अल-मुमतहिना · 5/13
अनुवाद उच्चारण — अल-मुमतहिना
رَبَّنَا لَا تَجْعَلْنَا فِتْنَةً لِّلَّذِينَ كَفَرُوا وَاغْفِرْ لَنَا رَبَّنَا ۖ إِنَّكَ أَنتَ الْعَزِيزُ الْحَكِيمُ ۝٥
Rabbana laa taj`alnaa fitnatal lillazeena kafaroo waghfir lanaa rabbanaa innaka antal azeezul hakeem
📖 हिंदी अर्थ
और तेरी तरफ हमें लौट कर जाना है ऐ हमारे पालने वाले तू हम लोगों को काफ़िरों की आज़माइश (का ज़रिया) न क़रार दे और परवरदिगार तू हमें बख्श दे बेशक तू ग़ालिब (और) हिकमत वाला है

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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • फ़ित्ना: यहाँ इसका अर्थ है आज़माइश, परीक्षा, या ऐसा हालत जिसमें काफ़िरों को हमारे बारे में ग़लतफ़हमी हो या वे हमें सताएँ।
  • अल-अज़ीज़: वह शक्तिशाली जो कभी पराजित न हो।
  • अल-हकीम: वह तत्वदर्शी जो हर काम हिकमत (बुद्धिमत्ता) से करता है।

तफ़सीर:

ऐ मेरे पालनहार! हमें उन लोगों के लिए फ़ित्ना (परीक्षा और आज़माइश) का ज़रिया न बना, जिन्होंने तेरा इनकार किया है। यानी हमें उनके सामने ऐसी कमज़ोर हालत में न डाल कि वे हम पर हावी हो जाएँ, हमें सताएँ, या हमारे ऊपर ऐसी मुसीबत डाली जाए जिससे वे यह कहने लगें कि "अगर ये लोग सच्चे होते तो इन पर यह आफ़त न आती" — और इस तरह वे अपने कुफ़्र में और बढ़ जाएँ। या यह कि वे हमें हमारे दीन से भटका दें और हमें धर्म के मामले में आज़माएँ।

और ऐ हमारे रब! हमारे गुनाहों को माफ़ कर दे, हमारी कमियों को ढाँप दे, और हम पर अपनी रहमत कर। बेशक तू ही अज़ीज़ (सब पर ग़ालिब) है — कोई तुझ पर जीत नहीं सकता — और तू ही हकीम है — तेरी हर तदबीर, हर फ़ैसला और हर क़ानून हिकमत से भरा हुआ है।

दावती पहलू:

यह दुआ हमें सिखाती है कि एक मोमिन को हमेशा अपने रब से यही माँगना चाहिए कि वह हमें काफ़िरों के सामने ऐसी हालत में न डाले जिससे उन्हें हमारे दीन पर शुबहा हो या हमारे ईमान को नुक़सान पहुँचे। यह दुआ हमें अल्लाह की क़ुदरत और हिकमत पर भरोसा करना सिखाती है — कि वही हमारी हिफ़ाज़त करने वाला है, और उसकी पनाह में रहने वाला कभी रुसवा नहीं होता। यह भी सिखाती है कि हमें अपने गुनाहों की माफ़ी माँगते रहना चाहिए, क्योंकि गुनाहों की वजह से ही अक्सर मुसीबतें आती हैं। यह दुआ हमें अल्लाह से गहरा रिश्ता जोड़ती है और हमें सब्र, तवक्कुल और इस्तिक़ामत की तालीम देती है।



