अल-मुजादिला · 14/22
अनुवाद उच्चारण — अल-मुजादिला
۞ أَلَمْ تَرَ إِلَى الَّذِينَ تَوَلَّوْا قَوْمًا غَضِبَ اللَّهُ عَلَيْهِم مَّا هُم مِّنكُمْ وَلَا مِنْهُمْ وَيَحْلِفُونَ عَلَى الْكَذِبِ وَهُمْ يَعْلَمُونَ ۝١٤
Alam tara ilal lazeena tawallaw qawman ghadibal laahu `alaihim maa hum minkum wa laa minhum wa yahlifoona `alal kazibi wa hum ya`lamoon
📖 हिंदी अर्थ
क्या तुमने उन लोगों की हालत पर ग़ौर नहीं किया जो उन लोगों से दोस्ती करते हैं जिन पर ख़ुदा ने ग़ज़ब ढाया है तो अब वह न तुम मे हैं और न उनमें ये लोग जानबूझ कर झूठी बातो पर क़समें खाते हैं और वह जानते हैं
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • تَوَلَّوْا — दोस्ती की, संबंध जोड़ा, साथ दिया।
  • غَضِبَ اللَّهُ عَلَيْهِم — जिन पर अल्लाह का क्रोध हुआ (यहूदी)।
  • مَا هُم مِّنكُمْ وَلَا مِنْهُمْ — वे न तो तुम में से हैं और न ही उन (यहूदियों) में से।
  • يَحْلِفُونَ عَلَى الْكَذِبِ — झूठी क़समें खाते हैं।
  • وَهُمْ يَعْلَمُونَ — हालाँकि वे जानते हैं (कि वे झूठे हैं)।

तफ़सीर (व्याख्या):

ऐ नबी! क्या आपने उन मुनाफ़िक़ों (दोमुंहे लोगों) की हालत नहीं देखी जिन्होंने उन लोगों (यहूदियों) से दोस्ती और वफ़ादारी का रिश्ता जोड़ा, जिन पर अल्लाह का क्रोध नाज़िल हुआ? ये मुनाफ़िक़ न तो असल में तुम्हारे साथी हैं — क्योंकि उनके दिल ईमान से खाली हैं — और न ही उन यहूदियों में से हैं, क्योंकि वे उनके धर्म को भी नहीं मानते। वे एक अजीब सी उलझन में फँसे हुए हैं — न इस तरफ़ के, न उस तरफ़ के।

फिर भी वे कसमें खाते हैं कि "हम मुसलमान हैं" और "हमने मुसलमानों की बातें यहूदियों तक नहीं पहुँचाईं", जबकि वे ख़ूब जानते हैं कि वे झूठ बोल रहे हैं। उनकी ज़ुबान पर ईमान के दावे हैं, लेकिन उनके दिल झूठ और धोखे से भरे हैं।

यह आयत हमें सिखाती है कि मुनाफ़िक़ी (दोमुंहापन) सबसे बड़ी बीमारी है — इंसान बाहर से कुछ और दिखाए और अंदर से कुछ और हो। अल्लाह ने हमें साफ़ कर दिया है कि सच्चा ईमान सिर्फ़ ज़ुबान से नहीं, बल्कि दिल और अमल से होता है।

इस आयत से हमें यह सबक़ मिलता है कि हमें अपने रिश्तों में सच्चाई और वफ़ादारी अपनानी चाहिए। किसी ऐसे गिरोह से दोस्ती न करें जो अल्लाह के क्रोध का शिकार हो, और न ही अपने ईमान को छिपाकर दुनिया की ख़ातिर झूठी कसमें खाएँ। अल्लाह हर उस चीज़ को जानता है जो हमारे दिलों में है — वह झूठी कसमों और दिखावे से बेख़बर नहीं है।

