Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- मुरसिलुन नाक़ा: हम नाक़ा (ऊँटनी) को भेजने वाले हैं, अर्थात उसे प्रकट करने वाले हैं।
- फ़ित्नतन: परीक्षा के रूप में, आज़माइश के तौर पर।
- फ़र्तक़िब्हुम: तो आप उनका इंतज़ार करें, उन पर नज़र रखें।
- वस्बिर: और धैर्य रखें, सब्र करें।
तफ़सीर (व्याख्या):
यह आयत हज़रत सालेह अलैहिस्सलाम और उनकी क़ौम (समूद) के क़िस्से से जुड़ी हुई है। जब समूद क़ौम ने हठधर्मी और ज़िद से काम लेते हुए नबी सालेह से एक चमत्कार की माँग की, तो अल्लाह तआला ने उनकी इस माँग को पूरा करने का फ़ैसला किया। अल्लाह फ़रमाता है: "हम नाक़ा (ऊँटनी) को भेजने वाले हैं, उसे एक पत्थर से निकालकर उनके सामने पेश करेंगे, और यह उनके लिए एक परीक्षा होगी।"
यह ऊँटनी अल्लाह की क़ुदरत का एक ज़बरदस्त नमूना थी, जो उनके सामने एक चट्टान से निकलकर आई। यह कोई साधारण ऊँटनी नहीं थी, बल्कि अल्लाह की एक निशानी थी, जो उनकी सच्चाई की गवाही दे रही थी। अल्लाह ने हज़रत सालेह को हुक्म दिया कि वे उन पर नज़र रखें और धैर्य से काम लें, क्योंकि यह परीक्षा उनके ईमान और सच्चाई को ज़ाहिर करने के लिए थी।
इस आयत में हमारे लिए बहुत बड़ा सबक है। अल्लाह तआला जब किसी को परीक्षा में डालता है, तो वह उसकी सच्चाई और झूठ को साफ़ कर देता है। हज़रत सालेह ने अपनी क़ौम को समझाया कि यह अल्लाह की निशानी है, इसे छेड़ना मत, लेकिन उन्होंने नाफ़रमानी की और उस ऊँटनी को काट डाला। इसके बाद अल्लाह का अज़ाब आया और वे सब तबाह हो गए।
प्यारे भाइयों और बहनों! यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह की निशानियों पर ग़ौर करें और उनसे सबक लें। अल्लाह जब किसी को परीक्षा में डालता है, तो उसका मक़सद हमारी भलाई होता है, ताकि हम सच्चाई पर क़ायम रहें और झूठ से बचें। हज़रत सालेह की तरह हमें भी धैर्य और सब्र से काम लेना चाहिए, चाहे हालात कितने भी मुश्किल हों। अल्लाह हमेशा सब्र करने वालों के साथ होता है और उन्हें कामयाबी देता है।
याद रखें, अल्लाह की हर परीक्षा में हमारे लिए भलाई छिपी होती है। बस हमें उस पर भरोसा रखना चाहिए और अपने नबी की सुन्नत पर चलना चाहिए। अल्लाह हमें सच्चे दिल से तौबा करने और अपनी राह पर चलने की तौफ़ीक़ दे। आमीन।
📜 आयत 25-29 — सूरा अल-क़मर
अनुवाद — अल-क़मर 27
सूरा अल-क़मर आयत 27 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : (ऐ सालेह) हम उनकी आज़माइश के लिए ऊँटनी भेजने वाले…सूरा आयत 27/55 — सूरा अल-क़मर القمر (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अल-क़मर सुनें, सूरा अल-क़मर अनुवाद, सूरा अल-क़मर mp3, सूरा अल-क़मर pdf. आयत 25–29. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Friday, October 2, 2026
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