Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- تَوَلَّوْا — दोस्ती की, संबंध जोड़ा, साथ दिया।
- غَضِبَ اللَّهُ عَلَيْهِم — जिन पर अल्लाह का क्रोध हुआ (यहूदी)।
- مَا هُم مِّنكُمْ وَلَا مِنْهُمْ — वे न तो तुम में से हैं और न ही उन (यहूदियों) में से।
- يَحْلِفُونَ عَلَى الْكَذِبِ — झूठी क़समें खाते हैं।
- وَهُمْ يَعْلَمُونَ — हालाँकि वे जानते हैं (कि वे झूठे हैं)।
तफ़सीर (व्याख्या):
ऐ नबी! क्या आपने उन मुनाफ़िक़ों (दोमुंहे लोगों) की हालत नहीं देखी जिन्होंने उन लोगों (यहूदियों) से दोस्ती और वफ़ादारी का रिश्ता जोड़ा, जिन पर अल्लाह का क्रोध नाज़िल हुआ? ये मुनाफ़िक़ न तो असल में तुम्हारे साथी हैं — क्योंकि उनके दिल ईमान से खाली हैं — और न ही उन यहूदियों में से हैं, क्योंकि वे उनके धर्म को भी नहीं मानते। वे एक अजीब सी उलझन में फँसे हुए हैं — न इस तरफ़ के, न उस तरफ़ के।
फिर भी वे कसमें खाते हैं कि "हम मुसलमान हैं" और "हमने मुसलमानों की बातें यहूदियों तक नहीं पहुँचाईं", जबकि वे ख़ूब जानते हैं कि वे झूठ बोल रहे हैं। उनकी ज़ुबान पर ईमान के दावे हैं, लेकिन उनके दिल झूठ और धोखे से भरे हैं।
यह आयत हमें सिखाती है कि मुनाफ़िक़ी (दोमुंहापन) सबसे बड़ी बीमारी है — इंसान बाहर से कुछ और दिखाए और अंदर से कुछ और हो। अल्लाह ने हमें साफ़ कर दिया है कि सच्चा ईमान सिर्फ़ ज़ुबान से नहीं, बल्कि दिल और अमल से होता है।
इस आयत से हमें यह सबक़ मिलता है कि हमें अपने रिश्तों में सच्चाई और वफ़ादारी अपनानी चाहिए। किसी ऐसे गिरोह से दोस्ती न करें जो अल्लाह के क्रोध का शिकार हो, और न ही अपने ईमान को छिपाकर दुनिया की ख़ातिर झूठी कसमें खाएँ। अल्लाह हर उस चीज़ को जानता है जो हमारे दिलों में है — वह झूठी कसमों और दिखावे से बेख़बर नहीं है।
याद रखिए! अल्लाह के नबी और उनके सच्चे पैरोकारों का रास्ता सीधा और साफ़ है — सच्चाई, ईमानदारी और अल्लाह की रज़ा की तलब। यही रास्ता दुनिया और आख़िरत की कामयाबी की तरफ़ ले जाता है।
📜 आयत 12-16 — सूरा अल-मुजादिला
अनुवाद — अल-मुजादिला 14
सूरा अल-मुजादिला आयत 14 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : क्या तुमने उन लोगों की हालत पर ग़ौर नहीं किया…सूरा आयत 14/22 — सूरा अल-मुजादिला المجادلة (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अल-मुजादिला सुनें, सूरा अल-मुजादिला अनुवाद, सूरा अल-मुजादिला mp3, सूरा अल-मुजादिला pdf. आयत 12–16. हिंदी अर्थ: اردو.
सूरा अल-मुजादिला
पवित्र क़ुरआन
Friday, October 2, 2026
अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए


