Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- نُهِيتُ (मुझे रोका गया): अर्थात मुझे मना किया गया है।
- تَدْعُونَ (तुम पुकारते हो): यहाँ अर्थ है 'तुम पूजते हो'।
- أَهْوَاءَكُمْ (तुम्हारी इच्छाओं/मनमानियों): बिना किसी प्रमाण के अपनी मनमानी पर चलना।
- ضَلَلْتُ (मैं पथभ्रष्ट हो जाऊँ): सत्य मार्ग से भटक जाना।
- الْمُهْتَدِينَ (सीधे मार्ग पर चलने वाले): हिदायत पाए हुए लोग।
तफसीर (व्याख्या):
हे नबी! आप इन मुशरिकों से कह दीजिए कि मुझे अल्लाह ने स्पष्ट रूप से मना किया है कि मैं उन चीज़ों की इबादत करूँ जिन्हें तुम अल्लाह को छोड़कर पुकारते हो—चाहे वे मूर्तियाँ हों, पत्थर हों या कोई और माबूद। यह निषेध मेरे पास आई हुई वही (प्रकाशना) के माध्यम से है, जो तौहीद (एकेश्वरवाद) का आदेश देती है।
फिर आप उनसे यह भी कह दीजिए कि मैं तुम्हारी मनमानी इच्छाओं का पालन नहीं करूँगा—न तो उन मूर्तियों की पूजा में, न ही उन बातों में जो तुम बिना किसी दलील के पेश करते हो। यदि मैं तुम्हारी इच्छाओं का अनुसरण कर लूँ, तो मैं निश्चित रूप से सत्य मार्ग से भटक जाऊँगा और उन लोगों में से नहीं रहूँगा जिन्हें अल्लाह ने हिदायत दी है। यह बात हर उस व्यक्ति पर लागू होती है जो बिना किसी प्रमाण के अपनी इच्छा का पालन करता है—वह कभी सीधे मार्ग पर नहीं चल सकता।
फ़ायदे (शिक्षाएँ):
- तौहीद की पवित्रता: यह आयत सिखाती है कि एक मुसलमान को अपनी इबादत को केवल अल्लाह के लिए ख़ास रखना चाहिए, चाहे समाज का दबाव कितना भी अधिक क्यों न हो। यही इस्लाम की सबसे बुनियादी शिक्षा है।
- हवा-ओ-हवस (इच्छाओं) से बचाव: यह आयत हमें सिखाती है कि धर्म के मामले में अपनी मनमानी इच्छाओं की پیروی नहीं करनी चाहिए, बल्कि अल्लाह की वही और सुन्नत को ही मार्गदर्शक बनाना चाहिए। यही सच्ची आज़ादी है।
- सच्चाई पर अडिग रहना: नबी ﷺ का यह उत्तर हमें सिखाता है कि सत्य के मार्ग पर चलते हुए किसी की परवाह नहीं करनी चाहिए, भले ही पूरा समाज विरोध में खड़ा हो। सच्चाई पर क़ायम रहना ही कामयाबी की कुंजी है।
- गुमराही का डर: यह आयत हमें यह भी सिखाती है कि इंसान को हमेशा अल्लाह से दुआ करनी चाहिए कि वह उसे सीधे मार्ग पर स्थिर रखे, क्योंकि इच्छाओं का पालन करना गुमराही की ओर ले जाने वाला सबसे बड़ा रास्ता है।
- दीन की वज़ाहत (स्पष्टता): इस्लाम में कोई अस्पष्टता नहीं है—इबादत केवल अल्लाह की होगी, और यही वह पैग़ाम है जो हर नबी लेकर आया। यह आयत हमें अपने दीन पर गर्व करना और उसे स्पष्ट रूप से पेश करना सिखाती है।
📜 आयत 54-58 — सूरा अल-अनआम
अनुवाद — अल-अनआम 56
सूरा अल-अनआम आयत 56 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : (ऐ रसूल) तुम कह दो कि मुझसे उसकी मनाही की…सूरा आयत 56/165 — सूरा अल-अनआम الأنعام (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अल-अनआम सुनें, सूरा अल-अनआम अनुवाद, सूरा अल-अनआम mp3, सूरा अल-अनआम pdf. आयत 54–58. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Friday, October 2, 2026
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