hal yanzuroona illaaa an taatiyahumul malaaa`ikatu aw yaatiya Rabbuka aw yaatiya ba`du Aayaati Rabbik; yawma yaatee ba`du Aayaati Rabbika laa yanfa`u nafsan eemaanuhaa lam takun aamanat min qablu aw kasabat feee eemaanihaa khairaa; qulin tazirooo innaa muntaziroon
📖 अनुवाद (हिंदी अर्थ)
📖 हिंदी अर्थ
या तुम्हारा परवरदिगार खुद (तुम्हारे पास) आये या तुम्हारे परवरदिगार की कुछ निशानियाँ आ जाएं (आख़िरकार क्योकर समझाया जाए) हालांकि जिस दिन तुम्हारे परवरदिगार की बाज़ निशानियाँ आ जाएंगी तो जो शख्स पहले से ईमान नहीं लाया होगा या अपने मोमिन होने की हालत में कोई नेक काम नहीं किया होगा तो अब उसका ईमान लाना उसको कुछ भी मुफ़ीद न होगा - (ऐ रसूल) तुम (उनसे) कह दो कि (अच्छा यही सही) तुम (भी) इन्तिज़ार करो हम भी इन्तिज़ार करते हैं
🌐 Additional reference in اردو
🌐 اردو
یہ اس کے سوا اور کس بات کے منتظر ہیں کہ ان کے پاس فرشتے آئیں یا خود تمہارا پروردگار آئے یا تمہارے پروردگار کی کچھ نشانیاں آئیں (مگر) جس روز تمہارے پروردگار کی کچھ نشانیاں آ جائیں گی تو جو شخص پہلے ایمان نہیں لایا ہوگا اس وقت اسے ایمان لانا کچھ فائدہ نہیں دے گا یا اپنے ایمان (کی حالت) میں نیک عمل نہیں کئے ہوں گے (تو گناہوں سے توبہ کرنا مفید نہ ہوگا اے پیغمبر ان سے) کہہ دو کہ تم بھی انتظار کرو ہم بھی انتظار کرتے ہیں
या तुम्हारा परवरदिगार खुद (तुम्हारे पास) आये या तुम्हारे परवरदिगार की कुछ निशानियाँ आ जाएं (आख़िरकार क्योकर समझाया जाए) हालांकि जिस दिन तुम्हारे परवरदिगार की बाज़ निशानियाँ आ जाएंगी तो जो शख्स पहले से ईमान नहीं लाया होगा या अपने मोमिन होने की हालत में कोई नेक काम नहीं किया होगा तो अब उसका ईमान लाना उसको कुछ भी मुफ़ीद न होगा - (ऐ रसूल) तुम (उनसे) कह दो कि (अच्छा यही सही) तुम (भी) इन्तिज़ार करो हम भी इन्तिज़ार करते हैं
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
هَلْ يَنظُرُونَ: क्या वे प्रतीक्षा कर रहे हैं?
تَأْتِيَهُمُ الْمَلَائِكَةُ: उनके पास फ़रिश्ते आएँ (रूह क़ब्ज़ करने के लिए)
يَأْتِيَ رَبُّكَ: तेरा रब आए (फ़ैसले के दिन)
بَعْضُ آيَاتِ رَبِّكَ: तेरे रब की कुछ निशानियाँ (क़ियामत की बड़ी निशानियाँ, जैसे सूरज का पश्चिम से निकलना)
لَا يَنفَعُ نَفْسًا إِيمَانُهَا: किसी जान को उसका ईमान लाभ नहीं देगा
كَسَبَتْ فِي إِيمَانِهَا خَيْرًا: अपने ईमान में नेकी कमाई हो (पहले से नेक अमल किया हो)
قُلِ انتَظِرُوا: कह दो, तुम प्रतीक्षा करो
إِنَّا مُنتَظِرُونَ: हम भी प्रतीक्षा कर रहे हैं
तफ़सीर (व्याख्या):
ये आयत उन लोगों के बारे में है जो हक़ को ठुकराते हैं और रसूल की दावत को नहीं मानते। अल्लाह तआला फ़रमाता है कि ये लोग किस चीज़ का इंतज़ार कर रहे हैं? क्या ये सिर्फ़ इस बात का इंतज़ार कर रहे हैं कि:
उनके पास फ़रिश्ते आएँ — यानी मौत का फ़रिश्ता और उसके साथी उनकी रूह क़ब्ज़ करने के लिए आएँ, तो वे ईमान लाएँगे? ये बिल्कुल बेकार है, क्योंकि मौत के वक़्त ईमान लाना किसी काम का नहीं होता।
या तेरा रब आए — यानी क़ियामत के दिन अल्लाह तआला फ़ैसले के लिए आए, जब वे अपनी आँखों से सब कुछ देख लेंगे। उस वक़्त ईमान लाने का कोई फ़ायदा नहीं होगा।
या तेरे रब की कुछ निशानियाँ आएँ — यानी क़ियामत की बड़ी निशानियाँ, जिनमें से एक सूरज का पश्चिम से निकलना है। जब ये निशानियाँ दिख जाएँगी, तो ईमान का दरवाज़ा बंद कर दिया जाएगा।
