अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- سَيَعْلَمُونَ – वे शीघ्र ही जान लेंगे।
- غَدًا – कल (अर्थात् निकट भविष्य में, जब आज़ाब आएगा)।
- الْكَذَّابُ – झूठा।
- الأَشِرُ – अत्यधिक घमंडी, सरकश, जो हद से बढ़कर शरारत और ज़ुल्म करे।
तफ़सीर:
यह आयत उन मक्का के काफ़िरों के जवाब में है जिन्होंने नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम का मज़ाक उड़ाते हुए कहा था: "क्या हममें से एक आदमी पर वह़ी (प्रकाशना) उतारी गई?" उन्होंने आपको झूठा और घमंडी कहा। अल्लाह तआला ने फ़रमाया: "वे कल जान लेंगे कि असली झूठा और घमंडी कौन है?"
यहाँ "ग़दन" (कल) से मुराद निकट भविष्य है, यानी जब बद्र के मैदान में उन पर अज़ाब आया, या क़ियामत के दिन जब सब कुछ खुल जाएगा। उस दिन हक़ीक़त सामने आ जाएगी कि सच्चा नबी कौन था और झूठा सरकश कौन था।
इस आयत में अल्लाह तआला ने अपने नबी को तसल्ली दी और काफ़िरों को चेतावनी दी कि उनका मज़ाक़ और इनकार उन्हें अज़ाब से नहीं बचा सकता। सच्चाई हमेशा ऊपर रहती है, चाहे झूठे लोग कितना भी शोर मचाएँ।
यह हमारे लिए सबक़ है कि हमें सच्चाई पर डटे रहना चाहिए, भले ही लोग हँसी उड़ाएँ या झूठा कहें। अल्लाह का वादा है कि सच्चाई की जीत होगी और झूठ का पर्दाफ़ाश होगा। जो लोग अल्लाह के दीन का मज़ाक उड़ाते हैं, उनका अंजाम बुरा होगा, जबकि सच्चे मोमिनों को अल्लाह की मदद और कामयाबी ज़रूर मिलेगी।
याद रखिए, अल्लाह की नज़र में सबसे अच्छा इंसान वह है जो सच्चा हो और अपने घमंड को छोड़कर अल्लाह के आगे झुक जाए। घमंड और झूठ इंसान को बर्बाद कर देते हैं, जबकि सच्चाई और नम्रता इंसान को बुलंदियों तक पहुँचाती है।
📜 आयत 24-28 — अल-क़मर
अनुवाद — अल-क़मर 26
सूरा अल-क़मर आयत 26 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : उनको अनक़रीब कल ही मालूम हो जाएगा कि कौन बड़ा…सूरा आयत 26/55 — अल-क़मर القمر (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-क़मर सुनें, अल-क़मर अनुवाद, अल-क़मर mp3, अल-क़मर pdf. आयत 24–28. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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