अल-आराफ · 101/206
अनुवाद उच्चारण — अल-आराफ
تِلۡكَ ٱلۡقُرَىٰ نَقُصُّ عَلَيۡكَ مِنۡ أَنۢبَآئِهَاۚ وَلَقَدۡ جَآءَتۡهُمۡ رُسُلُهُم بِٱلۡبَيِّنَٰتِ فَمَا كَانُواْ لِيُؤۡمِنُواْ بِمَا كَذَّبُواْ مِن قَبۡلُۚ كَذَٰلِكَ يَطۡبَعُ ٱللَّهُ عَلَىٰ قُلُوبِ ٱلۡكَٰفِرِينَ  ۝١٠١
Tilkal quraa naqussu `alaika min ambaaa`ihaa; wa laqad jaaa`at hum Rusuluhum bilbaiyinaati famaa kaanoo liyu`minoo bimaa kazzaboo min qabl; kazaalika yatba`ul laahu `alaa quloobil kaafireen
📖 हिंदी अर्थ
(ऐ रसूल) ये चन्द बस्तियाँ हैं जिन के हालात हम तुमसे बयान करते हैं और इसमें तो शक़ ही नहीं कि उनके पैग़म्बर उनके पास वाजेए व रौशन मौजिज़े लेकर आए मगर ये लोग जिसके पहले झुठला चुके थे उस पर भला काहे को ईमान लाने वाले थे ख़ुदा यूं काफिरों के दिलों पर अलामत मुकर्रर कर देता है (कि ये ईमान न लाएँगें)
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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • تِلْكَ الْقُرَىٰ: ये वे बस्तियाँ हैं जिनका उल्लेख पूर्व की आयतों में हुआ।
  • نَقُصُّ عَلَيْكَ: हम आपको सुनाते हैं।
  • أَنبَائِهَا: उनकी ख़बरें और वृतांत।
  • بِالْبَيِّنَاتِ: स्पष्ट प्रमाणों और चमत्कारों के साथ।
  • يَطْبَعُ اللَّهُ: अल्लाह मुहर लगा देता है (अर्थात् हृदय को बंद कर देता है)।

तफ़सीर (व्याख्या):

ये वे बस्तियाँ हैं जिनका ज़िक्र इससे पहले की आयतों में हुआ—नूह, हूद, सालेह, लूत और शुऐब (अलैहिमुस्सलाम) की क़ौमें। अल्लाह तआला अपने नबी ﷺ को उनकी ख़बरें सुना रहा है ताकि इनमें सबक़ और नसीहत हो। इन बस्तियों के लोगों के पास उनके रसूल स्पष्ट प्रमाणों और चमत्कारों के साथ आए, जो उनकी सच्चाई पर गवाह थे। लेकिन जब वे रसूल उनके पास आए, तो वे ईमान नहीं लाए—इसलिए नहीं कि उनके पास सबूत की कमी थी, बल्कि इसलिए कि उन्होंने पहले ही सत्य को झुठला दिया था और अपने हठ व अहंकार के कारण उसे स्वीकार करने से इनकार कर दिया था। उनके दिल सत्य के लिए बंद हो चुके थे। जिस प्रकार अल्लाह ने इन पिछली क़ौमों के काफ़िरों के दिलों पर मुहर लगा दी, उसी प्रकार वह आप ﷺ की क़ौम के उन काफ़िरों के दिलों पर भी मुहर लगा देता है जो सत्य को देखकर भी उसे झुठलाते हैं, और उन्हें ईमान की तौफ़ीक़ नहीं मिलती।

फ़ायदे (लाभ और शिक्षाएँ):

  1. इतिहास से सबक़: पिछली उम्मतों के वृतांत केवल कहानियाँ नहीं हैं, बल्कि उनमें इंसान के लिए गहरी नसीहत है कि सत्य को झुठलाने का अंजाम क्या होता है।
  2. रसूलों का आना प्रमाण के साथ: अल्लाह ने हर उम्मत में रसूलों को स्पष्ट प्रमाणों के साथ भेजा, ताकि किसी के पास बहाने की गुंजाइश न रहे। यह अल्लाह की न्यायपूर्ण व्यवस्था को दर्शाता है।
  3. हठ और अहंकार ईमान की रुकावट: जो लोग सत्य को जानकर भी उसे नहीं मानते, उनके दिल धीरे-धीरे सख्त हो जाते हैं और फिर वे ईमान की तौफ़ीक़ से महरूम हो जाते हैं। यह हमें सिखाता है कि सत्य के आगे नम्रता और विनम्रता रखें।
  4. अल्लाह की सुन्नत (व्यवस्था) में कोई बदलाव नहीं: जिस प्रकार पिछले काफ़िरों के दिलों पर मुहर लगाई गई, उसी प्रकार आज के काफ़िरों के साथ भी वही व्यवहार होगा। यह अल्लाह की अपरिवर्तनीय सुन्नत है।
  5. क़ुरआन की महानता: यह आयत क़ुरआन के जीवंत और सत्य वृतांतों की ओर इशारा करती है, जो नबी ﷺ को बताए गए, जो स्वयं इस बात का प्रमाण है कि यह अल्लाह की ओर से है।
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📜 आयत 99-103 — अल-आराफ

