अल-अनआम · 143/165
अनुवाद उच्चारण — अल-अनआम
ثَمَانِيَةَ أَزْوَاجٍ ۖ مِّنَ الضَّأْنِ اثْنَيْنِ وَمِنَ الْمَعْزِ اثْنَيْنِ ۗ قُلْ آلذَّكَرَيْنِ حَرَّمَ أَمِ الْأُنثَيَيْنِ أَمَّا اشْتَمَلَتْ عَلَيْهِ أَرْحَامُ الْأُنثَيَيْنِ ۖ نَبِّئُونِي بِعِلْمٍ إِن كُنتُمْ صَادِقِينَ ۝١٤٣
Samaaniyata azwaaj minad daanis naini wa minal ma`zis nain; qul `aazzaka raini harrama amil unsaiyayni ammash tamalat `alaihi arhaamul unsayaini nabbi `oonee bi`ilmin in kuntum saadiqeen
📖 हिंदी अर्थ
(क्यों कि) वह तो यक़ीनन तुम्हारा खुला हुआ दुश्मन है (ख़ुदा ने नर मादा मिलाकर) आठ (क़िस्म के) जोड़े पैदा किए हैं - भेड़ से (नर मादा) दो और बकरी से (नर मादा) दो (ऐ रसूल उन काफिरों से) पूछो तो कि ख़ुदा ने (उन दोनों भेड़ बकरी के) दोनों नरों को हराम कर दिया है या उन दोनों मादनियों को या उस बच्चे को जो उन दोनों मादनियों के पेट से अन्दर लिए हुए हैं
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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • अज़वाज (जोड़े): नर और मादा।
  • ज़अ्न (भेड़): ऊन वाली भेड़ें।
  • मअ्ज़ (बकरी): बाल वाली बकरियाँ।
  • इश्तमलत (शामिल होना): अपने भीतर समेट लेना, यानी गर्भ में पलना।
  • अरहाम (गर्भाशय): माँ के पेट के अंदर का स्थान जहाँ बच्चा पलता है।
  • नब्बिऊनी (मुझे बताओ): मुझे खबर दो।

तफ़सीर (व्याख्या):

अल्लाह तआला ने अपनी असीम रहमत से इंसानों के लिए चौपायों (जानवरों) की आठ क़िस्में पैदा कीं, जिनसे वे लाभ उठाएँ। ये आठ जोड़े इस प्रकार हैं: भेड़ से दो (नर और मादा), बकरी से दो (नर और मादा), ऊँट से दो (नर और मादा), और गाय से दो (नर और मादा)। ये सब जानवर इंसान के लिए पैदा किए गए हैं, ताकि उनका दूध, मांस, ऊन और सवारी से फ़ायदा उठाया जाए।

इस आयत में अल्लाह तआला मुशरिकों (बुतपरस्तों) से सवाल करता है, जो अपनी मनमानी से कुछ जानवरों को हराम (वर्जित) ठहरा लेते थे। उनसे कहा गया: "बताओ, अल्लाह ने भेड़ और बकरी के नर को हराम किया है या मादा को? या फिर उस बच्चे को हराम किया है जो मादा के पेट में होता है?" यानी तुम्हारी यह मनमानी किस दलील पर आधारित है? अगर तुम कहते हो कि अल्लाह ने नर को हराम किया है, तो तुम खुद नर को क्यों खाते हो? और अगर मादा को हराम कहते हो, तो तुम मादा को क्यों खाते हो? और अगर पेट के बच्चे को हराम कहते हो, तो कभी तुम उसे भी खा लेते हो। यानी तुम्हारा कोई सिद्धांत नहीं है, बस अपनी इच्छा से चीज़ों को हराम-हलाल ठहराते हो।

अल्लाह तआला उनसे कहता है: "अगर तुम सच्चे हो, तो कोई ठोस इल्म (ज्ञान) और सबूत पेश करो जो यह साबित करे कि अल्लाह ने सचमुच इन्हें हराम किया है।" यह एक चुनौती है जो उनके झूठ को बेनकाब करती है, क्योंकि उनके पास कोई दलील नहीं थी, सिर्फ अंधविश्वास और पुरखों की नकल थी।

