अल-अनआम · 160/165
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-अनआम
مَن جَاءَ بِالْحَسَنَةِ فَلَهُ عَشْرُ أَمْثَالِهَا ۖ وَمَن جَاءَ بِالسَّيِّئَةِ فَلَا يُجْزَىٰ إِلَّا مِثْلَهَا وَهُمْ لَا يُظْلَمُونَ ۝١٦٠
man jaaa`a bilhasanati falahoo `ashru amsaalihaa wa man jaaa`a bissaiyi`ati falaa yujzaaa illaa mislahaa wa hum laa yuzlamoon
📖 हिंदी अर्थ
जो शख्स नेकी करेगा तो उसको दस गुना सवाब अता होगा और जो शख्स बदी करेगा तो उसकी सज़ा उसको बस उतनी ही दी जाएगी और वह लोग (किसी तरह) सताए न जाएगें

M Mishary Rashid Alafasy ✓
M Mahmoud Khalil Al-Husary ✓
A Abdurrahman As-Sudais ✓
M Mohamed Siddiq Al-Minshawi ✓
A Abdul Basit Abdul Samad ✓
A Ali Al-Hudhaify ✓
A Ahmed ibn Ali al-Ajamy ✓
A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
M Muhammad Ayyoub ✓
A Abdullah Basfar ✓
A Abdullah Al-Juhani ✓
M Maher Al Muaiqly ✓
0:00
0:00
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • الحَسَنَة: नेकी, अच्छा काम, पुण्य।
  • السَّيِّئَة: बुराई, गुनाह, पाप।
  • يُجْزَى: बदला दिया जाना।
  • لَا يُظْلَمُونَ: उन पर कोई ज़ुल्म नहीं किया जाएगा, न उनके अच्छे कामों का सवाब कम किया जाएगा और न बुरे कामों की सज़ा बढ़ाई जाएगी।

तफ़सीर (व्याख्या):

अल्लाह तआला अपने बंदों पर असीम रहमत और करम करने वाला है। वह फ़रमाता है कि जो कोई क़ियामत के दिन अपने रब के सामने एक नेकी लेकर आएगा, उसे उस नेकी के दस गुना अज्र (इनाम) मिलेगा। यह अल्लाह का फ़ज़ल है कि वह एक छोटी सी नेकी को भी दस गुना बढ़ाकर इनाम देता है, और यह उसकी रहमत की वसीअत (विशालता) को दर्शाता है। मोमिन के लिए यह खुशखबरी है कि उसका हर अच्छा अमल, चाहे वह कितना ही छोटा क्यों न हो, अल्लाह के यहाँ बेहद कीमती है और उसे कई गुना बढ़ाकर लौटाया जाएगा।

दूसरी तरफ, जो कोई एक बुराई (गुनाह) लेकर आएगा, उसे उसी बुराई के बराबर ही सज़ा दी जाएगी, उससे ज़्यादा नहीं। अल्लाह तआला इंसाफ (न्याय) का मालिक है, वह किसी पर ज़ुल्म नहीं करता। अगर कोई शख्स एक गुनाह करता है, तो उसे सिर्फ उतनी ही सज़ा मिलेगी जितनी उस गुनाह के लायक है, और अल्लाह की रहमत यह भी है कि वह चाहे तो उसे माफ भी कर दे। लेकिन नेकी के मामले में वह अपने बंदों पर ज़्यादा करम करता है और दस गुना तक इनाम देता है।

यह आयत हमें अल्लाह की रहमत और अदल (न्याय) दोनों की तालीम देती है। हमें चाहिए कि हम नेकियों की तरफ बढ़ें, क्योंकि हर नेकी का इनाम कई गुना है, और गुनाहों से बचें, क्योंकि हर गुनाह की सज़ा उसके बराबर होगी। अल्लाह ने अपने बंदों पर ज़ुल्म नहीं किया, बल्कि उनकी भलाई के लिए यह नियम बनाया है। यह हमारे लिए एक बड़ी खुशखबरी है कि अल्लाह की रहमत हमारे अमल से कहीं बढ़कर है। आओ, हम अपनी ज़िंदगी को नेकियों से भर दें और अल्लाह की इस असीम रहमत के हकदार बनें।