99أَفَأَمِنُواْ مَكۡرَ ٱللَّهِۚ فَلَا يَأۡمَنُ مَكۡرَ ٱللَّهِ إِلَّا ٱلۡقَوۡمُ ٱلۡخَٰسِرُونَ 
तो क्या ये लोग ख़ुदा की तद्बीर से ढीट हो गए हैं तो (याद रहे कि) ख़ुदा के दॉव से घाटा उठाने वाले ही निडर हो बैठे हैं
100أَوَلَمۡ يَهۡدِ لِلَّذِينَ يَرِثُونَ ٱلۡأَرۡضَ مِنۢ بَعۡدِ أَهۡلِهَآ أَن لَّوۡ نَشَآءُ أَصَبۡنَٰهُم بِذُنُوبِهِمۡۚ وَنَطۡبَعُ عَلَىٰ قُلُوبِهِمۡ فَهُمۡ لَا يَسۡمَعُونَ 
क्या जो लोग अहले ज़मीन के बाद ज़मीन के वारिस (व मालिक) होते हैं उन्हें ये मालूम नहीं कि अगर हम चाहते तो उनके गुनाहों की बदौलत उनको मुसीबत में फँसा देते (मगर ये लोग ऐसे नासमझ हैं कि गोया) उनके दिलों पर हम ख़ुद (मोहर कर देते हैं कि ये लोग कुछ सुनते ही नहीं
101تِلۡكَ ٱلۡقُرَىٰ نَقُصُّ عَلَيۡكَ مِنۡ أَنۢبَآئِهَاۚ وَلَقَدۡ جَآءَتۡهُمۡ رُسُلُهُم بِٱلۡبَيِّنَٰتِ فَمَا كَانُواْ لِيُؤۡمِنُواْ بِمَا كَذَّبُواْ مِن قَبۡلُۚ كَذَٰلِكَ يَطۡبَعُ ٱللَّهُ عَلَىٰ قُلُوبِ ٱلۡكَٰفِرِينَ 
(ऐ रसूल) ये चन्द बस्तियाँ हैं जिन के हालात हम तुमसे बयान करते हैं और इसमें तो शक़ ही नहीं कि उनके पैग़म्बर उनके पास वाजेए व रौशन मौजिज़े लेकर आए मगर ये लोग जिसके पहले झुठला चुके थे उस पर भला काहे को ईमान लाने वाले थे ख़ुदा यूं काफिरों के दिलों पर अलामत मुकर्रर कर देता है (कि ये ईमान न लाएँगें)
102وَمَا وَجَدۡنَا لِأَكۡثَرِهِم مِّنۡ عَهۡدٍۖ وَإِن وَجَدۡنَآ أَكۡثَرَهُمۡ لَفَٰسِقِينَ 
और हमने तो उसमें से अक्सरों का एहद (ठीक) न पाया और हमने उनमें से अक्सरों को बदकार ही पाया
103ثُمَّ بَعَثۡنَا مِنۢ بَعۡدِهِم مُّوسَىٰ بِـَٔايَٰتِنَآ إِلَىٰ فِرۡعَوۡنَ وَمَلَإِيْهِۦ فَظَلَمُواْ بِهَاۖ فَٱنظُرۡ كَيۡفَ كَانَ عَٰقِبَةُ ٱلۡمُفۡسِدِينَ 
फिर हमने (उन पैग़म्बरान मज़कूरीन के बाद) मूसा को फिरऔन और उसके सरदारों के पास मौजिज़े अता करके (रसूल बनाकर) भेजा तो उन लोगों ने उन मौजिज़ात के साथ (बड़ी बड़ी) शरारतें की पस ज़रा ग़ौर तो करो कि आख़िर फसादियों का अन्जाम क्या हुआ
अल-आराफकुरान सूची
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अनुवाद — अल-आराफ 101

सूरा आयत 101/206 — अल-आराफ الأعراف (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-आराफ सुनें, अल-आराफ अनुवाद, अल-आराफ mp3, अल-आराफ pdf. आयत 99–103. हिंदी अर्थ: اردو.




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Tuesday, August 18, 2026

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