Qul innee nuheetu an a`budal lazeena tad`oona min doonil laah; qul laaa attabi`u ahwaaa`akum qad dalaltu izanw wa maaa ana minal muhtadeen
📖 अनुवाद (हिंदी अर्थ)
📖 हिंदी अर्थ
(ऐ रसूल) तुम कह दो कि मुझसे उसकी मनाही की गई है कि मैं ख़ुदा को छोड़कर उन माबूदों की इबादत करुं जिन को तुम पूजा करते हो (ये भी) कह दो कि मै तो तुम्हारी (नाफसानी) ख्वाहिश पर चलने का नहीं (वरना) फिर तो मै गुमराह हो जाऊॅगा और हिदायत याफता लोगों में न रहूँगा
🌐 Additional reference in اردو
🌐 اردو
(اے پیغمبر! کفار سے) کہہ دو کہ جن کو تم خدا کے سوا پکارتے ہو مجھے ان کی عبادت سے منع کیا گیا ہے۔ (یہ بھی) کہہ دو کہ میں تمہاری خواہشوں کی پیروی نہیں کروں گا ایسا کروں تو گمراہ ہوجاؤں اور ہدایت یافتہ لوگوں میں نہ رہوں
نُهِيتُ (मुझे रोका गया): अर्थात मुझे मना किया गया है।
تَدْعُونَ (तुम पुकारते हो): यहाँ अर्थ है 'तुम पूजते हो'।
أَهْوَاءَكُمْ (तुम्हारी इच्छाओं/मनमानियों): बिना किसी प्रमाण के अपनी मनमानी पर चलना।
ضَلَلْتُ (मैं पथभ्रष्ट हो जाऊँ): सत्य मार्ग से भटक जाना।
الْمُهْتَدِينَ (सीधे मार्ग पर चलने वाले): हिदायत पाए हुए लोग।
तफसीर (व्याख्या):
हे नबी! आप इन मुशरिकों से कह दीजिए कि मुझे अल्लाह ने स्पष्ट रूप से मना किया है कि मैं उन चीज़ों की इबादत करूँ जिन्हें तुम अल्लाह को छोड़कर पुकारते हो—चाहे वे मूर्तियाँ हों, पत्थर हों या कोई और माबूद। यह निषेध मेरे पास आई हुई वही (प्रकाशना) के माध्यम से है, जो तौहीद (एकेश्वरवाद) का आदेश देती है।
फिर आप उनसे यह भी कह दीजिए कि मैं तुम्हारी मनमानी इच्छाओं का पालन नहीं करूँगा—न तो उन मूर्तियों की पूजा में, न ही उन बातों में जो तुम बिना किसी दलील के पेश करते हो। यदि मैं तुम्हारी इच्छाओं का अनुसरण कर लूँ, तो मैं निश्चित रूप से सत्य मार्ग से भटक जाऊँगा और उन लोगों में से नहीं रहूँगा जिन्हें अल्लाह ने हिदायत दी है। यह बात हर उस व्यक्ति पर लागू होती है जो बिना किसी प्रमाण के अपनी इच्छा का पालन करता है—वह कभी सीधे मार्ग पर नहीं चल सकता।
फ़ायदे (शिक्षाएँ):
तौहीद की पवित्रता: यह आयत सिखाती है कि एक मुसलमान को अपनी इबादत को केवल अल्लाह के लिए ख़ास रखना चाहिए, चाहे समाज का दबाव कितना भी अधिक क्यों न हो। यही इस्लाम की सबसे बुनियादी शिक्षा है।
हवा-ओ-हवस (इच्छाओं) से बचाव: यह आयत हमें सिखाती है कि धर्म के मामले में अपनी मनमानी इच्छाओं की پیروی नहीं करनी चाहिए, बल्कि अल्लाह की वही और सुन्नत को ही मार्गदर्शक बनाना चाहिए। यही सच्ची आज़ादी है।
सच्चाई पर अडिग रहना: नबी ﷺ का यह उत्तर हमें सिखाता है कि सत्य के मार्ग पर चलते हुए किसी की परवाह नहीं करनी चाहिए, भले ही पूरा समाज विरोध में खड़ा हो। सच्चाई पर क़ायम रहना ही कामयाबी की कुंजी है।
गुमराही का डर: यह आयत हमें यह भी सिखाती है कि इंसान को हमेशा अल्लाह से दुआ करनी चाहिए कि वह उसे सीधे मार्ग पर स्थिर रखे, क्योंकि इच्छाओं का पालन करना गुमराही की ओर ले जाने वाला सबसे बड़ा रास्ता है।
दीन की वज़ाहत (स्पष्टता): इस्लाम में कोई अस्पष्टता नहीं है—इबादत केवल अल्लाह की होगी, और यही वह पैग़ाम है जो हर नबी लेकर आया। यह आयत हमें अपने दीन पर गर्व करना और उसे स्पष्ट रूप से पेश करना सिखाती है।
(ऐ रसूल) तुम कह दो कि मुझसे उसकी मनाही की गई है कि मैं ख़ुदा को छोड़कर उन माबूदों की इबादत करुं जिन को तुम पूजा करते हो (ये भी) कह दो कि मै तो तुम्हारी (नाफसानी) ख्वाहिश पर चलने का नहीं (वरना) फिर तो मै गुमराह हो जाऊॅगा और हिदायत याफता लोगों में न रहूँगा
और जो लोग हमारी आयतों पर ईमान लाए हैं तुम्हारे पास ऑंए तो तुम सलामुन अलैकुम (तुम पर ख़ुदा की सलामती हो) कहो तुम्हारे परवरदिगार ने अपने ऊपर रहमत लाज़िम कर ली है बेशक तुम में से जो शख़्श नादानी से कोई गुनाह कर बैठे उसके बाद फिर तौबा करे और अपनी हालत की (असलाह करे ख़ुदा उसका गुनाह बख्श देगा क्योंकि) वह यक़ीनी बड़ा बख्शने वाला मेहरबान है
(ऐ रसूल) तुम कह दो कि मुझसे उसकी मनाही की गई है कि मैं ख़ुदा को छोड़कर उन माबूदों की इबादत करुं जिन को तुम पूजा करते हो (ये भी) कह दो कि मै तो तुम्हारी (नाफसानी) ख्वाहिश पर चलने का नहीं (वरना) फिर तो मै गुमराह हो जाऊॅगा और हिदायत याफता लोगों में न रहूँगा
तुम कह दो कि मै तो अपने परवरदिगार की तरफ से एक रौशन दलील पर हूं और तुमने उसे झुठला दिया (तो) तुम जिस की जल्दी करते हो (अज़ाब) वह कुछ मेरे पास (एख्तियार में) तो है नहीं हुकूमत तो बस ज़रुर ख़ुदा ही के लिए है वह तो (हक़) बयान करता है और वह तमाम फैसला करने वालों से बेहतर है
(उन लोगों से) कह दो कि जिस (अज़ाब) की तुम जल्दी करते हो अगर वह मेरे पास (एख्तियार में) होता तो मेरे और तुम्हारे दरमियान का फैसला कब का चुक गया होता और ख़ुदा तो ज़ालिमों से खूब वाक़िफ है
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