अत-तूर · 27/49
अनुवाद उच्चारण — सूरा अत-तूर
فَمَنَّ اللَّهُ عَلَيْنَا وَوَقَانَا عَذَابَ السَّمُومِ ۝٢٧
Famannnal laahu `alainaa wa waqaanaa `azaabas samoom
📖 हिंदी अर्थ
तो ख़ुदा ने हम पर बड़ा एहसान किया और हमको (जहन्नुम की) लौ के अज़ाब से बचा लिया

M Mishary Rashid Alafasy ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • فَمَنَّ اللهُ عَلَيْنَا: अल्लाह ने हम पर उपकार किया, हमें कृपा और दया प्रदान की।
  • وَوَقَانَا: और हमें बचा लिया, सुरक्षित रखा।
  • عَذَابَ السَّمُومِ: जहन्नम की आग की तपिश और उसकी अत्यधिक गर्मी का अज़ाब। यह जहन्नम का ही एक नाम है, जो अपनी अत्यधिक गर्मी और भीषणता के लिए जाना जाता है।

विस्तृत तफ़सीर (व्याख्या):

जन्नत के नेक बंदे जब अपनी नेअमतों (अनगिनत आशीर्वादों) को देखते हैं, तो वे एक-दूसरे से पूछते हैं कि यह सब किस वजह से मिला? वे याद करते हैं कि दुनिया में रहते हुए वे अपने परिवारों के बीच अल्लाह से डरते थे, उसके अज़ाब से खौफ खाते थे और उसकी रहमत की उम्मीद रखते थे। उनका दिल हमेशा इस बात से कांपता था कि कहीं उनका रब उन्हें अपने क़हर (प्रकोप) में न पकड़ ले। यही खौफ और यही सच्ची इबादत उनके लिए नजात (मुक्ति) का ज़रिया बनी।

फिर वे शुक्रिया अदा करते हुए कहते हैं: "तो अल्लाह ने हम पर उपकार किया और हमें 'समूम' (जहन्नम की भीषण गर्मी) के अज़ाब से बचा लिया।" यानी अल्लाह ने अपनी महान कृपा से हमें हिदायत (सही रास्ता) दी, हमें ईमान और अच्छे कर्मों की तौफीक़ दी, और अपनी रहमत से हमें उस आग से महफूज़ रखा जिसकी गर्मी का अंदाज़ा नहीं लगाया जा सकता। यह अल्लाह का सबसे बड़ा एहसान है कि उसने हमें जहन्नम की आग से बचाया और जन्नत की ठंडी, सुखदायी और हमेशा रहने वाली नेअमतों से नवाज़ा।

यह बात हमें सिखाती है कि अल्लाह की रहमत का दरवाज़ा हमेशा खुला है। जो बंदा दुनिया में अल्लाह से डरता है, उसकी इबादत में सच्चा होता है और उससे माफ़ी और बचाव की दुआ करता है, अल्लाह उसे जहन्नम की आग से बचाकर जन्नत की नेअमतों से नवाज़ता है। यह हमारे लिए सबसे बड़ी खुशखबरी है कि अल्लाह अपने बंदों पर बड़ा कृपालु और दयालु है। वह चाहता है कि हम उसकी ओर रुजू करें, उससे डरें और उससे उम्मीद रखें, ताकि वह हमें भी इसी तरह अपनी रहमत के साये में ले ले और हमें भी जहन्नम की आग से बचाकर जन्नत की हमेशा रहने वाली खुशियों से भर दे।



📜 आयत 25-29 — सूरा अत-तूर

25وَأَقْبَلَ بَعْضُهُمْ عَلَىٰ بَعْضٍ يَتَسَاءَلُونَ
और एक दूसरे की तरफ रूख़ करके (लुत्फ की) बातें करेंगे
26قَالُوا إِنَّا كُنَّا قَبْلُ فِي أَهْلِنَا مُشْفِقِينَ
(उनमें से कुछ) कहेंगे कि हम इससे पहले अपने घर में (ख़ुदा से बहुत) डरा करते थे
27فَمَنَّ اللَّهُ عَلَيْنَا وَوَقَانَا عَذَابَ السَّمُومِ
तो ख़ुदा ने हम पर बड़ा एहसान किया और हमको (जहन्नुम की) लौ के अज़ाब से बचा लिया
28إِنَّا كُنَّا مِن قَبْلُ نَدْعُوهُ ۖ إِنَّهُ هُوَ الْبَرُّ الرَّحِيمُ
इससे क़ब्ल हम उनसे दुआएँ किया करते थे बेशक वह एहसान करने वाला मेहरबान है
29فَذَكِّرْ فَمَا أَنتَ بِنِعْمَتِ رَبِّكَ بِكَاهِنٍ وَلَا مَجْنُونٍ
तो (ऐ रसूल) तुम नसीहत किए जाओ तो तुम अपने परवरदिगार के फज़ल से न काहिन हो और न मजनून किया
अत-तूरकुरान सूची
49आयत
मक्कीअवतरण स्थान
27आयत

अनुवाद — अत-तूर 27

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Thursday, October 1, 2026

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