अज़-ज़ारियात · 60/60
अनुवाद उच्चारण — सूरा अज़-ज़ारियात
فَوَيْلٌ لِّلَّذِينَ كَفَرُوا مِن يَوْمِهِمُ الَّذِي يُوعَدُونَ ۝٦٠
Fawailul lillazeena kafaroo miny yawmihimul lazee yoo`adoon
📖 हिंदी अर्थ
तो जिस दिन का इन काफ़िरों से वायदा किया जाता है इससे इनके लिए ख़राबी है

M Mishary Rashid Alafasy ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • वैल (فَوَيْلٌ) – विनाश, हानि, अफ़सोस और कड़ी यातना।
  • कुफ़्र (كَفَرُوا) – इनकार करना, अल्लाह और उसके रसूल को न मानना।
  • वायद (يُوعَدُونَ) – जिस दिन का वादा किया गया है, अर्थात् क़ियामत का दिन।

तफ़सीर:

इस आयत में अल्लाह तआला ने उन लोगों के लिए विनाश और अफ़सोस की घोषणा की है जिन्होंने अल्लाह और उसके रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) को झुठलाया और कुफ़्र का रास्ता अपनाया। उनके लिए उस दिन का इंतज़ार है जिसका उनसे वादा किया गया है—वह दिन क़ियामत का दिन है, जब उन पर अज़ाब नाज़िल होगा और वे अपने किए की सज़ा पाएँगे। यह दिन उनके लिए बड़ी मुसीबत, शर्मिंदगी और स्थायी पीड़ा का दिन होगा।

यह आयत उन लोगों के लिए एक कड़ी चेतावनी है जो अल्लाह की निशानियों से मुँह मोड़ते हैं और आख़िरत पर ईमान नहीं रखते। अल्लाह तआला ने अपने रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) को सांत्वना दी है कि इनकार करने वालों का अंजाम बहुत बुरा है, और उनका इंतज़ार करने वाला दिन निकट है।

दावती पहलू:

यह आयत हमें सोचने पर मजबूर करती है कि क्या हम उन लोगों में से हैं जो अल्लाह के वादे पर यक़ीन रखते हैं, या उनमें से हैं जो उसे भूल गए? अल्लाह का वादा सत्य है, और क़ियामत का दिन अवश्य आएगा। जो लोग इस दिन पर ईमान रखते हैं और अच्छे कर्म करते हैं, उनके लिए ख़ुशख़बरी है; और जो इनकार करते हैं, उनके लिए विनाश है। आइए हम अपने जीवन को अल्लाह की राह में लगाएँ, उसकी इबादत करें और उसके रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) की सुन्नत पर चलें, ताकि उस दिन हम सुरक्षित रहें और अल्लाह की रहमत के हक़दार बनें। यह दुनिया फ़ानी है, और आख़िरत ही असली जीवन है—वहाँ की कामयाबी ही सच्ची कामयाबी है।



📜 आयत 58-60 — सूरा अज़-ज़ारियात

58إِنَّ اللَّهَ هُوَ الرَّزَّاقُ ذُو الْقُوَّةِ الْمَتِينُ
ख़ुदा ख़ुद बड़ा रोज़ी देने वाला ज़ोरावर (और) ज़बरदस्त है
59فَإِنَّ لِلَّذِينَ ظَلَمُوا ذَنُوبًا مِّثْلَ ذَنُوبِ أَصْحَابِهِمْ فَلَا يَسْتَعْجِلُونِ
तो (इन) ज़ालिमों के वास्ते भी अज़ाब का कुछ हिस्सा है जिस तरह उनके साथियों के लिए हिस्सा था तो इनको हम से जल्दी न करनी चाहिए
60فَوَيْلٌ لِّلَّذِينَ كَفَرُوا مِن يَوْمِهِمُ الَّذِي يُوعَدُونَ
तो जिस दिन का इन काफ़िरों से वायदा किया जाता है इससे इनके लिए ख़राबी है
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अनुवाद — अज़-ज़ारियात 60

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Friday, October 2, 2026

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