अल-क़मर · 27/55
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-क़मर
إِنَّا مُرْسِلُو النَّاقَةِ فِتْنَةً لَّهُمْ فَارْتَقِبْهُمْ وَاصْطَبِرْ ۝٢٧
Innaa mursilun naaqati fitnatal lahum fartaqibhum wastabir
📖 हिंदी अर्थ
(ऐ सालेह) हम उनकी आज़माइश के लिए ऊँटनी भेजने वाले हैं तो तुम उनको देखते रहो और (थोड़ा) सब्र करो

M Mishary Rashid Alafasy ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • मुरसिलुन नाक़ा: हम नाक़ा (ऊँटनी) को भेजने वाले हैं, अर्थात उसे प्रकट करने वाले हैं।
  • फ़ित्नतन: परीक्षा के रूप में, आज़माइश के तौर पर।
  • फ़र्तक़िब्हुम: तो आप उनका इंतज़ार करें, उन पर नज़र रखें।
  • वस्बिर: और धैर्य रखें, सब्र करें।

तफ़सीर (व्याख्या):

यह आयत हज़रत सालेह अलैहिस्सलाम और उनकी क़ौम (समूद) के क़िस्से से जुड़ी हुई है। जब समूद क़ौम ने हठधर्मी और ज़िद से काम लेते हुए नबी सालेह से एक चमत्कार की माँग की, तो अल्लाह तआला ने उनकी इस माँग को पूरा करने का फ़ैसला किया। अल्लाह फ़रमाता है: "हम नाक़ा (ऊँटनी) को भेजने वाले हैं, उसे एक पत्थर से निकालकर उनके सामने पेश करेंगे, और यह उनके लिए एक परीक्षा होगी।"

यह ऊँटनी अल्लाह की क़ुदरत का एक ज़बरदस्त नमूना थी, जो उनके सामने एक चट्टान से निकलकर आई। यह कोई साधारण ऊँटनी नहीं थी, बल्कि अल्लाह की एक निशानी थी, जो उनकी सच्चाई की गवाही दे रही थी। अल्लाह ने हज़रत सालेह को हुक्म दिया कि वे उन पर नज़र रखें और धैर्य से काम लें, क्योंकि यह परीक्षा उनके ईमान और सच्चाई को ज़ाहिर करने के लिए थी।

इस आयत में हमारे लिए बहुत बड़ा सबक है। अल्लाह तआला जब किसी को परीक्षा में डालता है, तो वह उसकी सच्चाई और झूठ को साफ़ कर देता है। हज़रत सालेह ने अपनी क़ौम को समझाया कि यह अल्लाह की निशानी है, इसे छेड़ना मत, लेकिन उन्होंने नाफ़रमानी की और उस ऊँटनी को काट डाला। इसके बाद अल्लाह का अज़ाब आया और वे सब तबाह हो गए।

प्यारे भाइयों और बहनों! यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह की निशानियों पर ग़ौर करें और उनसे सबक लें। अल्लाह जब किसी को परीक्षा में डालता है, तो उसका मक़सद हमारी भलाई होता है, ताकि हम सच्चाई पर क़ायम रहें और झूठ से बचें। हज़रत सालेह की तरह हमें भी धैर्य और सब्र से काम लेना चाहिए, चाहे हालात कितने भी मुश्किल हों। अल्लाह हमेशा सब्र करने वालों के साथ होता है और उन्हें कामयाबी देता है।

याद रखें, अल्लाह की हर परीक्षा में हमारे लिए भलाई छिपी होती है। बस हमें उस पर भरोसा रखना चाहिए और अपने नबी की सुन्नत पर चलना चाहिए। अल्लाह हमें सच्चे दिल से तौबा करने और अपनी राह पर चलने की तौफ़ीक़ दे। आमीन।



📜 आयत 25-29 — सूरा अल-क़मर

25أَأُلْقِيَ الذِّكْرُ عَلَيْهِ مِن بَيْنِنَا بَلْ هُوَ كَذَّابٌ أَشِرٌ
क्या हम सबमें बस उसी पर वही नाज़िल हुई है (नहीं) बल्कि ये तो बड़ा झूठा तअल्ली करने वाला है
26سَيَعْلَمُونَ غَدًا مَّنِ الْكَذَّابُ الْأَشِرُ
उनको अनक़रीब कल ही मालूम हो जाएगा कि कौन बड़ा झूठा तकब्बुर करने वाला है
27إِنَّا مُرْسِلُو النَّاقَةِ فِتْنَةً لَّهُمْ فَارْتَقِبْهُمْ وَاصْطَبِرْ
(ऐ सालेह) हम उनकी आज़माइश के लिए ऊँटनी भेजने वाले हैं तो तुम उनको देखते रहो और (थोड़ा) सब्र करो
28وَنَبِّئْهُمْ أَنَّ الْمَاءَ قِسْمَةٌ بَيْنَهُمْ ۖ كُلُّ شِرْبٍ مُّحْتَضَرٌ
और उनको ख़बर कर दो कि उनमें पानी की बारी मुक़र्रर कर दी गयी है हर (बारी वाले को अपनी) बारी पर हाज़िर होना चाहिए
29فَنَادَوْا صَاحِبَهُمْ فَتَعَاطَىٰ فَعَقَرَ
तो उन लोगों ने अपने रफीक़ (क़ेदार) को बुलाया तो उसने पकड़ कर (ऊँटनी की) कूंचे काट डालीं
अल-क़मरकुरान सूची
55आयत
मक्कीअवतरण स्थान
27आयत

अनुवाद — अल-क़मर 27

सूरा अल-क़मर आयत 27 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : (ऐ सालेह) हम उनकी आज़माइश के लिए ऊँटनी भेजने वाले…

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Friday, October 2, 2026

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