अत-तूर · 28/49
अनुवाद उच्चारण — अत-तूर
إِنَّا كُنَّا مِن قَبْلُ نَدْعُوهُ ۖ إِنَّهُ هُوَ الْبَرُّ الرَّحِيمُ ۝٢٨
Innaa kunnaa min qablu nad`oohu innahoo huwal barrur raheem
📖 हिंदी अर्थ
इससे क़ब्ल हम उनसे दुआएँ किया करते थे बेशक वह एहसान करने वाला मेहरबान है

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • الْبَرّ (अल-बर्र): अत्यंत भलाई करने वाला, अपने बंदों पर एहसान करने वाला।
  • الرَّحِيم (अर-रहीम): बड़ी रहमत वाला, जिसकी रहमत असीम और स्थायी है।

तफ़सीर (व्याख्या):

यह आयत जन्नत (स्वर्ग) के निवासियों का वह कथन है जो वे जन्नत में प्रवेश करने के बाद आपस में बातचीत करते हुए कहेंगे। वे एक-दूसरे से पूछेंगे कि हमें यह महान सम्मान और स्थायी सुख कैसे प्राप्त हुआ? तब वे स्वयं उत्तर देंगे: "हम पहले (दुनिया में) अपने परिवारों के बीच रहते हुए अपने रब से डरते थे, उसके अज़ाब (दंड) से सावधान रहते थे, और उसकी रहमत की आशा रखते थे। हम उसी को पुकारते थे, उसी की इबादत करते थे और उसे एक मानते थे। हम उससे दुआ करते थे कि वह हमें जहन्नम की आग के अज़ाब से बचाए और हमें अपनी नेमतों तक पहुँचाए।"

फिर वे यह भी कहेंगे: "हमारे रब ने हमारी दुआ क़बूल की, हमें अपनी ओर बुलाया, हमें ईमान की तौफ़ीक़ दी, हमें जन्नत में दाख़िल किया और जहन्नम की आग से बचा लिया। यह सब उसके करम और रहमत से हुआ। वह सचमुच अत्यंत भलाई करने वाला (अल-बर्र) है और बड़ी रहमत वाला (अर-रहीम) है। उसकी भलाई और रहमत का ही नतीजा है कि हम आज इस सुख और शांति में हैं।"

यह आयत हमें सिखाती है कि दुनिया में अल्लाह से डरना, उसकी इबादत करना और उससे दुआ करना ही वह रास्ता है जो हमें जन्नत तक पहुँचाता है। अल्लाह अपने बंदों पर बहुत मेहरबान है, वह उनकी दुआएँ सुनता है और उन्हें जवाब देता है। जो लोग उसे पुकारते हैं, वह उन्हें कभी निराश नहीं करता। यही अल्लाह का करम है कि वह अपने नेक बंदों को जन्नत देता है और उन्हें जहन्नम से बचाता है। इसलिए हमें चाहिए कि हम भी उन नेक लोगों की तरह अल्लाह से डरें, उसकी इबादत करें और उससे दुआ करें, ताकि हम भी उसकी रहमत और भलाई के हक़दार बन सकें।



📜 आयत 26-30 — अत-तूर

26قَالُوا إِنَّا كُنَّا قَبْلُ فِي أَهْلِنَا مُشْفِقِينَ
(उनमें से कुछ) कहेंगे कि हम इससे पहले अपने घर में (ख़ुदा से बहुत) डरा करते थे
27فَمَنَّ اللَّهُ عَلَيْنَا وَوَقَانَا عَذَابَ السَّمُومِ
तो ख़ुदा ने हम पर बड़ा एहसान किया और हमको (जहन्नुम की) लौ के अज़ाब से बचा लिया
28إِنَّا كُنَّا مِن قَبْلُ نَدْعُوهُ ۖ إِنَّهُ هُوَ الْبَرُّ الرَّحِيمُ
इससे क़ब्ल हम उनसे दुआएँ किया करते थे बेशक वह एहसान करने वाला मेहरबान है
29فَذَكِّرْ فَمَا أَنتَ بِنِعْمَتِ رَبِّكَ بِكَاهِنٍ وَلَا مَجْنُونٍ
तो (ऐ रसूल) तुम नसीहत किए जाओ तो तुम अपने परवरदिगार के फज़ल से न काहिन हो और न मजनून किया
30أَمْ يَقُولُونَ شَاعِرٌ نَّتَرَبَّصُ بِهِ رَيْبَ الْمَنُونِ
क्या (तुमको) ये लोग कहते हैं कि (ये) शायर हैं (और) हम तो उसके बारे में ज़माने के हवादिस का इन्तेज़ार कर रहे हैं
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अनुवाद — अत-तूर 28

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Tuesday, August 18, 2026

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