अल-क़मर · 26/55
अनुवाद उच्चारण — अल-क़मर
سَيَعْلَمُونَ غَدًا مَّنِ الْكَذَّابُ الْأَشِرُ ۝٢٦
Sa-ya`lamoona ghadam manil kazzaabul ashir
📖 हिंदी अर्थ
उनको अनक़रीब कल ही मालूम हो जाएगा कि कौन बड़ा झूठा तकब्बुर करने वाला है

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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • سَيَعْلَمُونَ – वे शीघ्र ही जान लेंगे।
  • غَدًا – कल (अर्थात् निकट भविष्य में, जब आज़ाब आएगा)।
  • الْكَذَّابُ – झूठा।
  • الأَشِرُ – अत्यधिक घमंडी, सरकश, जो हद से बढ़कर शरारत और ज़ुल्म करे।

तफ़सीर:

यह आयत उन मक्का के काफ़िरों के जवाब में है जिन्होंने नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम का मज़ाक उड़ाते हुए कहा था: "क्या हममें से एक आदमी पर वह़ी (प्रकाशना) उतारी गई?" उन्होंने आपको झूठा और घमंडी कहा। अल्लाह तआला ने फ़रमाया: "वे कल जान लेंगे कि असली झूठा और घमंडी कौन है?"

यहाँ "ग़दन" (कल) से मुराद निकट भविष्य है, यानी जब बद्र के मैदान में उन पर अज़ाब आया, या क़ियामत के दिन जब सब कुछ खुल जाएगा। उस दिन हक़ीक़त सामने आ जाएगी कि सच्चा नबी कौन था और झूठा सरकश कौन था।

इस आयत में अल्लाह तआला ने अपने नबी को तसल्ली दी और काफ़िरों को चेतावनी दी कि उनका मज़ाक़ और इनकार उन्हें अज़ाब से नहीं बचा सकता। सच्चाई हमेशा ऊपर रहती है, चाहे झूठे लोग कितना भी शोर मचाएँ।

यह हमारे लिए सबक़ है कि हमें सच्चाई पर डटे रहना चाहिए, भले ही लोग हँसी उड़ाएँ या झूठा कहें। अल्लाह का वादा है कि सच्चाई की जीत होगी और झूठ का पर्दाफ़ाश होगा। जो लोग अल्लाह के दीन का मज़ाक उड़ाते हैं, उनका अंजाम बुरा होगा, जबकि सच्चे मोमिनों को अल्लाह की मदद और कामयाबी ज़रूर मिलेगी।

याद रखिए, अल्लाह की नज़र में सबसे अच्छा इंसान वह है जो सच्चा हो और अपने घमंड को छोड़कर अल्लाह के आगे झुक जाए। घमंड और झूठ इंसान को बर्बाद कर देते हैं, जबकि सच्चाई और नम्रता इंसान को बुलंदियों तक पहुँचाती है।



📜 आयत 24-28 — अल-क़मर

24فَقَالُوا أَبَشَرًا مِّنَّا وَاحِدًا نَّتَّبِعُهُ إِنَّا إِذًا لَّفِي ضَلَالٍ وَسُعُرٍ
तो कहने लगे कि भला एक आदमी की जो हम ही में से हो उसकी पैरवीं करें ऐसा करें तो गुमराही और दीवानगी में पड़ गए
25أَأُلْقِيَ الذِّكْرُ عَلَيْهِ مِن بَيْنِنَا بَلْ هُوَ كَذَّابٌ أَشِرٌ
क्या हम सबमें बस उसी पर वही नाज़िल हुई है (नहीं) बल्कि ये तो बड़ा झूठा तअल्ली करने वाला है
26سَيَعْلَمُونَ غَدًا مَّنِ الْكَذَّابُ الْأَشِرُ
उनको अनक़रीब कल ही मालूम हो जाएगा कि कौन बड़ा झूठा तकब्बुर करने वाला है
27إِنَّا مُرْسِلُو النَّاقَةِ فِتْنَةً لَّهُمْ فَارْتَقِبْهُمْ وَاصْطَبِرْ
(ऐ सालेह) हम उनकी आज़माइश के लिए ऊँटनी भेजने वाले हैं तो तुम उनको देखते रहो और (थोड़ा) सब्र करो
28وَنَبِّئْهُمْ أَنَّ الْمَاءَ قِسْمَةٌ بَيْنَهُمْ ۖ كُلُّ شِرْبٍ مُّحْتَضَرٌ
और उनको ख़बर कर दो कि उनमें पानी की बारी मुक़र्रर कर दी गयी है हर (बारी वाले को अपनी) बारी पर हाज़िर होना चाहिए
अल-क़मरकुरान सूची
55आयत
मक्कीRevelation
26आयत

अनुवाद — अल-क़मर 26

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Tuesday, August 18, 2026

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