काफ · 12/45
अनुवाद उच्चारण — सूरा काफ
كَذَّبَتْ قَبْلَهُمْ قَوْمُ نُوحٍ وَأَصْحَابُ الرَّسِّ وَثَمُودُ ۝١٢
Kazzabat qablahum qawmu Noohinw wa Ashaabur Rassi wa Samood
📖 हिंदी अर्थ
इसी तरह (क़यामत में मुर्दों को) निकलना होगा उनसे पहले नूह की क़ौम और ख़न्दक़ वालों और (क़ौम) समूद ने अपने अपने पैग़म्बरों को झुठलाया

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • قَوْمُ نُوحٍ (क़ौमे नूह): हज़रत नूह अलैहिस्सलाम की क़ौम।
  • أَصْحَابُ الرَّسِّ (अस्हाबुर्रस): "रस" का अर्थ है गहरा कुआँ या बावली। ये एक ऐसी क़ौम थी जो अपने कुएँ के पास रहती थी, और उसी कुएँ को "रस" कहा जाता था।
  • ثَمُود (समूद): हज़रत सालेह अलैहिस्सलाम की क़ौम, जो पत्थरों को काटकर घर बनाती थी।

तफ़सीर (व्याख्या):

इस आयत में अल्लाह तआला अपने नबी हज़रत मुहम्मद ﷺ को दिलासा दे रहे हैं और मक्का के काफ़िरों को चेतावनी दे रहे हैं कि ये अकेले नहीं हैं जिन्होंने आपको झुठलाया है। इनसे पहले भी कई क़ौमें आईं जिन्होंने अपने-अपने नबियों को झुठलाया, और उनका अंजाम बहुत बुरा हुआ।

इनमें सबसे पहले हज़रत नूह अलैहिस्सलाम की क़ौम का ज़िक्र है, जिन्होंने 950 साल तक अपनी क़ौम को तौहीद की दावत दी, लेकिन उनकी क़ौम ने उन्हें झुठलाया और अल्लाह के अज़ाब में डूब गई। फिर "अस्हाबुर्रस" का ज़िक्र है — ये वो लोग थे जो अपने कुएँ के किनारे रहते थे, उनके पास पानी और खेती की नेअमतें थीं, लेकिन उन्होंने शुक्र नहीं किया और अपने नबी को झुठला दिया, तो अल्लाह ने उन्हें हलाक कर दिया। फिर क़ौमे समूद का ज़िक्र है — ये लोग पहाड़ों को काटकर मकान बनाने में माहिर थे, बहुत ताक़तवर और खुशहाल थे, लेकिन उन्होंने हज़रत सालेह अलैहिस्सलाम को झुठलाया और उनकी निशानी (ऊँटनी) को काट डाला, तो अल्लाह की पकड़ ने उन्हें आ लिया और वो चीख़ के अज़ाब से हलाक हो गए।

ये सारी क़ौमें अपनी ताक़त, अपनी तादाद और अपने साधनों के बावजूद अल्लाह के अज़ाब को नहीं रोक सकीं। ये सबक़ है कि अल्लाह की ताक़त के आगे किसी की ताक़त नहीं चलती। जो लोग सच्चे नबियों को झुठलाते हैं, वे अल्लाह की पकड़ से नहीं बच सकते।


दावती पहलू:

इस आयत से हमें यह सीख मिलती है कि अल्लाह का दीन सच्चा है और उसके रसूल सच्चे हैं। हर ज़माने में कुछ लोगों ने सच्चाई को झुठलाया, लेकिन अल्लाह ने हमेशा अपने नबियों की मदद की और झुठलाने वालों को हलाक किया। ये हमारे लिए इम्तिहान है कि हम सच्चाई पर क़ायम रहें और नबी ﷺ की लाई हुई राह को पकड़े रहें। जो लोग सच्चाई को क़बूल कर लेते हैं, उनके लिए जन्नत की ख़ुशख़बरी है, और जो झुठलाते हैं, उनके लिए अज़ाब की चेतावनी। अल्लाह रहम करने वाला है, लेकिन उसकी पकड़ भी बहुत सख्त है। हमें चाहिए कि हम अपने नबी ﷺ की सुन्नत पर चलें और अल्लाह की इबादत में मशगूल रहें, ताकि हम उन क़ौमों के अंजाम से बचे रहें।



📜 आयत 10-14 — सूरा काफ

10وَالنَّخْلَ بَاسِقَاتٍ لَّهَا طَلْعٌ نَّضِيدٌ
जिसका बौर बाहम गुथा हुआ है
11رِّزْقًا لِّلْعِبَادِ ۖ وَأَحْيَيْنَا بِهِ بَلْدَةً مَّيْتًا ۚ كَذَٰلِكَ الْخُرُوجُ
(ये सब कुछ) बन्दों की रोज़ी देने के लिए (पैदा किया) और पानी ही से हमने मुर्दा शहर (उफ़तादा ज़मीन) को ज़िन्दा किया
12كَذَّبَتْ قَبْلَهُمْ قَوْمُ نُوحٍ وَأَصْحَابُ الرَّسِّ وَثَمُودُ
इसी तरह (क़यामत में मुर्दों को) निकलना होगा उनसे पहले नूह की क़ौम और ख़न्दक़ वालों और (क़ौम) समूद ने अपने अपने पैग़म्बरों को झुठलाया
13وَعَادٌ وَفِرْعَوْنُ وَإِخْوَانُ لُوطٍ
और (क़ौम) आद और फिरऔन और लूत की क़ौम
14وَأَصْحَابُ الْأَيْكَةِ وَقَوْمُ تُبَّعٍ ۚ كُلٌّ كَذَّبَ الرُّسُلَ فَحَقَّ وَعِيدِ
और बन के रहने वालों (क़ौम शुऐब) और तुब्बा की क़ौम और (उन) सबने अपने (अपने) पैग़म्बरों को झुठलाया तो हमारा (अज़ाब का) वायदा पूरा हो कर रहा
काफकुरान सूची
45आयत
मक्कीअवतरण स्थान
12आयत

अनुवाद — काफ 12

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Friday, October 2, 2026

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