फिर अल्लाह फ़रमाता है: जिस दिन तेरे रब की कुछ निशानियाँ आ जाएँगी, उस दिन किसी जान को उसका ईमान लाभ नहीं देगा जो पहले ईमान नहीं लाई थी, या जिसने अपने ईमान में (पहले) नेकी नहीं कमाई थी। यानी दो तरह के लोग उस दिन नुक़सान में होंगे:
वह काफ़िर जो उस वक़्त ईमान लाएगा — उसका ईमान क़बूल नहीं होगा।
वह गुनहगार मुसलमान जो पहले नेक अमल नहीं करता था और उस वक़्त तौबा करेगा — उसकी तौबा भी क़बूल नहीं होगी।
आख़िर में अल्लाह रसूल को हुक्म देता है: कह दो कि तुम इंतज़ार करो, हम भी इंतज़ार कर रहे हैं। यानी तुम अपने अंजाम का इंतज़ार करो, हम भी तुम्हारे लिए अल्लाह के फ़ैसले का इंतज़ार करते हैं। ये एक सख़्त तहदीद (चेतावनी) है।
फ़ायदे (सबक़):
ईमान का सही वक़्त: ईमान लाने का सही वक़्त यही दुनिया की ज़िंदगी है। जब मौत आ जाए या क़ियामत की निशानियाँ दिख जाएँ, तो ईमान लाना बेकार है। इसलिए हमें आज ही अपने ईमान को सच्चा बनाना चाहिए और नेक अमल करना चाहिए।
नेक अमल की पेशगी: सिर्फ़ ईमान का दावा काफ़ी नहीं, बल्कि ईमान के साथ नेक अमल भी ज़रूरी है। जो लोग नेक अमल को टालते रहते हैं, उन्हें इस आयत से सबक़ लेना चाहिए कि कहीं वक़्त हाथ से न निकल जाए।
अल्लाह की रहमत का दरवाज़ा: ये आयत बताती है कि अल्लाह ने तौबा और ईमान का दरवाज़ा खुला रखा है, लेकिन एक मुक़र्रर वक़्त तक। इसलिए हमें अल्लाह की रहमत से निराश नहीं होना चाहिए, बल्कि जल्दी से जल्दी अपनी ज़िंदगी को सुधारना चाहिए।
अल्लाह का इंसाफ़: ये आयत अल्लाह के इंसाफ़ को दिखाती है कि वह किसी पर ज़ुल्म नहीं करता। जिसने दुनिया में हक़ देखने के बावजूद ईमान नहीं लाया, उसे आख़िरत में ईमान लाने का मौक़ा नहीं दिया जाएगा, क्योंकि वहाँ ईमान लाना मजबूरी होगी, इख़्तियार (स्वतंत्र इच्छा) से नहीं।
चेतावनी का अंदाज़: "तुम इंतज़ार करो, हम भी इंतज़ार करते हैं" — ये अल्लाह की तरफ़ से एक प्यार भरी सख़्ती है, ताकि लोग अपनी ग़फ़लत से जागें और अपने रब की त
(और ऐ मुशरेकीन ये किताब हमने इसलिए नाज़िल की कि तुम कहीं) यह कह बैठो कि हमसे पहले किताब ख़ुदा तो बस सिर्फ दो ही गिरोहों (यहूद व नसारा) पर नाज़िल हुई थी अगरचे हम तो उनके पढ़ने (पढ़ाने) से बेखबर थे
या ये कहने लगो कि अगर हम पर किताबे (ख़ुदा नाज़िल होती तो हम उन लोगों से कहीं बढ़कर राहे रास्त पर होते तो (देखो) अब तो यक़ीनन तुम्हारे परवरदिगार की तरफ से तुम्हारे पास एक रौशन दलील है (किताबे ख़ुदा) और हिदायत और रहमत आ चुकी तो जो शख्स ख़ुदा के आयात को झुठलाए और उससे मुँह फेरे उनसे बढ़ कर ज़ालिम कौन है जो लोग हमारी आयतों से मुँह फेरते हैं हम उनके मुँह फेरने के बदले में अनक़रीब ही बुरे अज़ाब की सज़ा देगें (ऐ रसूल) क्या ये लोग सिर्फ उसके मुन्तिज़र है कि उनके पास फरिश्ते आएं
या तुम्हारा परवरदिगार खुद (तुम्हारे पास) आये या तुम्हारे परवरदिगार की कुछ निशानियाँ आ जाएं (आख़िरकार क्योकर समझाया जाए) हालांकि जिस दिन तुम्हारे परवरदिगार की बाज़ निशानियाँ आ जाएंगी तो जो शख्स पहले से ईमान नहीं लाया होगा या अपने मोमिन होने की हालत में कोई नेक काम नहीं किया होगा तो अब उसका ईमान लाना उसको कुछ भी मुफ़ीद न होगा - (ऐ रसूल) तुम (उनसे) कह दो कि (अच्छा यही सही) तुम (भी) इन्तिज़ार करो हम भी इन्तिज़ार करते हैं
बेशक जिन लोगों ने आपने दीन में तफरक़ा डाला और कई फरीक़ बन गए थे उनसे कुछ सरोकार नहीं उनका मामला तो सिर्फ ख़ुदा के हवाले है फिर जो कुछ वह दुनिया में नेक या बद किया करते थे वह उन्हें बता देगा (उसकी रहमत तो देखो)
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