दावती पहलू (प्रचारात्मक पहलू):

यह आयत हमें सिखाती है कि इस्लाम में हराम-हलाल का आधार अल्लाह की वही (प्रकाशना) है, न कि इंसान की मनमानी। अल्लाह तआला ने हमारे लिए पाक और अच्छी चीज़ें हलाल कीं और गंदी चीज़ें हराम कीं। यह अल्लाह की रहमत है कि उसने हमारे लिए चौपायों को पैदा किया और उन्हें हलाल किया, ताकि हम उनसे लाभ उठाएँ और उसका शुक्र अदा करें। इस आयत से हमें यह सबक मिलता है कि हम अपने जीवन में किसी भी चीज़ को बिना अल्लाह की वही के हराम या हलाल न ठहराएँ। इस्लाम एक आसान और फ़ितरत (प्राकृतिक) के अनुरूप दीन है, जो हमें बोझ में नहीं डालता बल्कि आराम और सहूलियत देता है। अल्लाह की नेमतों को पहचानें और उसका शुक्र अदा करें, क्योंकि शुक्र अदा करने से नेमतें बढ़ती हैं।

🎧 सुनें

📜 आयत 141-145 — अल-अनआम

141۞ وَهُوَ الَّذِي أَنشَأَ جَنَّاتٍ مَّعْرُوشَاتٍ وَغَيْرَ مَعْرُوشَاتٍ وَالنَّخْلَ وَالزَّرْعَ مُخْتَلِفًا أُكُلُهُ وَالزَّيْتُونَ وَالرُّمَّانَ مُتَشَابِهًا وَغَيْرَ مُتَشَابِهٍ ۚ كُلُوا مِن ثَمَرِهِ إِذَا أَثْمَرَ وَآتُوا حَقَّهُ يَوْمَ حَصَادِهِ ۖ وَلَا تُسْرِفُوا ۚ إِنَّهُ لَا يُحِبُّ الْمُسْرِفِينَ
और वह तो वही ख़ुदा है जिसने बहुतेरे बाग़ पैदा किए (जिनमें मुख्तलिफ दरख्त हैं - कुछ तो अंगूर की तरह टट्टियों पर) चढ़ाए हुए और (कुछ) बे चढ़ाए हुए और खजूर के दरख्त और खेती जिसमें फल मुख्तलिफ़ किस्म के हैं और ज़ैतून और अनार बाज़ तो सूरत रंग मज़े में, मिलते जुलते और (बाज़) बेमेल (लोगों) जब ये चीज़े फलें तो उनका फल खाओ और उन चीज़ों के काटने के दिन ख़ुदा का हक़ (ज़कात) दे दो और ख़बरदार फज़ूल ख़र्ची न करो - क्यों कि वह (ख़ुदा) फुज़ूल ख़र्चे से हरगिज़ उलफत नहीं रखता
142وَمِنَ الْأَنْعَامِ حَمُولَةً وَفَرْشًا ۚ كُلُوا مِمَّا رَزَقَكُمُ اللَّهُ وَلَا تَتَّبِعُوا خُطُوَاتِ الشَّيْطَانِ ۚ إِنَّهُ لَكُمْ عَدُوٌّ مُّبِينٌ
और चारपायों में से कुछ तो बोझ उठाने वाले (बड़े बड़े) और कुछ ज़मीन से लगे हुए (छोटे छोटे) पैदा किए ख़ुदा ने जो तुम्हें रोज़ी दी है उस में से खाओ और शैतान के क़दम ब क़दम न चलो
143ثَمَانِيَةَ أَزْوَاجٍ ۖ مِّنَ الضَّأْنِ اثْنَيْنِ وَمِنَ الْمَعْزِ اثْنَيْنِ ۗ قُلْ آلذَّكَرَيْنِ حَرَّمَ أَمِ الْأُنثَيَيْنِ أَمَّا اشْتَمَلَتْ عَلَيْهِ أَرْحَامُ الْأُنثَيَيْنِ ۖ نَبِّئُونِي بِعِلْمٍ إِن كُنتُمْ صَادِقِينَ