याद रखिए! अल्लाह के नबी और उनके सच्चे पैरोकारों का रास्ता सीधा और साफ़ है — सच्चाई, ईमानदारी और अल्लाह की रज़ा की तलब। यही रास्ता दुनिया और आख़िरत की कामयाबी की तरफ़ ले जाता है।

🎧 सुनें

📜 आयत 12-16 — अल-मुजादिला

12يَا أَيُّهَا الَّذِينَ آمَنُوا إِذَا نَاجَيْتُمُ الرَّسُولَ فَقَدِّمُوا بَيْنَ يَدَيْ نَجْوَاكُمْ صَدَقَةً ۚ ذَٰلِكَ خَيْرٌ لَّكُمْ وَأَطْهَرُ ۚ فَإِن لَّمْ تَجِدُوا فَإِنَّ اللَّهَ غَفُورٌ رَّحِيمٌ
ऐ ईमानदारों जब पैग़म्बर से कोई बात कान में कहनी चाहो तो कुछ ख़ैरात अपनी सरगोशी से पहले दे दिया करो यही तुम्हारे वास्ते बेहतर और पाकीज़ा बात है पस अगर तुमको इसका मुक़दूर न हो तो बेशक ख़ुदा बड़ा बख्शने वाला मेहरबान है
13أَأَشْفَقْتُمْ أَن تُقَدِّمُوا بَيْنَ يَدَيْ نَجْوَاكُمْ صَدَقَاتٍ ۚ فَإِذْ لَمْ تَفْعَلُوا وَتَابَ اللَّهُ عَلَيْكُمْ فَأَقِيمُوا الصَّلَاةَ وَآتُوا الزَّكَاةَ وَأَطِيعُوا اللَّهَ وَرَسُولَهُ ۚ وَاللَّهُ خَبِيرٌ بِمَا تَعْمَلُونَ
(मुसलमानों) क्या तुम इस बात से डर गए कि (रसूल के) कान में बात कहने से पहले ख़ैरात कर लो तो जब तुम लोग (इतना सा काम) न कर सके और ख़ुदा ने तुम्हें माफ़ कर दिया तो पाबन्दी से नमाज़ पढ़ो और ज़कात देते रहो और ख़ुदा उसके रसूल की इताअत करो और जो कुछ तुम करते हो ख़ुदा उससे बाख़बर है
14۞ أَلَمْ تَرَ إِلَى الَّذِينَ تَوَلَّوْا قَوْمًا غَضِبَ اللَّهُ عَلَيْهِم مَّا هُم مِّنكُمْ وَلَا مِنْهُمْ وَيَحْلِفُونَ عَلَى الْكَذِبِ وَهُمْ يَعْلَمُونَ
क्या तुमने उन लोगों की हालत पर ग़ौर नहीं किया जो उन लोगों से दोस्ती करते हैं जिन पर ख़ुदा ने ग़ज़ब ढाया है तो अब वह न तुम मे हैं और न उनमें ये लोग जानबूझ कर झूठी बातो पर क़समें खाते हैं और वह जानते हैं
15أَعَدَّ اللَّهُ لَهُمْ عَذَابًا شَدِيدًا ۖ إِنَّهُمْ سَاءَ مَا كَانُوا يَعْمَلُونَ
ख़ुदा ने उनके लिए सख्त अज़ाब तैयार कर रखा है इसमें शक़ नहीं कि ये लोग जो कुछ करते हैं बहुत ही बुरा है
16اتَّخَذُوا أَيْمَانَهُمْ جُنَّةً فَصَدُّوا عَن سَبِيلِ اللَّهِ فَلَهُمْ عَذَابٌ مُّهِينٌ
उन लोगों ने अपनी क़समों को सिपर बना लिया है और (लोगों को) ख़ुदा की राह से रोक दिया तो उनके लिए रूसवा करने वाला अज़ाब है
अल-मुजादिलाकुरान सूची
22आयत
मदनीRevelation
14आयत

अनुवाद — अल-मुजादिला 14

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Tuesday, August 18, 2026

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