अत-तूर · 26/49
अनुवाद उच्चारण — अत-तूर
قَالُوا إِنَّا كُنَّا قَبْلُ فِي أَهْلِنَا مُشْفِقِينَ ۝٢٦
Qaalooo innaa kunnaa qablu feee ahlinaa mushfiqeen
📖 हिंदी अर्थ
(उनमें से कुछ) कहेंगे कि हम इससे पहले अपने घर में (ख़ुदा से बहुत) डरा करते थे

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • مُشْفِقِينَ (मुश्फ़िक़ीन): डरने वाले, खौफ़ खाने वाले, अल्लाह के अज़ाब से सहमे हुए।

तफ़सीर:

जन्नत के लोग जब जन्नत की नेअमतों और अपनी उस बड़ी कामयाबी को देखेंगे जो अल्लाह ने उन्हें अता की है, तो वे एक-दूसरे से पूछेंगे कि आख़िर यह इज़्ज़त और कामयाबी किस वजह से मिली? तो वे जवाब देंगे: "हम पहले दुनिया में अपने घरवालों के बीच रहते हुए भी अल्लाह से डरने वाले थे।" यानी हम दुनिया की ज़िंदगी में अपने अहल-ओ-अयाल के साथ रहते हुए भी अल्लाह के अज़ाब से खौफ़ज़दा रहते थे। हम उसके अज़ाब और उसकी सज़ा से डरते थे, और इसी डर की वजह से हम उसकी इबादत करते थे, उसके हुक्मों पर अमल करते थे और उसकी नाफ़रमानी से बचते थे।

हम दुनिया में अपने अहल-ओ-अयाल के साथ रहते हुए भी अल्लाह के सामने झुकते थे, उसी से दुआ करते थे और उसी से मदद माँगते थे। हम उससे यही माँगते थे कि वह हमें जहन्नम की आग के अज़ाब से बचाए और हमें अपनी जन्नत की नेअमतों तक पहुँचाए। अल्लाह ने हम पर अपनी रहमत और मेहरबानी की, हमें हिदायत दी और तौफ़ीक़ अता की, और हमें जहन्नम की आग से बचा लिया। बेशक वह बड़ा करम करने वाला और रहम फरमाने वाला है। उसी ने अपने करम और रहमत से हमें अपनी रज़ा और जन्नत अता की और अपने ग़ज़ब और जहन्नम की आग से हमें महफ़ूज़ रखा।

दावती पहलू:

यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह से डरना और उसके अज़ाब से खौफ़ खाना ही वह चाबी है जो इंसान को जन्नत तक पहुँचाती है। जो शख्स दुनिया में अल्लाह से डरता है, अल्लाह उसे आख़िरत में अम्न (सुकून) अता करता है। यह खौफ़ इंसान को गुनाहों से रोकता है और नेकी की तरफ़ ले जाता है। प्यारे इस्लामी भाइयों! हमें भी चाहिए कि दुनिया में रहते हुए, अपने घरवालों के बीच, अपने काम-काज में, हर हालत में अल्लाह से डरें और उसकी रज़ा के लिए काम करें, ताकि हम भी उन खुशनसीब लोगों में शामिल हों जिन्हें अल्लाह अपनी जन्नत अता करेगा। याद रखिए, अल्लाह का डर दिल में पैदा हो तो ज़िंदगी बदल जाती है, और यही डर इंसान को दुनिया और आख़िरत दोनों की कामयाबी तक पहुँचाता है।



📜 आयत 24-28 — अत-तूर

24۞ وَيَطُوفُ عَلَيْهِمْ غِلْمَانٌ لَّهُمْ كَأَنَّهُمْ لُؤْلُؤٌ مَّكْنُونٌ
(और ख़िदमत के लिए) नौजवान लड़के उनके आस पास चक्कर लगाया करेंगे वह (हुस्न व जमाल में) गोया एहतियात से रखे हुए मोती हैं
25وَأَقْبَلَ بَعْضُهُمْ عَلَىٰ بَعْضٍ يَتَسَاءَلُونَ
और एक दूसरे की तरफ रूख़ करके (लुत्फ की) बातें करेंगे
26قَالُوا إِنَّا كُنَّا قَبْلُ فِي أَهْلِنَا مُشْفِقِينَ
(उनमें से कुछ) कहेंगे कि हम इससे पहले अपने घर में (ख़ुदा से बहुत) डरा करते थे
27فَمَنَّ اللَّهُ عَلَيْنَا وَوَقَانَا عَذَابَ السَّمُومِ
तो ख़ुदा ने हम पर बड़ा एहसान किया और हमको (जहन्नुम की) लौ के अज़ाब से बचा लिया
28إِنَّا كُنَّا مِن قَبْلُ نَدْعُوهُ ۖ إِنَّهُ هُوَ الْبَرُّ الرَّحِيمُ
इससे क़ब्ल हम उनसे दुआएँ किया करते थे बेशक वह एहसान करने वाला मेहरबान है
अत-तूरकुरान सूची
49आयत
मक्कीRevelation
26आयत

अनुवाद — अत-तूर 26

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Wednesday, August 19, 2026

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