अल-क़मर · 28/55
अनुवाद उच्चारण — अल-क़मर
وَنَبِّئْهُمْ أَنَّ الْمَاءَ قِسْمَةٌ بَيْنَهُمْ ۖ كُلُّ شِرْبٍ مُّحْتَضَرٌ ۝٢٨
Wa nabbi`hum annal maaa`a qismatum bainahum kullu shirbim muhtadar
📖 हिंदी अर्थ
और उनको ख़बर कर दो कि उनमें पानी की बारी मुक़र्रर कर दी गयी है हर (बारी वाले को अपनी) बारी पर हाज़िर होना चाहिए

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • قِسْمَةٌ: बंटा हुआ, हिस्सों में विभाजित।
  • شِرْبٍ: पानी का हिस्सा, नसीब, बारी।
  • مُحْتَضَرٌ: जिसके पास हाज़िर किया जाए, यानी जिसकी बारी हो वह उस समय मौजूद रहे।

तफसीर (व्याख्या):

ऐ नबी! अपनी क़ौम को साफ़-साफ़ ख़बर दे दो कि यह पानी उनके और इस ऊँटनी के बीच बाँट दिया गया है। एक दिन उनके लिए पानी होगा और एक दिन इस ऊँटनी के लिए। जिस दिन उनकी बारी होगी, वे पानी पर हाज़िर होंगे और उस दिन ऊँटनी को पानी से दूर रखा जाएगा। और जिस दिन ऊँटनी की बारी होगी, वह पानी पीने आएगी और उस दिन क़ौम के लोग पानी के पास नहीं आएँगे। यह अल्लाह की ओर से एक इम्तिहान (परीक्षा) था, ताकि यह साबित हो जाए कि कौन अपने नबी की बात मानता है और कौन सरकशी और इनकार पर अड़ा रहता है।

दावत और नसीहत:

यह क़िस्सा हमें सिखाता है कि अल्लाह तआला अपने बंदों को अलग-अलग तरीक़ों से आज़माता है। कभी वह नेमतें देकर शुक्र का इम्तिहान लेता है, तो कभी मुश्किलों में सब्र का। इस क़ौम ने अल्लाह के नबी सालेह (अलैहिस्सलाम) की बात न मानी और ऊँटनी को काट डाला, जिसके नतीजे में उन पर अज़ाब आया। हमें चाहिए कि अल्लाह के हुक्मों के सामने सर झुकाएँ, उसके नबियों की तालीमात पर अमल करें और अपनी ज़िद व हठधर्मी से बचें। अल्लाह की रहमत उन्हीं के लिए है जो उसकी बात मानते हैं और उसके दीन की हिफ़ाज़त करते हैं। याद रखिए, अल्लाह का हर हुक्म बंदों की भलाई के लिए होता है, चाहे हमारी समझ में उसकी हिकमत कितनी ही छिपी क्यों न हो।



📜 आयत 26-30 — अल-क़मर

26سَيَعْلَمُونَ غَدًا مَّنِ الْكَذَّابُ الْأَشِرُ
उनको अनक़रीब कल ही मालूम हो जाएगा कि कौन बड़ा झूठा तकब्बुर करने वाला है
27إِنَّا مُرْسِلُو النَّاقَةِ فِتْنَةً لَّهُمْ فَارْتَقِبْهُمْ وَاصْطَبِرْ
(ऐ सालेह) हम उनकी आज़माइश के लिए ऊँटनी भेजने वाले हैं तो तुम उनको देखते रहो और (थोड़ा) सब्र करो
28وَنَبِّئْهُمْ أَنَّ الْمَاءَ قِسْمَةٌ بَيْنَهُمْ ۖ كُلُّ شِرْبٍ مُّحْتَضَرٌ
और उनको ख़बर कर दो कि उनमें पानी की बारी मुक़र्रर कर दी गयी है हर (बारी वाले को अपनी) बारी पर हाज़िर होना चाहिए
29فَنَادَوْا صَاحِبَهُمْ فَتَعَاطَىٰ فَعَقَرَ
तो उन लोगों ने अपने रफीक़ (क़ेदार) को बुलाया तो उसने पकड़ कर (ऊँटनी की) कूंचे काट डालीं
30فَكَيْفَ كَانَ عَذَابِي وَنُذُرِ
तो (देखो) मेरा अज़ाब और डराना कैसा था
अल-क़मरकुरान सूची
55आयत
मक्कीRevelation
28आयत

अनुवाद — अल-क़मर 28

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Tuesday, August 18, 2026

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