अर-रहमान · 52/78
अनुवाद उच्चारण — सूरा अर-रहमान
فِيهِمَا مِن كُلِّ فَاكِهَةٍ زَوْجَانِ ۝٥٢
Feehimaa min kulli faakihatin zawjaan
📖 हिंदी अर्थ
इन दोनों बाग़ों में सब मेवे दो दो किस्म के होंगे

M Mishary Rashid Alafasy ✓
M Mahmoud Khalil Al-Husary ✓
A Abdurrahman As-Sudais ✓
M Mohamed Siddiq Al-Minshawi ✓
A Abdul Basit Abdul Samad ✓
A Ali Al-Hudhaify ✓
A Ahmed ibn Ali al-Ajamy ✓
A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
M Muhammad Ayyoub ✓
A Abdullah Basfar ✓
A Abdullah Al-Juhani ✓
M Maher Al Muaiqly ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • فِيهِمَا: उन दोनों जन्नतों में
  • مِن كُلِّ فَاكِهَةٍ: हर प्रकार के फल में से
  • زَوْجَانِ: दो प्रकार (दो क़िस्में)

तफ़सीर:

अल्लाह तआला ने अपने नेक बंदों के लिए जो दो जन्नतें तैयार की हैं, उनमें हर प्रकार के फल की दो-दो क़िस्में होंगी। एक ही फल की दो अलग-अलग प्रजातियाँ होंगी—एक ताज़ा और रसीला, दूसरा सूखा और मीठा, या एक सफ़ेद और दूसरा लाल, या एक छोटा और दूसरा बड़ा। यानी हर फल अपनी दो शक्लों और दो लज़्ज़तों के साथ मौजूद होगा, ताकि जन्नतियों का आनंद दोगुना हो जाए और उन्हें कभी एकरसता महसूस न हो।

यह अल्लाह की उस असीम रहमत और करम का प्रत्यक्ष प्रमाण है कि उसने अपने बंदों के लिए ऐसी जन्नतें बनाई हैं जिनमें हर चीज़ की दो-दो क़िस्में हैं। दुनिया में इंसान को किसी फल का एक ही स्वाद मिलता है, लेकिन जन्नत में अल्लाह ने हर फल को दो रूपों में पैदा किया है—एक ताज़ा और रसीला, दूसरा सूखा और मीठा—ताकि हर पल नई लज़्ज़त और नया आनंद मिले।

प्यारे भाइयो और बहनो! यह आयत हमें बताती है कि अल्लाह की नेमतें कितनी बेहिसाब हैं। जब हम दुनिया में किसी फल का स्वाद लेते हैं, तो हमें याद रखना चाहिए कि यह तो उस जन्नत की एक झलक मात्र है जो अल्लाह ने अपने मोमिन बंदों के लिए तैयार की है। जो लोग दुनिया में अल्लाह की इबादत करते हैं, उसके हुक्मों का पालन करते हैं और उसके रसूल ﷺ की सुन्नत पर चलते हैं, उनके लिए यही जन्नतें हैं।

अल्लाह तआला ने इस आयत में "زَوْجَانِ" (दो प्रकार) कहकर हमें बताया कि जन्नत की नेमतें सिर्फ एक ही तरह की नहीं होंगी, बल्कि हर चीज़ में विविधता और किस्में होंगी। यह अल्लाह की रहमत का कमाल है कि वह अपने बंदों को कभी ऊबने नहीं देगा, बल्कि हर पल नई ख़ुशी और नए सुख से भर देगा।

आओ, हम सब इस नेमत को पाने के लिए अपने ईमान को मज़बूत करें, नेक अमल करें और अल्लाह से उसकी जन्नत की दुआ माँगते रहें। यक़ीनन अल्लाह अपने रहम करने वालों पर बहुत करम करने वाला है।



📜 आयत 50-54 — सूरा अर-रहमान

50فِيهِمَا عَيْنَانِ تَجْرِيَانِ
इन दोनों में दो चश्में जारी होंगें
51فَبِأَيِّ آلَاءِ رَبِّكُمَا تُكَذِّبَانِ
तो तुम दोनों अपने परवरदिगार की किस किस नेअमत से मुकरोगे
52فِيهِمَا مِن كُلِّ فَاكِهَةٍ زَوْجَانِ
इन दोनों बाग़ों में सब मेवे दो दो किस्म के होंगे
53فَبِأَيِّ آلَاءِ رَبِّكُمَا تُكَذِّبَانِ
तुम दोनों अपने परवरदिगार की किस किस नेअमत से इन्कार करोगे
54مُتَّكِئِينَ عَلَىٰ فُرُشٍ بَطَائِنُهَا مِنْ إِسْتَبْرَقٍ ۚ وَجَنَى الْجَنَّتَيْنِ دَانٍ
यह लोग उन फ़र्शों पर जिनके असतर अतलस के होंगे तकिये लगाकर बैठे होंगे तो दोनों बाग़ों के मेवे (इस क़दर) क़रीब होंगे (कि अगर चाहे तो लगे हुए खालें)
अर-रहमानकुरान सूची
78आयत
मदनीअवतरण स्थान
52आयत

अनुवाद — अर-रहमान 52

सूरा अर-रहमान आयत 52 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : इन दोनों बाग़ों में सब मेवे दो दो किस्म के…

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Monday, September 28, 2026

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