अज़-ज़ारियात · 47/60
अनुवाद उच्चारण — अज़-ज़ारियात
وَالسَّمَاءَ بَنَيْنَاهَا بِأَيْدٍ وَإِنَّا لَمُوسِعُونَ ۝٤٧
Wassamaaa`a banainaa haa bi aydinw wa innaa lamoosi`oon
📖 हिंदी अर्थ
और हमने आसमानों को अपने बल बूते से बनाया और बेशक हममें सब क़ुदरत है
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • بِأَيْدٍ: शक्ति और क़ुदरत के साथ।
  • لَمُوسِعُونَ: विस्तार करने वाले, यानी उसे फैलाने और बढ़ाने की क्षमता रखने वाले।

तफ़सीर (व्याख्या):

अल्लाह तआला ने इस आयत में अपनी महान शक्ति और क़ुदरत का ज़िक्र किया है। वह फ़रमाता है कि हमने आसमान को अपनी क़ुदरत से बनाया, उसे मज़बूत और सुंदर बनाया, और उसे धरती के लिए एक सुरक्षित छत के रूप में स्थापित किया। यह कोई साधारण रचना नहीं है, बल्कि इसमें अत्यधिक शक्ति और हिकमत (बुद्धिमत्ता) का प्रदर्शन है।

फिर फ़रमाया: "और हम ही इसके विस्तार करने वाले हैं" — यानी हमने आसमान को फैलाया और उसे लगातार विस्तार देने की क्षमता रखते हैं। यह एक अद्भुत संकेत है जो आधुनिक विज्ञान की खोजों से भी मेल खाता है कि ब्रह्मांड लगातार फैल रहा है। यह अल्लाह की क़ुदरत का प्रमाण है कि वह हर चीज़ पर पूर्ण नियंत्रण रखता है।

इस आयत में अल्लाह तआला अपनी रचना की महानता की ओर इशारा करके हमें सोचने और चिंतन करने की दावत देता है। जब हम आसमान की ओर देखते हैं, तो हमें अल्लाह की बेपनाह क़ुदरत का अहसास होता है। यह हमें सिखाता है कि जिसने इतने विशाल और व्यवस्थित ब्रह्मांड को बनाया, वह निश्चित रूप से हमारी छोटी-छोटी ज़रूरतों को भी पूरा करने पर क़ादिर है।

इसलिए, हमें चाहिए कि हम अल्लाह की रचना पर ग़ौर करें, उसकी नेमतों का शुक्र अदा करें, और उसकी ओर रुजू करें। यह आयत हमें यक़ीन दिलाती है कि अल्लाह की शक्ति असीमित है, और वह हर मुश्किल में हमारी मदद कर सकता है। बस ज़रूरत है उस पर भरोसा करने और उसकी इबादत में जुड़ जाने की।

🎧 सुनें

📜 आयत 45-49 — अज़-ज़ारियात

45فَمَا اسْتَطَاعُوا مِن قِيَامٍ وَمَا كَانُوا مُنتَصِرِينَ
फिर न वह उठने की ताक़त रखते थे और न बदला ही ले सकते थे
46وَقَوْمَ نُوحٍ مِّن قَبْلُ ۖ إِنَّهُمْ كَانُوا قَوْمًا فَاسِقِينَ
और (उनसे) पहले (हम) नूह की क़ौम को (हलाक कर चुके थे) बेशक वह बदकार लोग थे
47وَالسَّمَاءَ بَنَيْنَاهَا بِأَيْدٍ وَإِنَّا لَمُوسِعُونَ
और हमने आसमानों को अपने बल बूते से बनाया और बेशक हममें सब क़ुदरत है
48وَالْأَرْضَ فَرَشْنَاهَا فَنِعْمَ الْمَاهِدُونَ
और ज़मीन को भी हम ही ने बिछाया तो हम कैसे अच्छे बिछाने वाले हैं
49وَمِن كُلِّ شَيْءٍ خَلَقْنَا زَوْجَيْنِ لَعَلَّكُمْ تَذَكَّرُونَ
और हम ही ने हर चीज़ की दो दो क़िस्में बनायीं ताकि तुम लोग नसीहत हासिल करो
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अनुवाद — अज़-ज़ारियात 47

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Tuesday, August 18, 2026

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