अल-अनआम · 162/165
अनुवाद उच्चारण — अल-अनआम
قُلْ إِنَّ صَلَاتِي وَنُسُكِي وَمَحْيَايَ وَمَمَاتِي لِلَّهِ رَبِّ الْعَالَمِينَ ۝١٦٢
Qul inna Salaatee wa nusukee wa mahyaaya wa mamaatee lillaahi Rabbil `aalameen
📖 हिंदी अर्थ
(ऐ रसूल) तुम उन लोगों से कह दो कि मेरी नमाज़ मेरी इबादत मेरा जीना मेरा मरना सब ख़ुदा ही के वास्ते है जो सारे जहाँ का परवरदिगार है
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • نُسُكِي (मेरी नुसुक): मेरी क़ुर्बानी, अर्थात वह जानवर जो अल्लाह के नाम पर हज और उमराह में ज़बह किया जाता है।
  • مَحْيَايَ (मेरा जीवन): मेरी ज़िंदगी और उसके सभी कार्य।
  • مَمَاتِي (मेरी मृत्यु): मेरा मरना और उसके बाद की स्थिति।

तफ़सीर:

ऐ नबी! आप इन मुशरिकों से कह दीजिए कि मेरी नमाज़, मेरी क़ुर्बानी, मेरा जीना और मेरा मरना — यह सब कुछ विशेष रूप से अल्लाह के लिए है, जो सारे जहानों का पालनहार है। मैं अपनी नमाज़ में केवल उसी की इबादत करता हूँ, उसी के आगे सिर झुकाता हूँ और उसी से मदद माँगता हूँ। मेरी क़ुर्बानी भी केवल उसी के नाम पर होती है, न कि किसी बुत, किसी मृत व्यक्ति, किसी जिन्न या किसी और के नाम पर — जैसा कि तुम लोग करते हो। मेरी पूरी ज़िंदगी उसी की आज्ञा के अनुसार चलती है, और मेरी मृत्यु भी उसी के हाथ में है; वही मुझे जीवन देता है और वही मुझे मौत देता है। मेरे जीवन का हर पल, मेरा हर कर्म, मेरी हर इबादत — सब कुछ उसी के लिए समर्पित है। उसके सिवा किसी और का इसमें कोई हिस्सा नहीं है।

फ़ायदे:

  1. इस आयत से हमें सीख मिलती है कि एक सच्चे मुसलमान की पहचान यह है कि उसका पूरा जीवन — चाहे वह इबादत हो, काम-धंधा हो, खाना-पीना हो या सोना-जागना — सब कुछ अल्लाह के लिए हो। यही ईमान की असली मिठास है।
  2. क़ुर्बानी (बलिदान) केवल अल्लाह के नाम पर ही जायज़ है। किसी और के नाम पर ज़बह करना शिर्क है और यह इस्लाम की रूह के खिलाफ है।
  3. यह आयत हमें सिखाती है कि मौत से डरना नहीं चाहिए, बल्कि उसे भी अल्लाह की राह में एक क़दम समझना चाहिए। जो व्यक्ति अपनी ज़िंदगी अल्लाह के लिए जीता है, उसकी मौत भी अल्लाह के लिए होती है और यही सबसे बड़ी कामयाबी है।
  4. इस आयत में "رَبِّ الْعَالَمِينَ" (सारे जहानों का पालनहार) कहकर यह बताया गया है कि अल्लाह की रुबूबियत (पालनहारी) हर चीज़ पर है — इसलिए उसी की इबादत करनी चाहिए और उसी से जुड़े रहना चाहिए।
🎧 सुनें

📜 आयत 160-164 — अल-अनआम

160مَن جَاءَ بِالْحَسَنَةِ فَلَهُ عَشْرُ أَمْثَالِهَا ۖ وَمَن جَاءَ بِالسَّيِّئَةِ فَلَا يُجْزَىٰ إِلَّا مِثْلَهَا وَهُمْ لَا يُظْلَمُونَ
जो शख्स नेकी करेगा तो उसको दस गुना सवाब अता होगा और जो शख्स बदी करेगा तो उसकी सज़ा उसको बस उतनी ही दी जाएगी और वह लोग (किसी तरह) सताए न जाएगें
161قُلْ إِنَّنِي هَدَانِي رَبِّي إِلَىٰ صِرَاطٍ مُّسْتَقِيمٍ دِينًا قِيَمًا مِّلَّةَ إِبْرَاهِيمَ حَنِيفًا ۚ وَمَا كَانَ مِنَ الْمُشْرِكِينَ
(ऐ रसूल) तुम उनसे कहो कि मुझे तो मेरे परवरदिगार ने सीधी राह यानि एक मज़बूत दीन इबराहीम के मज़हब की हिदायत फरमाई है बातिल से कतरा के चलते थे और मुशरेकीन से न थे
162قُلْ إِنَّ صَلَاتِي وَنُسُكِي وَمَحْيَايَ وَمَمَاتِي لِلَّهِ رَبِّ الْعَالَمِينَ
(ऐ रसूल) तुम उन लोगों से कह दो कि मेरी नमाज़ मेरी इबादत मेरा जीना मेरा मरना सब ख़ुदा ही के वास्ते है जो सारे जहाँ का परवरदिगार है
163لَا شَرِيكَ لَهُ ۖ وَبِذَٰلِكَ أُمِرْتُ وَأَنَا أَوَّلُ الْمُسْلِمِينَ
और उसका कोई शरीक़ नहीं और मुझे इसी का हुक्म दिया गया है और मैं सबसे पहले इस्लाम लाने वाला हूँ
164قُلْ أَغَيْرَ اللَّهِ أَبْغِي رَبًّا وَهُوَ رَبُّ كُلِّ شَيْءٍ ۚ وَلَا تَكْسِبُ كُلُّ نَفْسٍ إِلَّا عَلَيْهَا ۚ وَلَا تَزِرُ وَازِرَةٌ وِزْرَ أُخْرَىٰ ۚ ثُمَّ إِلَىٰ رَبِّكُم مَّرْجِعُكُمْ فَيُنَبِّئُكُم بِمَا كُنتُمْ فِيهِ تَخْتَلِفُونَ
(ऐ रसूल) तुम पूछो तो कि क्या मैं ख़ुदा के सिवा किसी और को परवरदिगार तलाश करुँ हालॉकि वह तमाम चीज़ो का मालिक है और जो शख्स कोई बुरा काम करता है उसका (वबाल) उसी पर है और कोई शख्स किसी दूसरे के गुनाह का बोझ नहीं उठाने का फिर तुम सबको अपने परवरदिगार के हुज़ूर में लौट कर जाना है तब तुम लोग जिन बातों में बाहम झगड़ते थे वह सब तुम्हें बता देगा
अल-अनआमकुरान सूची
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मक्कीRevelation
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अनुवाद — अल-अनआम 162

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Tuesday, August 18, 2026

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