Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- تِلْكَ الْقُرَىٰ: ये वे बस्तियाँ हैं जिनका उल्लेख पूर्व की आयतों में हुआ।
- نَقُصُّ عَلَيْكَ: हम आपको सुनाते हैं।
- أَنبَائِهَا: उनकी ख़बरें और वृतांत।
- بِالْبَيِّنَاتِ: स्पष्ट प्रमाणों और चमत्कारों के साथ।
- يَطْبَعُ اللَّهُ: अल्लाह मुहर लगा देता है (अर्थात् हृदय को बंद कर देता है)।
तफ़सीर (व्याख्या):
ये वे बस्तियाँ हैं जिनका ज़िक्र इससे पहले की आयतों में हुआ—नूह, हूद, सालेह, लूत और शुऐब (अलैहिमुस्सलाम) की क़ौमें। अल्लाह तआला अपने नबी ﷺ को उनकी ख़बरें सुना रहा है ताकि इनमें सबक़ और नसीहत हो। इन बस्तियों के लोगों के पास उनके रसूल स्पष्ट प्रमाणों और चमत्कारों के साथ आए, जो उनकी सच्चाई पर गवाह थे। लेकिन जब वे रसूल उनके पास आए, तो वे ईमान नहीं लाए—इसलिए नहीं कि उनके पास सबूत की कमी थी, बल्कि इसलिए कि उन्होंने पहले ही सत्य को झुठला दिया था और अपने हठ व अहंकार के कारण उसे स्वीकार करने से इनकार कर दिया था। उनके दिल सत्य के लिए बंद हो चुके थे। जिस प्रकार अल्लाह ने इन पिछली क़ौमों के काफ़िरों के दिलों पर मुहर लगा दी, उसी प्रकार वह आप ﷺ की क़ौम के उन काफ़िरों के दिलों पर भी मुहर लगा देता है जो सत्य को देखकर भी उसे झुठलाते हैं, और उन्हें ईमान की तौफ़ीक़ नहीं मिलती।
फ़ायदे (लाभ और शिक्षाएँ):
- इतिहास से सबक़: पिछली उम्मतों के वृतांत केवल कहानियाँ नहीं हैं, बल्कि उनमें इंसान के लिए गहरी नसीहत है कि सत्य को झुठलाने का अंजाम क्या होता है।
- रसूलों का आना प्रमाण के साथ: अल्लाह ने हर उम्मत में रसूलों को स्पष्ट प्रमाणों के साथ भेजा, ताकि किसी के पास बहाने की गुंजाइश न रहे। यह अल्लाह की न्यायपूर्ण व्यवस्था को दर्शाता है।
- हठ और अहंकार ईमान की रुकावट: जो लोग सत्य को जानकर भी उसे नहीं मानते, उनके दिल धीरे-धीरे सख्त हो जाते हैं और फिर वे ईमान की तौफ़ीक़ से महरूम हो जाते हैं। यह हमें सिखाता है कि सत्य के आगे नम्रता और विनम्रता रखें।
- अल्लाह की सुन्नत (व्यवस्था) में कोई बदलाव नहीं: जिस प्रकार पिछले काफ़िरों के दिलों पर मुहर लगाई गई, उसी प्रकार आज के काफ़िरों के साथ भी वही व्यवहार होगा। यह अल्लाह की अपरिवर्तनीय सुन्नत है।
- क़ुरआन की महानता: यह आयत क़ुरआन के जीवंत और सत्य वृतांतों की ओर इशारा करती है, जो नबी ﷺ को बताए गए, जो स्वयं इस बात का प्रमाण है कि यह अल्लाह की ओर से है।
📜 आयत 99-103 — सूरा अल-आराफ
अनुवाद — अल-आराफ 101
सूरा अल-आराफ आयत 101 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : (ऐ रसूल) ये चन्द बस्तियाँ हैं जिन के हालात हम…सूरा आयत 101/206 — सूरा अल-आराफ الأعراف (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अल-आराफ सुनें, सूरा अल-आराफ अनुवाद, सूरा अल-आराफ mp3, सूरा अल-आराफ pdf. आयत 99–103. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Monday, September 28, 2026
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