Mishary Rashid Alafasy
✓
Mahmoud Khalil Al-Husary
✓
Abdurrahman As-Sudais
✓
Mohamed Siddiq Al-Minshawi
✓
Abdul Basit Abdul Samad
✓
Ali Al-Hudhaify
✓
Ahmed ibn Ali al-Ajamy
✓
Abu Bakr Ash-Shaatree
✓
Muhammad Ayyoub
✓
Abdullah Basfar
✓
Abdullah Al-Juhani
✓
Maher Al Muaiqly
✓
अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- مُشْفِقِينَ (मुश्फ़िक़ीन): डरने वाले, खौफ़ खाने वाले, अल्लाह के अज़ाब से सहमे हुए।
तफ़सीर:
जन्नत के लोग जब जन्नत की नेअमतों और अपनी उस बड़ी कामयाबी को देखेंगे जो अल्लाह ने उन्हें अता की है, तो वे एक-दूसरे से पूछेंगे कि आख़िर यह इज़्ज़त और कामयाबी किस वजह से मिली? तो वे जवाब देंगे: "हम पहले दुनिया में अपने घरवालों के बीच रहते हुए भी अल्लाह से डरने वाले थे।" यानी हम दुनिया की ज़िंदगी में अपने अहल-ओ-अयाल के साथ रहते हुए भी अल्लाह के अज़ाब से खौफ़ज़दा रहते थे। हम उसके अज़ाब और उसकी सज़ा से डरते थे, और इसी डर की वजह से हम उसकी इबादत करते थे, उसके हुक्मों पर अमल करते थे और उसकी नाफ़रमानी से बचते थे।
हम दुनिया में अपने अहल-ओ-अयाल के साथ रहते हुए भी अल्लाह के सामने झुकते थे, उसी से दुआ करते थे और उसी से मदद माँगते थे। हम उससे यही माँगते थे कि वह हमें जहन्नम की आग के अज़ाब से बचाए और हमें अपनी जन्नत की नेअमतों तक पहुँचाए। अल्लाह ने हम पर अपनी रहमत और मेहरबानी की, हमें हिदायत दी और तौफ़ीक़ अता की, और हमें जहन्नम की आग से बचा लिया। बेशक वह बड़ा करम करने वाला और रहम फरमाने वाला है। उसी ने अपने करम और रहमत से हमें अपनी रज़ा और जन्नत अता की और अपने ग़ज़ब और जहन्नम की आग से हमें महफ़ूज़ रखा।
दावती पहलू:
यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह से डरना और उसके अज़ाब से खौफ़ खाना ही वह चाबी है जो इंसान को जन्नत तक पहुँचाती है। जो शख्स दुनिया में अल्लाह से डरता है, अल्लाह उसे आख़िरत में अम्न (सुकून) अता करता है। यह खौफ़ इंसान को गुनाहों से रोकता है और नेकी की तरफ़ ले जाता है। प्यारे इस्लामी भाइयों! हमें भी चाहिए कि दुनिया में रहते हुए, अपने घरवालों के बीच, अपने काम-काज में, हर हालत में अल्लाह से डरें और उसकी रज़ा के लिए काम करें, ताकि हम भी उन खुशनसीब लोगों में शामिल हों जिन्हें अल्लाह अपनी जन्नत अता करेगा। याद रखिए, अल्लाह का डर दिल में पैदा हो तो ज़िंदगी बदल जाती है, और यही डर इंसान को दुनिया और आख़िरत दोनों की कामयाबी तक पहुँचाता है।
📜 आयत 24-28 — सूरा अत-तूर
अनुवाद — अत-तूर 26
सूरा अत-तूर आयत 26 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : (उनमें से कुछ) कहेंगे कि हम इससे पहले अपने घर…सूरा आयत 26/49 — सूरा अत-तूर الطور (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अत-तूर सुनें, सूरा अत-तूर अनुवाद, सूरा अत-तूर mp3, सूरा अत-तूर pdf. आयत 24–28. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Thursday, October 1, 2026
अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए


