काफ · 34/45
अनुवाद उच्चारण — काफ
ادْخُلُوهَا بِسَلَامٍ ۖ ذَٰلِكَ يَوْمُ الْخُلُودِ ۝٣٤
Udkhuloohaa bisalaamin zaalika yawmul khulood
📖 हिंदी अर्थ
(उसको हुक्म होगा कि) इसमें सही सलामत दाख़िल हो जाओ यहीं तो हमेशा रहने का दिन है
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • بِسَلَامٍ: सुरक्षा और शांति के साथ, हर उस चीज़ से सुरक्षित जो कष्ट या भय का कारण बने।
  • يَوْمُ الْخُلُودِ: हमेशा रहने का दिन, ऐसा दिन जिसके बाद कभी मृत्यु या समाप्ति नहीं।

तफ़सीर (व्याख्या):

जब मोमिन (ईमानवाले) बंदे जन्नत के दरवाज़े पर पहुँचेंगे, तो उनका स्वागत इस शानदार और मुबारक कलाम से किया जाएगा: "दाखिल हो जाओ इस जन्नत में सलामती और अम्न के साथ!" यानी उन्हें ऐसे दाखिल किया जाएगा जहाँ हर तरह का डर, ग़म, दर्द और हर बुराई ख़त्म हो चुकी होगी। वहाँ न कोई थकान होगी, न कोई चिंता, न कोई बीमारी, न कोई मौत। यह वह दिन है जिसमें हमेशा हमेशा के लिए रहना है—ऐसी ज़िंदगी जो कभी ख़त्म नहीं होगी, ऐसी नेमतें जो कभी ज़वाल नहीं पाएँगी।

यह वही दिन है जिसका वादा अल्लाह ने अपने नेक बंदों से किया था। यह सिर्फ़ एक दिन नहीं, बल्कि अनंत काल की शुरुआत है—एक ऐसी हयात जिसमें हर लम्हा खुशी और राहत से भरा होगा। जो लोग दुनिया में अल्लाह की इबादत करते रहे, उसकी राह में मुश्किलें सहते रहे, वे इस दिन उस इनाम को पाएँगे जिसकी कोई मिसाल नहीं।

यहाँ से हमें सबक लेना चाहिए कि दुनिया की यह ज़िंदगी चंद रोज़ की है, लेकिन आख़िरत की ज़िंदगी हमेशा की है। अगर हम आज अल्लाह की बताई राह पर चलें, उसके हुक्मों को मानें और उसकी नाराज़गी से बचें, तो यही आज के छोटे-छोटे कदम हमें उस दिन की ओर ले जाएँगे जब हमें कहा जाएगा: "दाखिल हो जाओ सलामती के साथ!" यह वह दिन है जिसकी खुशी और सुकून का अंदाज़ा दुनिया की किसी भी चीज़ से नहीं लगाया जा सकता। अल्लाह से दुआ है कि वह हम सबको उस दिन इस नेमत का हक़ीक़ी मुस्तहिक़ बनाए। आमीन।

🎧 सुनें

📜 आयत 32-36 — काफ

32هَٰذَا مَا تُوعَدُونَ لِكُلِّ أَوَّابٍ حَفِيظٍ
यही तो वह बेहिश्त है जिसका तुममें से हर एक (ख़ुदा की तरफ़) रूजू करने वाले (हुदूद की) हिफाज़त करने वाले से वायदा किया जाता है
33مَّنْ خَشِيَ الرَّحْمَٰنَ بِالْغَيْبِ وَجَاءَ بِقَلْبٍ مُّنِيبٍ
तो जो शख़्श ख़ुदा से बे देखे डरता रहा और ख़ुदा की तरफ़ रूजू करने वाला दिल लेकर आया
34ادْخُلُوهَا بِسَلَامٍ ۖ ذَٰلِكَ يَوْمُ الْخُلُودِ
(उसको हुक्म होगा कि) इसमें सही सलामत दाख़िल हो जाओ यहीं तो हमेशा रहने का दिन है
35لَهُم مَّا يَشَاءُونَ فِيهَا وَلَدَيْنَا مَزِيدٌ
इसमें ये लोग जो चाहेंगे उनके लिए हाज़िर है और हमारे यहॉ तो इससे भी ज्यादा है
36وَكَمْ أَهْلَكْنَا قَبْلَهُم مِّن قَرْنٍ هُمْ أَشَدُّ مِنْهُم بَطْشًا فَنَقَّبُوا فِي الْبِلَادِ هَلْ مِن مَّحِيصٍ
और हमने तो इनसे पहले कितनी उम्मतें हलाक कर डाली जो इनसे क़ूवत में कहीं बढ़ कर थीं तो उन लोगों ने (मौत के ख़ौफ से) तमाम शहरों को छान मारा कि भला कहीं भी भागने का ठिकाना है
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अनुवाद — काफ 34

सूरा काफ आयत 34 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : (उसको हुक्म होगा कि) इसमें सही सलामत दाख़िल हो जाओ…

सूरा आयत 34/45 — काफ ق (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: काफ सुनें, काफ अनुवाद, काफ mp3, काफ pdf. आयत 32–36. हिंदी अर्थ: اردو.




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Tuesday, August 18, 2026

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