काफ · 44/45
अनुवाद उच्चारण — सूरा काफ
يَوْمَ تَشَقَّقُ الْأَرْضُ عَنْهُمْ سِرَاعًا ۚ ذَٰلِكَ حَشْرٌ عَلَيْنَا يَسِيرٌ ۝٤٤
Yawma tashaqqaqul ardu `anhum siraa`aa; zaalika hashrun `alainaa yaseer
📖 हिंदी अर्थ
और हमारी ही तरफ फिर कर आना है जिस दिन ज़मीन (उनके ऊपर से) फट जाएगी और ये झट पट निकल खड़े होंगे ये उठाना और जमा करना

M Mishary Rashid Alafasy ✓
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A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
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A Abdullah Al-Juhani ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • تَشَقَّقُ: फट जाएगी, टुकड़े-टुकड़े हो जाएगी।
  • عَنْهُمْ: उन (मुर्दों) से, उनके ऊपर से।
  • سِرَاعًا: तेज़ी से, जल्दी-जल्दी (यह 'سَرِيع' का बहुवचन है)।
  • حَشْرٌ: इकट्ठा करना, उठाना (क़ब्रों से निकालकर हश्र के मैदान में जमा करना)।
  • يَسِيرٌ: आसान, सहल।

तफ़सीर (व्याख्या):

यह आयत क़यामत के दिन के उस भयानक और अज़ीम मंज़र का वर्णन कर रही है, जब अल्लाह तआला सभी मुर्दों को ज़िंदा करके उनके कर्मों का हिसाब लेने के लिए इकट्ठा करेगा। उस दिन धरती फट जाएगी और सभी लोग अपनी क़ब्रों से निकलकर तेज़ी से उस पुकारने वाले (इस्राफील) की ओर दौड़ेंगे जो उन्हें हश्र के मैदान में बुला रहा होगा। यह निकलना और इकट्ठा होना अल्लाह के लिए बिल्कुल आसान है, क्योंकि वह हर चीज़ पर पूर्ण शक्ति रखता है। जिस तरह उसने पहली बार पैदा किया, उसी तरह दोबारा पैदा करना उसके लिए कोई मुश्किल काम नहीं है।

यह आयत हमें याद दिलाती है कि इस दुनिया की ज़िंदगी आख़िरी नहीं है, बल्कि एक बड़ा दिन हमारा इंतज़ार कर रहा है। जो लोग इस पर विश्वास नहीं करते, वे इस दिन को दूर समझते हैं, लेकिन अल्लाह के लिए यह बहुत करीब और आसान है। इसलिए हमें चाहिए कि हम अपनी ज़िंदगी को इस हिसाब के दिन के लिए तैयार करें, अच्छे कर्म करें और अल्लाह की रहमत के तलबगार रहें। यह दिन हर उस इंसान के लिए राहत और खुशी का दिन होगा जिसने दुनिया में अल्लाह की इबादत की और उसके रास्ते पर चला। अल्लाह तआला अपने नेक बंदों को उस दिन की परेशानियों से बचाएगा और उन्हें जन्नत की नेमतों से नवाज़ेगा।



📜 आयत 42-45 — सूरा काफ

42يَوْمَ يَسْمَعُونَ الصَّيْحَةَ بِالْحَقِّ ۚ ذَٰلِكَ يَوْمُ الْخُرُوجِ
(कि उठो) जिस दिन लोग एक सख्त चीख़ को बाख़ूबी सुन लेगें वही दिन (लोगों) के कब्रों से निकलने का होगा
43إِنَّا نَحْنُ نُحْيِي وَنُمِيتُ وَإِلَيْنَا الْمَصِيرُ
बेशक हम ही (लोगों को) ज़िन्दा करते हैं और हम ही मारते हैं
44يَوْمَ تَشَقَّقُ الْأَرْضُ عَنْهُمْ سِرَاعًا ۚ ذَٰلِكَ حَشْرٌ عَلَيْنَا يَسِيرٌ
और हमारी ही तरफ फिर कर आना है जिस दिन ज़मीन (उनके ऊपर से) फट जाएगी और ये झट पट निकल खड़े होंगे ये उठाना और जमा करना
45نَّحْنُ أَعْلَمُ بِمَا يَقُولُونَ ۖ وَمَا أَنتَ عَلَيْهِم بِجَبَّارٍ ۖ فَذَكِّرْ بِالْقُرْآنِ مَن يَخَافُ وَعِيدِ
और हम पर बहुत आसान है (ऐ रसूल) ये लोग जो कुछ कहते हैं हम (उसे) ख़ूब जानते हैं और तुम उन पर जब्र तो देते नहीं हो तो जो हमारे (अज़ाब के) वायदे से डरे उसको तुम क़ुरान के ज़रिए नसीहत करते रहो
काफकुरान सूची
45आयत
मक्कीअवतरण स्थान
44आयत

अनुवाद — काफ 44

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Friday, October 2, 2026

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