📜 आयत 3-7 — अल-मुमतहिना

3لَن تَنفَعَكُمْ أَرْحَامُكُمْ وَلَا أَوْلَادُكُمْ ۚ يَوْمَ الْقِيَامَةِ يَفْصِلُ بَيْنَكُمْ ۚ وَاللَّهُ بِمَا تَعْمَلُونَ بَصِيرٌ
क़यामत के दिन न तुम्हारे रिश्ते नाते ही कुछ काम आएँगे न तुम्हारी औलाद (उस दिन) तो वही फ़ैसला कर देगा और जो कुछ भी तुम करते हो ख़ुदा उसे देख रहा है
4قَدْ كَانَتْ لَكُمْ أُسْوَةٌ حَسَنَةٌ فِي إِبْرَاهِيمَ وَالَّذِينَ مَعَهُ إِذْ قَالُوا لِقَوْمِهِمْ إِنَّا بُرَآءُ مِنكُمْ وَمِمَّا تَعْبُدُونَ مِن دُونِ اللَّهِ كَفَرْنَا بِكُمْ وَبَدَا بَيْنَنَا وَبَيْنَكُمُ الْعَدَاوَةُ وَالْبَغْضَاءُ أَبَدًا حَتَّىٰ تُؤْمِنُوا بِاللَّهِ وَحْدَهُ إِلَّا قَوْلَ إِبْرَاهِيمَ لِأَبِيهِ لَأَسْتَغْفِرَنَّ لَكَ وَمَا أَمْلِكُ لَكَ مِنَ اللَّهِ مِن شَيْءٍ ۖ رَّبَّنَا عَلَيْكَ تَوَكَّلْنَا وَإِلَيْكَ أَنَبْنَا وَإِلَيْكَ الْمَصِيرُ
(मुसलमानों) तुम्हारे वास्ते तो इबराहीम और उनके साथियों (के क़ौल व फेल का अच्छा नमूना मौजूद है) कि जब उन्होने अपनी क़ौम से कहा कि हम तुमसे और उन (बुतों) से जिन्हें तुम ख़ुदा के सिवा पूजते हो बेज़ार हैं हम तो तुम्हारे (दीन के) मुनकिर हैं और जब तक तुम यकता ख़ुदा पर ईमान न लाओ हमारे तुम्हारे दरमियान खुल्लम खुल्ला अदावत व दुशमनी क़ायम हो गयी मगर (हाँ) इबराहीम ने अपने (मुँह बोले) बाप से ये (अलबत्ता) कहा कि मैं आपके लिए मग़फ़िरत की दुआ ज़रूर करूँगा और ख़ुदा के सामने तो मैं आपके वास्ते कुछ एख्तेयार नहीं रखता ऐ हमारे पालने वाले (ख़ुदा) हमने तुझी पर भरोसा कर लिया है और तेरी ही तरफ हम रूजू करते हैं
5رَبَّنَا لَا تَجْعَلْنَا فِتْنَةً لِّلَّذِينَ كَفَرُوا وَاغْفِرْ لَنَا رَبَّنَا ۖ إِنَّكَ أَنتَ الْعَزِيزُ الْحَكِيمُ
और तेरी तरफ हमें लौट कर जाना है ऐ हमारे पालने वाले तू हम लोगों को काफ़िरों की आज़माइश (का ज़रिया) न क़रार दे और परवरदिगार तू हमें बख्श दे बेशक तू ग़ालिब (और) हिकमत वाला है
6لَقَدْ كَانَ لَكُمْ فِيهِمْ أُسْوَةٌ حَسَنَةٌ لِّمَن كَانَ يَرْجُو اللَّهَ وَالْيَوْمَ الْآخِرَ ۚ وَمَن يَتَوَلَّ فَإِنَّ اللَّهَ هُوَ الْغَنِيُّ الْحَمِيدُ
(मुसलमानों) उन लोगों के (अफ़आल) का तुम्हारे वास्ते जो ख़ुदा और रोज़े आख़ेरत की उम्मीद रखता हो अच्छा नमूना है और जो (इससे) मुँह मोड़े तो ख़ुदा भी यक़ीनन बेपरवा (और) सज़ावारे हम्द है
7۞ عَسَى اللَّهُ أَن يَجْعَلَ بَيْنَكُمْ وَبَيْنَ الَّذِينَ عَادَيْتُم مِّنْهُم مَّوَدَّةً ۚ وَاللَّهُ قَدِيرٌ ۚ وَاللَّهُ غَفُورٌ رَّحِيمٌ
करीब है कि ख़ुदा तुम्हारे और उनमें से तुम्हारे दुश्मनों के दरमियान दोस्ती पैदा कर दे और ख़ुदा तो क़ादिर है और ख़ुदा बड़ा बख्शने वाला मेहरबान है
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अनुवाद — अल-मुमतहिना 5

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Tuesday, August 18, 2026

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