काफ · 45/45
अनुवाद उच्चारण — काफ
نَّحْنُ أَعْلَمُ بِمَا يَقُولُونَ ۖ وَمَا أَنتَ عَلَيْهِم بِجَبَّارٍ ۖ فَذَكِّرْ بِالْقُرْآنِ مَن يَخَافُ وَعِيدِ ۝٤٥
Nahnu a`lamu bimaa yaqooloona wa maaa anta `alihim bijabbaarin fazakkir bil quraani many yakhaafu wa`eed
📖 हिंदी अर्थ
और हम पर बहुत आसान है (ऐ रसूल) ये लोग जो कुछ कहते हैं हम (उसे) ख़ूब जानते हैं और तुम उन पर जब्र तो देते नहीं हो तो जो हमारे (अज़ाब के) वायदे से डरे उसको तुम क़ुरान के ज़रिए नसीहत करते रहो

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • بِجَبَّارٍ: (यहाँ) ज़बरदस्ती करने वाला, मुसल्लत (अधिकार रखने वाला) जो लोगों को जबरन इस्लाम पर ला दे।
  • وَعِيدِ: मेरी धमकी, अज़ाब की चेतावनी जो नाफ़रमानों के लिए है।

तफ़सीर:

हम (अल्लाह) भली-भाँति जानते हैं जो कुछ ये मुशरिकीन कहते हैं — चाहे वह अल्लाह पर झूठा इफ़तिरा (आरोप) हो या उसकी आयतों को झुठलाना हो। हमारे इल्म से उनकी कोई बात छिपी नहीं है, और हम उनके हर क़ौल का हिसाब लेने वाले हैं।

ऐ नबी! आप उन पर ज़बरदस्ती करने वाले नहीं हैं कि उन्हें जबरन ईमान पर ला खड़ा करें। आपका काम केवल पैग़ाम पहुँचाना है, इस्लाम कबूल करवाना आपका फ़र्ज़ नहीं। अल्लाह ने आपको जो हुक्म दिया है, उसे पहुँचा दीजिए — यही आपकी ज़िम्मेदारी है।

पस आप क़ुरआन के ज़रिए उन लोगों को नसीहत कीजिए जो मेरी धमकी से डरते हैं — यानी जो अल्लाह के अज़ाब का ख़ौफ़ रखते हैं और अपने गुनाहों पर शर्मिंदा होते हैं। क्योंकि जिसके दिल में अल्लाह का ख़ौफ़ होता है, वही नसीहत क़बूल करता है और ज़िक्र से फ़ायदा उठाता है। जो अल्लाह के वायदे (अज़ाब) से नहीं डरता, उसके लिए नसीहत बेअसर होती है।

यह आयत नबी करीम ﷺ के लिए तसल्ली है कि काफ़िरों की बातों से दिल पर बोझ न डालें, और उनके लिए धमकी है कि अल्लाह उनकी हर बात से वाक़िफ़ है और उन्हें उसका बदला देगा। साथ ही यह भी सिखाती है कि दीन में ज़बरदस्ती नहीं, बल्कि नसीहत और अच्छे अंदाज़ से तब्लीग़ का रास्ता अपनाना चाहिए।

याद रखिए, क़ुरआन वह नूर है जो दिलों को ज़िंदा करता है और डरने वालों के लिए रहनुमा है। जो शख्स अल्लाह के अज़ाब से डरता है, वह क़ुरआन की हर आयत से राहत पाता है और उसकी हिदायत उसके दिल में उतरती है। अल्लाह तआला हम सबको उन लोगों में शामिल करे जो क़ुरआन से नसीहत हासिल करते हैं और उस पर अमल करते हैं। आमीन।



📜 आयत 43-45 — काफ

43إِنَّا نَحْنُ نُحْيِي وَنُمِيتُ وَإِلَيْنَا الْمَصِيرُ
बेशक हम ही (लोगों को) ज़िन्दा करते हैं और हम ही मारते हैं
44يَوْمَ تَشَقَّقُ الْأَرْضُ عَنْهُمْ سِرَاعًا ۚ ذَٰلِكَ حَشْرٌ عَلَيْنَا يَسِيرٌ
और हमारी ही तरफ फिर कर आना है जिस दिन ज़मीन (उनके ऊपर से) फट जाएगी और ये झट पट निकल खड़े होंगे ये उठाना और जमा करना
45نَّحْنُ أَعْلَمُ بِمَا يَقُولُونَ ۖ وَمَا أَنتَ عَلَيْهِم بِجَبَّارٍ ۖ فَذَكِّرْ بِالْقُرْآنِ مَن يَخَافُ وَعِيدِ
और हम पर बहुत आसान है (ऐ रसूल) ये लोग जो कुछ कहते हैं हम (उसे) ख़ूब जानते हैं और तुम उन पर जब्र तो देते नहीं हो तो जो हमारे (अज़ाब के) वायदे से डरे उसको तुम क़ुरान के ज़रिए नसीहत करते रहो
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अनुवाद — काफ 45

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सूरा आयत 45/45 — काफ ق (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: काफ सुनें, काफ अनुवाद, काफ mp3, काफ pdf. आयत 43–45. हिंदी अर्थ: اردو.




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Tuesday, August 18, 2026

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