अल-हाक़्का · 9/52
अनुवाद उच्चारण — अल-हाक़्का
وَجَاءَ فِرْعَوْنُ وَمَن قَبْلَهُ وَالْمُؤْتَفِكَاتُ بِالْخَاطِئَةِ ۝٩
Wa jaaa`a Firawnu wa man qablahoo wal mu`tafikaatu bilhaati`ah
📖 हिंदी अर्थ
और फिरऔन और जो लोग उससे पहले थे और वह लोग (क़ौमे लूत) जो उलटी हुई बस्तियों के रहने वाले थे सब गुनाह के काम करते थे
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • फ़िरऔन: मिस्र का वह ज़ालिम बादशाह जिसने मूसा (अलैहिस्सलाम) की पैग़म्बरी को झुठलाया।
  • मन क़ब्लहु: वे उम्मतें जो फ़िरऔन से पहले गुज़रीं, जिन्होंने अपने रसूलों को झुठलाया।
  • अल-मु'तफ़िकात: वे बस्तियाँ जो उलट दी गईं, यानी हज़रत लूत (अलैहिस्सलाम) की क़ौम की बस्तियाँ, जिन्हें अल्लाह ने उनके गुनाहों की वजह से ज़मीन के नीचे कर दिया।
  • बिल-ख़ाति'अह: बड़े गुनाह और कुफ़्र के साथ, यानी वे शिर्क और बुरे कामों के साथ आए।

तफ़सीर:

इस आयत में अल्लाह तआला ने उन ज़ालिम क़ौमों का ज़िक्र किया है जिन्होंने अपने रसूलों को झुठलाया और अल्लाह की नाफ़रमानी में हद से गुज़र गए। फ़िरऔन, जो अपनी सरकशी और ज़ुल्म में मशहूर था, और उससे पहले की क़ौमें—जैसे नूह, आद, समूद की क़ौमें—सब अपने-अपने नबियों के सामने झुकने से इनकार कर बैठीं। साथ ही "अल-मु'तफ़िकात" यानी हज़रत लूत की क़ौम की बस्तियाँ, जो अपनी बेशर्मी और अप्राकृतिक कामों (होमोसेक्सुअलिटी) की वजह से बदनाम थीं, वे भी अपने नबी की दावत को ठुकराकर गुनाहों में डूबी रहीं।

ये सारी क़ौमें "ख़ाति'अह" यानी बड़े गुनाह और शिर्क पर जमी हुई थीं। उन्होंने अल्लाह के हुक्मों को मानने के बजाय अपनी ख्वाहिशात की पैरवी की। नतीजा यह हुआ कि अल्लाह ने उन्हें ऐसी पकड़ में पकड़ा जो बेहद सख्त थी—कोई तूफ़ान से हलाक हुआ, कोई चीख़ से, कोई ज़मीन में धँसा दिया गया, और कोई पत्थरों की बारिश से तबाह हुआ।

इस आयत से हमें सबक़ मिलता है कि अल्लाह की नाफ़रमानी और रसूलों की नाफ़रमानी कभी बेसज़ा नहीं जाती। अल्लाह की पकड़ बहुत सख्त है, और वह अपने बन्दों पर ज़ुल्म करने वालों को मोहलत ज़रूर देता है, लेकिन जब पकड़ता है तो कोई बचा नहीं सकता। यह हमारे लिए चेतावनी है कि हम अपने जीवन में अल्लाह के हुक्मों की पैरवी करें, अपने नबी (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) की सुन्नत को अपनाएँ, और उन बुरे कामों से बचें जो इन क़ौमों की हलाकत का सबब बने। अल्लाह तआला रहम करने वाला है, और जो कोई उसकी तरफ़ रुजू करे, उसे वह माफ़ कर देता है और दुनिया और आख़िरत में कामयाबी अता फ़रमाता है।

🎧 सुनें

📜 आयत 7-11 — अल-हाक़्का

7سَخَّرَهَا عَلَيْهِمْ سَبْعَ لَيَالٍ وَثَمَانِيَةَ أَيَّامٍ حُسُومًا فَتَرَى الْقَوْمَ فِيهَا صَرْعَىٰ كَأَنَّهُمْ أَعْجَازُ نَخْلٍ خَاوِيَةٍ
ख़ुदा ने उसे सात रात और आठ दिन लगाकर उन पर चलाया तो लोगों को इस तरह ढहे (मुर्दे) पड़े देखता कि गोया वह खजूरों के खोखले तने हैं
8فَهَلْ تَرَىٰ لَهُم مِّن بَاقِيَةٍ
तू क्या इनमें से किसी को भी बचा खुचा देखता है
9وَجَاءَ فِرْعَوْنُ وَمَن قَبْلَهُ وَالْمُؤْتَفِكَاتُ بِالْخَاطِئَةِ
और फिरऔन और जो लोग उससे पहले थे और वह लोग (क़ौमे लूत) जो उलटी हुई बस्तियों के रहने वाले थे सब गुनाह के काम करते थे
10فَعَصَوْا رَسُولَ رَبِّهِمْ فَأَخَذَهُمْ أَخْذَةً رَّابِيَةً
तो उन लोगों ने अपने परवरदिगार के रसूल की नाफ़रमानी की तो ख़ुदा ने भी उनकी बड़ी सख्ती से ले दे कर डाली
11إِنَّا لَمَّا طَغَى الْمَاءُ حَمَلْنَاكُمْ فِي الْجَارِيَةِ
जब पानी चढ़ने लगा तो हमने तुमको कशती पर सवार किया
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अनुवाद — अल-हाक़्का 9

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Tuesday, August 18, 2026

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