कानून और नियम चाहे कितने भी अच्छे क्यों न हों, अल्लाह के कानून के सामने वे अधूरे हैं, क्योंकि अल्लाह हर चीज़ का जानने वाला है।
- जाहिलियत का फैसला यानी अज्ञानता, अंधविश्वास और मनमानी पर आधारित निर्णय, मुसलमानों के लिए कभी स्वीकार्य नहीं होना चाहिए। हमें हर मामले में अल्लाह और उसके रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) की शिक्षाओं को प्राथमिकता देनी चाहिए।
- यह आयत हमें सिखाती है कि सच्चा ईमान और यकीन इंसान को अल्लाह के फैसले पर पूरा भरोसा देता है। जब हमें अल्लाह पर पक्का यकीन होता है, तो हम उसके फैसले को खुशी से स्वीकार करते हैं, चाहे वह हमारी इच्छाओं के खिलाफ ही क्यों न हो।
- यह आयत मुसलमानों को इस्लामी कानून (शरीयत) पर गर्व करने की शिक्षा देती है, क्योंकि यह अल्लाह की ओर से है, और अल्लाह से बेहतर फैसला करने वाला कोई नहीं है।
📜 आयत 48-52 — सूरा अल-माइदा
अनुवाद — अल-माइदा 50
सूरा अल-माइदा आयत 50 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : क्या ये लोग (ज़मानाए) जाहिलीयत के हुक्म की (तुमसे भी)…सूरा आयत 50/120 — सूरा अल-माइदा المائدة (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अल-माइदा सुनें, सूरा अल-माइदा अनुवाद, सूरा अल-माइदा mp3, सूरा अल-माइदा pdf. आयत 48–52. हिंदी अर्थ: اردو.
सूरा अल-माइदा
पवित्र क़ुरआन
Wednesday, September 30, 2026
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