(क्यों कि) वह तो यक़ीनन तुम्हारा खुला हुआ दुश्मन है (ख़ुदा ने नर मादा मिलाकर) आठ (क़िस्म के) जोड़े पैदा किए हैं - भेड़ से (नर मादा) दो और बकरी से (नर मादा) दो (ऐ रसूल उन काफिरों से) पूछो तो कि ख़ुदा ने (उन दोनों भेड़ बकरी के) दोनों नरों को हराम कर दिया है या उन दोनों मादनियों को या उस बच्चे को जो उन दोनों मादनियों के पेट से अन्दर लिए हुए हैं
144وَمِنَ الْإِبِلِ اثْنَيْنِ وَمِنَ الْبَقَرِ اثْنَيْنِ ۗ قُلْ آلذَّكَرَيْنِ حَرَّمَ أَمِ الْأُنثَيَيْنِ أَمَّا اشْتَمَلَتْ عَلَيْهِ أَرْحَامُ الْأُنثَيَيْنِ ۖ أَمْ كُنتُمْ شُهَدَاءَ إِذْ وَصَّاكُمُ اللَّهُ بِهَٰذَا ۚ فَمَنْ أَظْلَمُ مِمَّنِ افْتَرَىٰ عَلَى اللَّهِ كَذِبًا لِّيُضِلَّ النَّاسَ بِغَيْرِ عِلْمٍ ۗ إِنَّ اللَّهَ لَا يَهْدِي الْقَوْمَ الظَّالِمِينَ
अगर तुम सच्चे हो तो ज़रा समझ के मुझे बताओ और ऊँट के (नर मादा) दो और गाय के (नर मादा) दो (ऐ रसूल तुम उनसे) पूछो कि ख़ुदा ने उन दोनों (ऊँट गाय के) नरों को हराम किया या दोनों मादनियोंको या उस बच्चे को जो दोनों मादनियों के पेट अपने अन्दर लिये हुए है क्या जिस वक्त ख़ुदा ने तुमको उसका हुक्म दिया था तुम उस वक्त मौजूद थे फिर जो ख़ुदा पर झूठ बोताहन बॉधे उससे ज्यादा ज़ालिम कौन होगा ताकि लोगों के वे समझे बूझे गुमराह करें ख़ुदा हरगिज़ ज़ालिम क़ौम में मंज़िले मक़सूद तक नहीं पहुचाता
145قُل لَّا أَجِدُ فِي مَا أُوحِيَ إِلَيَّ مُحَرَّمًا عَلَىٰ طَاعِمٍ يَطْعَمُهُ إِلَّا أَن يَكُونَ مَيْتَةً أَوْ دَمًا مَّسْفُوحًا أَوْ لَحْمَ خِنزِيرٍ فَإِنَّهُ رِجْسٌ أَوْ فِسْقًا أُهِلَّ لِغَيْرِ اللَّهِ بِهِ ۚ فَمَنِ اضْطُرَّ غَيْرَ بَاغٍ وَلَا عَادٍ فَإِنَّ رَبَّكَ غَفُورٌ رَّحِيمٌ
(ऐ रसूल) तुम कहो कि मै तो जो (क़ुरान) मेरे पास वही के तौर पर आया है उसमें कोई चीज़ किसी खाने वाले पर जो उसको खाए हराम नहीं पाता मगर जबकि वह मुर्दा या बहता हुआ ख़़ून या सूअर का गोश्त हो तो बेशक ये (चीजे) नापाक और हराम हैं या (वह जानवर) नाफरमानी का बाएस हो कि (वक्ते ़ज़िबहा) ख़ुदा के सिवा किसी और का नाम लिया गया हो फिर जो शख्स (हर तरह) बेबस हो जाए (और) नाफरमान व सरकश न हो और इस हालत में खाए तो अलबत्ता तुम्हारा परवरदिगार बड़ा बख्शने वाला मेहरबान है
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अनुवाद — अल-अनआम 143

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Tuesday, August 18, 2026

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