अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- अज़वाज (जोड़े): नर और मादा।
- ज़अ्न (भेड़): ऊन वाली भेड़ें।
- मअ्ज़ (बकरी): बाल वाली बकरियाँ।
- इश्तमलत (शामिल होना): अपने भीतर समेट लेना, यानी गर्भ में पलना।
- अरहाम (गर्भाशय): माँ के पेट के अंदर का स्थान जहाँ बच्चा पलता है।
- नब्बिऊनी (मुझे बताओ): मुझे खबर दो।
तफ़सीर (व्याख्या):
अल्लाह तआला ने अपनी असीम रहमत से इंसानों के लिए चौपायों (जानवरों) की आठ क़िस्में पैदा कीं, जिनसे वे लाभ उठाएँ। ये आठ जोड़े इस प्रकार हैं: भेड़ से दो (नर और मादा), बकरी से दो (नर और मादा), ऊँट से दो (नर और मादा), और गाय से दो (नर और मादा)। ये सब जानवर इंसान के लिए पैदा किए गए हैं, ताकि उनका दूध, मांस, ऊन और सवारी से फ़ायदा उठाया जाए।
इस आयत में अल्लाह तआला मुशरिकों (बुतपरस्तों) से सवाल करता है, जो अपनी मनमानी से कुछ जानवरों को हराम (वर्जित) ठहरा लेते थे। उनसे कहा गया: "बताओ, अल्लाह ने भेड़ और बकरी के नर को हराम किया है या मादा को? या फिर उस बच्चे को हराम किया है जो मादा के पेट में होता है?" यानी तुम्हारी यह मनमानी किस दलील पर आधारित है? अगर तुम कहते हो कि अल्लाह ने नर को हराम किया है, तो तुम खुद नर को क्यों खाते हो? और अगर मादा को हराम कहते हो, तो तुम मादा को क्यों खाते हो? और अगर पेट के बच्चे को हराम कहते हो, तो कभी तुम उसे भी खा लेते हो। यानी तुम्हारा कोई सिद्धांत नहीं है, बस अपनी इच्छा से चीज़ों को हराम-हलाल ठहराते हो।
अल्लाह तआला उनसे कहता है: "अगर तुम सच्चे हो, तो कोई ठोस इल्म (ज्ञान) और सबूत पेश करो जो यह साबित करे कि अल्लाह ने सचमुच इन्हें हराम किया है।" यह एक चुनौती है जो उनके झूठ को बेनकाब करती है, क्योंकि उनके पास कोई दलील नहीं थी, सिर्फ अंधविश्वास और पुरखों की नकल थी।
दावती पहलू (प्रचारात्मक पहलू):
यह आयत हमें सिखाती है कि इस्लाम में हराम-हलाल का आधार अल्लाह की वही (प्रकाशना) है, न कि इंसान की मनमानी। अल्लाह तआला ने हमारे लिए पाक और अच्छी चीज़ें हलाल कीं और गंदी चीज़ें हराम कीं। यह अल्लाह की रहमत है कि उसने हमारे लिए चौपायों को पैदा किया और उन्हें हलाल किया, ताकि हम उनसे लाभ उठाएँ और उसका शुक्र अदा करें। इस आयत से हमें यह सबक मिलता है कि हम अपने जीवन में किसी भी चीज़ को बिना अल्लाह की वही के हराम या हलाल न ठहराएँ। इस्लाम एक आसान और फ़ितरत (प्राकृतिक) के अनुरूप दीन है, जो हमें बोझ में नहीं डालता बल्कि आराम और सहूलियत देता है। अल्लाह की नेमतों को पहचानें और उसका शुक्र अदा करें, क्योंकि शुक्र अदा करने से नेमतें बढ़ती हैं।
📜 आयत 141-145 — अल-अनआम
अनुवाद — अल-अनआम 143
सूरा अल-अनआम आयत 143 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : (क्यों कि) वह तो यक़ीनन तुम्हारा खुला हुआ दुश्मन है…सूरा आयत 143/165 — अल-अनआम الأنعام (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-अनआम सुनें, अल-अनआम अनुवाद, अल-अनआम mp3, अल-अनआम pdf. आयत 141–145. हिंदी अर्थ: اردو.
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Tuesday, August 18, 2026
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