अज़-ज़ारियात · 48/60
अनुवाद उच्चारण — अज़-ज़ारियात
وَالْأَرْضَ فَرَشْنَاهَا فَنِعْمَ الْمَاهِدُونَ ۝٤٨
Wal arda farashnaahaa fani`mal maahidoon
📖 हिंदी अर्थ
और ज़मीन को भी हम ही ने बिछाया तो हम कैसे अच्छे बिछाने वाले हैं
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • فَرَشْنَاهَا: हमने उसे बिछाया, अर्थात समतल और फैलाया।
  • الْمَاهِدُونَ: बिछाने वाले, समतल करने वाले, आरामदायक बनाने वाले।

तफसीर (व्याख्या):

अल्लाह तआला इस आयत में अपनी महान शक्ति और कृपा का ज़िक्र करते हुए फ़रमाते हैं कि हमने ही धरती को बिछाया है। यानी हमने इस ज़मीन को इस तरह समतल और फैलाया कि यह तुम्हारे लिए एक आरामदायक बिस्तर बन गई। तुम इस पर चलते हो, बसते हो, खेती करते हो, और अपनी सभी ज़रूरतें पूरी करते हो। यह ज़मीन तुम्हारे लिए इस तरह तैयार की गई है जैसे कोई माँ अपने बच्चे के लिए नरम बिस्तर बिछाती है।

फिर अल्लाह फ़रमाता है: "तो हम कितने अच्छे बिछाने वाले हैं!" यह एक प्यार भरा और गर्व भरा वाक्य है। अल्लाह तआला अपनी इस नेमत की तरफ इशारा कर रहे हैं कि हमने इस धरती को इस काबिल बनाया कि यह तुम्हारे रहने के लिए पूरी तरह मुनासिब है। न बहुत ज़्यादा गर्म, न बहुत ज़्यादा ठंडी, न बहुत नरम कि तुम डूब जाओ, न बहुत सख्त कि तुम पर मुश्किल हो। हमने इसे इस तरह बनाया कि यह तुम्हारे लिए एक आदर्श घर है।

इस आयत में हमारे लिए बड़ी सीख है। जिस अल्लाह ने इतनी बड़ी और विशाल धरती को हमारे लिए आरामदायक बिस्तर बनाया, क्या वह हमारी छोटी-छोटी ज़रूरतों को पूरा नहीं कर सकता? क्या वह हमारी दुआओं को सुन नहीं सकता? जब हम अपने चारों ओर देखते हैं कि पहाड़, समुद्र, मैदान, नदियाँ — सब कुछ हमारे लिए ही तैयार किया गया है, तो हमारा दिल अल्लाह की मुहब्बत से भर जाना चाहिए। यह सब कुछ बिना किसी कीमत के हमें मिल रहा है, बस अल्लाह की रहमत और कृपा से।

इसलिए हमें चाहिए कि हम अल्लाह के इन इनामों को पहचानें, उसका शुक्र अदा करें, और उसकी इबादत में अपनी ज़िंदगी गुज़ारें। जिस रब ने हमारे लिए ज़मीन को बिछाया, वही हमें क़यामत के दिन भी उठाएगा और जन्नत में हमारा इंतज़ार कर रहा है — जहाँ की ज़मीन और भी खूबसूरत होगी। आओ, हम अपने उस परवरदिगार के शुक्रगुज़ार बनें जिसने हमें यह सब कुछ दिया।

🎧 सुनें

📜 आयत 46-50 — अज़-ज़ारियात

46وَقَوْمَ نُوحٍ مِّن قَبْلُ ۖ إِنَّهُمْ كَانُوا قَوْمًا فَاسِقِينَ
और (उनसे) पहले (हम) नूह की क़ौम को (हलाक कर चुके थे) बेशक वह बदकार लोग थे
47وَالسَّمَاءَ بَنَيْنَاهَا بِأَيْدٍ وَإِنَّا لَمُوسِعُونَ
और हमने आसमानों को अपने बल बूते से बनाया और बेशक हममें सब क़ुदरत है
48وَالْأَرْضَ فَرَشْنَاهَا فَنِعْمَ الْمَاهِدُونَ
और ज़मीन को भी हम ही ने बिछाया तो हम कैसे अच्छे बिछाने वाले हैं
49وَمِن كُلِّ شَيْءٍ خَلَقْنَا زَوْجَيْنِ لَعَلَّكُمْ تَذَكَّرُونَ
और हम ही ने हर चीज़ की दो दो क़िस्में बनायीं ताकि तुम लोग नसीहत हासिल करो
50فَفِرُّوا إِلَى اللَّهِ ۖ إِنِّي لَكُم مِّنْهُ نَذِيرٌ مُّبِينٌ
तो ख़ुदा ही की तरफ़ भागो मैं तुमको यक़ीनन उसकी तरफ से खुल्लम खुल्ला डराने वाला हूँ
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अनुवाद — अज़-ज़ारियात 48

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Tuesday, August 18, 2026

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