अल-अनआम · 161/165
अनुवाद उच्चारण — अल-अनआम
قُلْ إِنَّنِي هَدَانِي رَبِّي إِلَىٰ صِرَاطٍ مُّسْتَقِيمٍ دِينًا قِيَمًا مِّلَّةَ إِبْرَاهِيمَ حَنِيفًا ۚ وَمَا كَانَ مِنَ الْمُشْرِكِينَ ۝١٦١
Qul innanee hadaanee Rabbeee ilaa Siraatim Mustaqeemin deenan qiyamam Millata Ibraaheema haneefaa; wa maa kaana minal mushrikeen
📖 हिंदी अर्थ
(ऐ रसूल) तुम उनसे कहो कि मुझे तो मेरे परवरदिगार ने सीधी राह यानि एक मज़बूत दीन इबराहीम के मज़हब की हिदायत फरमाई है बातिल से कतरा के चलते थे और मुशरेकीन से न थे
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • هداني: मुझे मार्गदर्शन किया, मुझे रास्ता दिखाया।
  • صراط مستقيم: सीधा और सच्चा मार्ग, जो भटकाव से पाक हो।
  • قيماً: ऐसा दीन (धर्म) जो दुनिया और आख़िरत के मामलों में न्याय और स्थिरता पर क़ायम हो, यानी हर भलाई और सुधार को अपने में समेटे हुए हो।
  • حنيفاً: हर बातिल (झूठे धर्म) से हटकर सिर्फ़ एक अल्लाह की ओर झुकने वाला, एकेश्वरवादी।
  • مشركين: वे लोग जो अल्लाह के साथ किसी और को उसकी इबादत में शरीक करते हैं।

तफ़सीर (व्याख्या):

ऐ नबी! आप इन मुशरिकों से कह दीजिए कि मेरे रब ने मुझे अपनी वही (प्रकाशना) और अपने मार्गदर्शन के ज़रिये एक बिल्कुल सीधे रास्ते की तरफ़ हिदायत दी है। यह रास्ता वह दीन है जो दुनिया और आख़िरत की भलाइयों पर क़ायम है, और जो हर अच्छाई, नेकी और इंसाफ़ को अपने अंदर रखता है। यही वह दीन है जो हज़रत इब्राहीम (अलैहिस्सलाम) का था, जो हर बातिल से अलग होकर सिर्फ़ अल्लाह की तरफ़ मुड़े हुए थे। वह कभी भी मुशरिकों में से नहीं थे, बल्कि उन्होंने हमेशा अल्लाह की वहदानियत (एकता) का एलान किया। यही वह सच्चा रास्ता है जिस पर चलने का हुक्म मुझे दिया गया है, और यही वह दीन है जो अल्लाह की तरफ़ से पूर्ण और सत्य है।


फ़ायदे (सीख):

  1. इस आयत से हमें यह सीख मिलती है कि सीधे रास्ते की हिदायत सिर्फ़ अल्लाह की तरफ़ से मिलती है, और यह सबसे बड़ी नेमत है जो अल्लाह अपने बंदों को देता है।
  2. दीन-ए-इस्लाम ही वह सच्चा और क़ायम रहने वाला दीन है जो दुनिया और आख़िरत दोनों की भलाई को अपने अंदर समेटे हुए है। यह कोई नया दीन नहीं, बल्कि यही वह दीन है जिस पर हज़रत इब्राहीम (अलैहिस्सलाम) जैसे महान पैग़म्बर थे।
  3. हज़रत इब्राहीम (अलैहिस्सलाम) की पवित्रता और उनका शिर्क से दूर होना हमारे लिए नमूना है। हमें भी अपने अक़ीदे (विश्वास) को शिर्क से पाक रखना चाहिए और सिर्फ़ अल्लाह की इबादत करनी चाहिए।
  4. यह आयत हमें बताती है कि इस्लाम दीन-ए-फ़ितरत है, यानी यह वह दीन है जो इंसान की फ़ितरत (स्वभाव) के मुताबिक़ है, और यही वजह है कि यह हमेशा क़ायम रहने वाला और सच्चा दीन है।
🎧 सुनें

📜 आयत 159-163 — अल-अनआम

159إِنَّ الَّذِينَ فَرَّقُوا دِينَهُمْ وَكَانُوا شِيَعًا لَّسْتَ مِنْهُمْ فِي شَيْءٍ ۚ إِنَّمَا أَمْرُهُمْ إِلَى اللَّهِ ثُمَّ يُنَبِّئُهُم بِمَا كَانُوا يَفْعَلُونَ
बेशक जिन लोगों ने आपने दीन में तफरक़ा डाला और कई फरीक़ बन गए थे उनसे कुछ सरोकार नहीं उनका मामला तो सिर्फ ख़ुदा के हवाले है फिर जो कुछ वह दुनिया में नेक या बद किया करते थे वह उन्हें बता देगा (उसकी रहमत तो देखो)
160مَن جَاءَ بِالْحَسَنَةِ فَلَهُ عَشْرُ أَمْثَالِهَا ۖ وَمَن جَاءَ بِالسَّيِّئَةِ فَلَا يُجْزَىٰ إِلَّا مِثْلَهَا وَهُمْ لَا يُظْلَمُونَ
जो शख्स नेकी करेगा तो उसको दस गुना सवाब अता होगा और जो शख्स बदी करेगा तो उसकी सज़ा उसको बस उतनी ही दी जाएगी और वह लोग (किसी तरह) सताए न जाएगें
161قُلْ إِنَّنِي هَدَانِي رَبِّي إِلَىٰ صِرَاطٍ مُّسْتَقِيمٍ دِينًا قِيَمًا مِّلَّةَ إِبْرَاهِيمَ حَنِيفًا ۚ وَمَا كَانَ مِنَ الْمُشْرِكِينَ
(ऐ रसूल) तुम उनसे कहो कि मुझे तो मेरे परवरदिगार ने सीधी राह यानि एक मज़बूत दीन इबराहीम के मज़हब की हिदायत फरमाई है बातिल से कतरा के चलते थे और मुशरेकीन से न थे
162قُلْ إِنَّ صَلَاتِي وَنُسُكِي وَمَحْيَايَ وَمَمَاتِي لِلَّهِ رَبِّ الْعَالَمِينَ
(ऐ रसूल) तुम उन लोगों से कह दो कि मेरी नमाज़ मेरी इबादत मेरा जीना मेरा मरना सब ख़ुदा ही के वास्ते है जो सारे जहाँ का परवरदिगार है
163لَا شَرِيكَ لَهُ ۖ وَبِذَٰلِكَ أُمِرْتُ وَأَنَا أَوَّلُ الْمُسْلِمِينَ
और उसका कोई शरीक़ नहीं और मुझे इसी का हुक्म दिया गया है और मैं सबसे पहले इस्लाम लाने वाला हूँ
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अनुवाद — अल-अनआम 161

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सूरा आयत 161/165 — अल-अनआम الأنعام (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-अनआम सुनें, अल-अनआम अनुवाद, अल-अनआम mp3, अल-अनआम pdf. आयत 159–163. हिंदी अर्थ: اردو.




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Tuesday, August 18, 2026

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