अज़-ज़ारियात · 49/60
अनुवाद उच्चारण — अज़-ज़ारियात
وَمِن كُلِّ شَيْءٍ خَلَقْنَا زَوْجَيْنِ لَعَلَّكُمْ تَذَكَّرُونَ ۝٤٩
Wa min kulli shai`in khalaqnaa zawjaini la`allakum tazakkaroon
📖 हिंदी अर्थ
और हम ही ने हर चीज़ की दो दो क़िस्में बनायीं ताकि तुम लोग नसीहत हासिल करो
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • زَوْجَيْنِ (ज़ौजैन): दो प्रकार, दो क़िस्में, जोड़े (जैसे नर और मादा)।
  • تَذَكَّرُونَ (तज़क्करून): तुम सीख लो, नसीहत हासिल कर लो, अल्लाह की क़ुदरत को याद कर लो।

तफ़सीर (व्याख्या):

अल्लाह तआला फ़रमाता है कि हमने हर चीज़ से दो दो क़िस्में पैदा की हैं — जैसे नर और मादा, आसमान और ज़मीन, दिन और रात, रौशनी और अंधेरा, ज़मीन और समुद्र, गर्मी और सर्दी, खुशी और ग़म, सेहत और बीमारी, ज़िंदगी और मौत। यानी इस पूरी कायनात में हर चीज़ अपने जोड़े के साथ पैदा की गई है। यह कोई इत्तेफ़ाक़ नहीं, बल्कि अल्लाह की हिकमत और क़ुदरत का नमूना है।

यह जोड़ों में पैदा करने का सिलसिला हमें सिखाता है कि जिस तरह हर मख़लूक़ अपने जोड़े के बग़ैर अधूरी है, उसी तरह इस कायनात का ख़ालिक़ (पैदा करने वाला) भी यकता (एक) है, उसका कोई जोड़ा नहीं, कोई शरीक नहीं। जब इंसान इन जोड़ों को देखता है और ग़ौर करता है कि ये सब किस तरह एक दूसरे के साथ मिलकर एक निज़ाम (व्यवस्था) क़ायम करते हैं, तो उसका दिल अल्लाह की वहदानियत (एकता) और उसकी बेपनाह क़ुदरत की तरफ़ मुड़ जाता है।

अल्लाह ने यह सब कुछ इसलिए पैदा किया ताकि हम सोचें, समझें और याद रखें कि जो ख़ुदा इतनी बड़ी कायनात को इतने हुस्न (सुंदरता) और तरतीब (व्यवस्था) के साथ बनाने पर क़ादिर है, वही हमारी नस्लों को पैदा करने वाला, हमें रिज़्क़ (आजीविका) देने वाला, और क़यामत के दिन हमें दोबारा ज़िंदा करने वाला भी है। जिसने पहली बार पैदा किया, वही दोबारा पैदा करने पर भी पूरी तरह क़ादिर है।

प्यारे भाइयो और बहनो! यह आयत हमें दावत देती है कि हम अपनी आँखें खोलें, इस कायनात पर ग़ौर करें, और हर जोड़े में अल्लाह की निशानियाँ देखें। जब हम सुबह और शाम, गर्मी और सर्दी, नर और मादा, ज़मीन और आसमान को देखते हैं, तो यह सब हमें याद दिलाता है कि एक अल्लाह है जिसका कोई जोड़ा नहीं, कोई बराबर नहीं। यही सोच इंसान को शिर्क (बहुदेववाद) से बचाती है और उसे सच्चे दिल से अल्लाह की इबादत की तरफ़ ले जाती है।

अल्लाह तआला हम सबको तौफ़ीक़ दे कि हम उसकी निशानियों पर ग़ौर करें और उसकी इबादत पर साबित क़दम रहें। आमीन।

🎧 सुनें

📜 आयत 47-51 — अज़-ज़ारियात

47وَالسَّمَاءَ بَنَيْنَاهَا بِأَيْدٍ وَإِنَّا لَمُوسِعُونَ
और हमने आसमानों को अपने बल बूते से बनाया और बेशक हममें सब क़ुदरत है
48وَالْأَرْضَ فَرَشْنَاهَا فَنِعْمَ الْمَاهِدُونَ
और ज़मीन को भी हम ही ने बिछाया तो हम कैसे अच्छे बिछाने वाले हैं
49وَمِن كُلِّ شَيْءٍ خَلَقْنَا زَوْجَيْنِ لَعَلَّكُمْ تَذَكَّرُونَ
और हम ही ने हर चीज़ की दो दो क़िस्में बनायीं ताकि तुम लोग नसीहत हासिल करो
50فَفِرُّوا إِلَى اللَّهِ ۖ إِنِّي لَكُم مِّنْهُ نَذِيرٌ مُّبِينٌ
तो ख़ुदा ही की तरफ़ भागो मैं तुमको यक़ीनन उसकी तरफ से खुल्लम खुल्ला डराने वाला हूँ
51وَلَا تَجْعَلُوا مَعَ اللَّهِ إِلَٰهًا آخَرَ ۖ إِنِّي لَكُم مِّنْهُ نَذِيرٌ مُّبِينٌ
और ख़ुदा के साथ दूसरा माबूद न बनाओ मैं तुमको यक़ीनन उसकी तरफ से खुल्लम खुल्ला डराने वाला हूँ
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अनुवाद — अज़-ज़ारियात 49

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Tuesday, August 18, 2026

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