📜 आयत 158-162 — सूरा अल-अनआम

158هَلْ يَنظُرُونَ إِلَّا أَن تَأْتِيَهُمُ الْمَلَائِكَةُ أَوْ يَأْتِيَ رَبُّكَ أَوْ يَأْتِيَ بَعْضُ آيَاتِ رَبِّكَ ۗ يَوْمَ يَأْتِي بَعْضُ آيَاتِ رَبِّكَ لَا يَنفَعُ نَفْسًا إِيمَانُهَا لَمْ تَكُنْ آمَنَتْ مِن قَبْلُ أَوْ كَسَبَتْ فِي إِيمَانِهَا خَيْرًا ۗ قُلِ انتَظِرُوا إِنَّا مُنتَظِرُونَ
या तुम्हारा परवरदिगार खुद (तुम्हारे पास) आये या तुम्हारे परवरदिगार की कुछ निशानियाँ आ जाएं (आख़िरकार क्योकर समझाया जाए) हालांकि जिस दिन तुम्हारे परवरदिगार की बाज़ निशानियाँ आ जाएंगी तो जो शख्स पहले से ईमान नहीं लाया होगा या अपने मोमिन होने की हालत में कोई नेक काम नहीं किया होगा तो अब उसका ईमान लाना उसको कुछ भी मुफ़ीद न होगा - (ऐ रसूल) तुम (उनसे) कह दो कि (अच्छा यही सही) तुम (भी) इन्तिज़ार करो हम भी इन्तिज़ार करते हैं
159إِنَّ الَّذِينَ فَرَّقُوا دِينَهُمْ وَكَانُوا شِيَعًا لَّسْتَ مِنْهُمْ فِي شَيْءٍ ۚ إِنَّمَا أَمْرُهُمْ إِلَى اللَّهِ ثُمَّ يُنَبِّئُهُم بِمَا كَانُوا يَفْعَلُونَ
बेशक जिन लोगों ने आपने दीन में तफरक़ा डाला और कई फरीक़ बन गए थे उनसे कुछ सरोकार नहीं उनका मामला तो सिर्फ ख़ुदा के हवाले है फिर जो कुछ वह दुनिया में नेक या बद किया करते थे वह उन्हें बता देगा (उसकी रहमत तो देखो)
160مَن جَاءَ بِالْحَسَنَةِ فَلَهُ عَشْرُ أَمْثَالِهَا ۖ وَمَن جَاءَ بِالسَّيِّئَةِ فَلَا يُجْزَىٰ إِلَّا مِثْلَهَا وَهُمْ لَا يُظْلَمُونَ
जो शख्स नेकी करेगा तो उसको दस गुना सवाब अता होगा और जो शख्स बदी करेगा तो उसकी सज़ा उसको बस उतनी ही दी जाएगी और वह लोग (किसी तरह) सताए न जाएगें
161قُلْ إِنَّنِي هَدَانِي رَبِّي إِلَىٰ صِرَاطٍ مُّسْتَقِيمٍ دِينًا قِيَمًا مِّلَّةَ إِبْرَاهِيمَ حَنِيفًا ۚ وَمَا كَانَ مِنَ الْمُشْرِكِينَ
(ऐ रसूल) तुम उनसे कहो कि मुझे तो मेरे परवरदिगार ने सीधी राह यानि एक मज़बूत दीन इबराहीम के मज़हब की हिदायत फरमाई है बातिल से कतरा के चलते थे और मुशरेकीन से न थे
162قُلْ إِنَّ صَلَاتِي وَنُسُكِي وَمَحْيَايَ وَمَمَاتِي لِلَّهِ رَبِّ الْعَالَمِينَ
(ऐ रसूल) तुम उन लोगों से कह दो कि मेरी नमाज़ मेरी इबादत मेरा जीना मेरा मरना सब ख़ुदा ही के वास्ते है जो सारे जहाँ का परवरदिगार है
अल-अनआमकुरान सूची
165आयत
मक्कीअवतरण स्थान
160आयत

अनुवाद — अल-अनआम 160

सूरा अल-अनआम आयत 160 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : जो शख्स नेकी करेगा तो उसको दस गुना सवाब अता…

सूरा आयत 160/165 — सूरा अल-अनआम الأنعام (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अल-अनआम सुनें, सूरा अल-अनआम अनुवाद, सूरा अल-अनआम mp3, सूरा अल-अनआम pdf. आयत 158–162. हिंदी अर्थ: اردو.





पवित्र क़ुरआन


Saturday, October 3, 2026

अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए