अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- فَعَصَوْا – उन्होंने नाफ़रमानी की, अवज्ञा की।
- رَسُولَ رَبِّهِمْ – अपने रब के पैग़म्बर की।
- فَأَخَذَهُمْ – तो उन्हें पकड़ लिया (अज़ाब ने)।
- أَخْذَةً رَّابِيَةً – ऐसी पकड़ जो बढ़ती हुई, अत्यंत सख्त और भयानक हो।
तफ़सीर (व्याख्या):
इन आयात में अल्लाह तआला उन क़ौमों के अंजाम को बयान कर रहा है जिन्होंने अपने रसूलों को झुठलाया और उनकी नाफ़रमानी की। जब फ़िरऔन और उससे पहले की क़ौमें — जैसे आद, समूद, और क़ौमे-लूत — अपने रब के भेजे हुए पैग़म्बरों के सामने सरकश बन गईं, उनकी बात न मानी और उन्हें झुठलाया, तो अल्लाह ने उन्हें ऐसी पकड़ में लिया जो हद से बढ़ी हुई थी — यानी अज़ाब उन पर इस कद्र टूट पड़ा कि उनका कोई बचाव न कर सका। यह पकड़ सिर्फ़ सज़ा नहीं थी, बल्कि उसमें इज़ाफ़ा किया गया — हर गुनाह के बदले उन्हें कई गुना अज़ाब दिया गया।
यह अल्लाह का क़ानून है जो कभी नहीं बदलता — जो कोई रसूल की नाफ़रमानी करता है, वह अल्लाह की पकड़ से नहीं बच सकता। लेकिन साथ ही यह भी सच है कि अल्लाह रहीम और करीम है। उसने हर क़ौम के पास रसूल भेजे ताकि वे सीधा रास्ता पा सकें। जिन्होंने माना, वे बच गए; और जिन्होंने नाफ़रमानी की, वे इस लिए पकड़े गए कि उनके पास हुज्जत (प्रमाण) पूरी हो चुकी थी।
इस आयत से हमें सबक़ लेना चाहिए कि अल्लाह के हुक्म के सामने सर झुकाना ही कामयाबी है। रसूलों की ताबेदारी में ही दुनिया और आख़िरत की भलाई है। जो लोग अल्लाह के पैग़ाम को ठुकराते हैं, वे अपने लिए तबाही का सामान करते हैं — चाहे वे कितने भी ताक़तवर क्यों न हों। अल्लाह की पकड़ से बड़ी कोई ताक़त नहीं, और उसकी रहमत से बड़ी कोई नेमत नहीं। आओ, हम उन बदक़िस्मत क़ौमों के अंजाम से सबक़ लें और अपने रब के हुक्मों पर चलने वाले बनें, ताकि हम उस अज़ाब से महफ़ूज़ रहें जिसका ज़िक्र इस आयत में किया गया है।
📜 आयत 8-12 — अल-हाक़्का
अनुवाद — अल-हाक़्का 10
सूरा अल-हाक़्का आयत 10 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : तो उन लोगों ने अपने परवरदिगार के रसूल की नाफ़रमानी…सूरा आयत 10/52 — अल-हाक़्का الحاقة (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-हाक़्का सुनें, अल-हाक़्का अनुवाद, अल-हाक़्का mp3, अल-हाक़्का pdf. आयत 8–12. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए








