अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- لَا يَسْتَطِيعُونَ: वे सामर्थ्य नहीं रखते
- نَصْرًا: सहायता करना
- أَنفُسَهُمْ يَنصُرُونَ: स्वयं अपनी सहायता करना
व्याख्या:
यह आयत उन मूर्तियों और झूठे देवताओं की विवशता और लाचारी को स्पष्ट करती है जिन्हें मुश्किलों में लोग पुकारते हैं और जिनकी पूजा करते हैं। अल्लाह तआला फ़रमाता है कि ये मूर्तियाँ न तो अपने पूजा करने वालों की कोई सहायता कर सकती हैं, और न ही स्वयं अपनी ही रक्षा कर सकती हैं। यदि कोई इन्हें तोड़ दे, इन्हें नुक़सान पहुँचाए, या इन्हें गिरा दे, तो ये अपनी रक्षा के लिए कुछ नहीं कर सकतीं। यहाँ तक कि इनकी पूजा करने वाले ही इन्हें गिरने से बचाते हैं, इन्हें उठाते हैं, इनकी देखभाल करते हैं। अर्थात् पूजा करने वाला अपने देवता से अधिक ताक़तवर है, क्योंकि वह देवता की रक्षा करता है, जबकि देवता उसकी कोई सहायता नहीं कर सकता। जब हाल यह है कि ये मूर्तियाँ न किसी की मदद कर सकती हैं और न अपनी ही मदद कर सकती हैं, तो फिर इन्हें पूजा के योग्य कैसे ठहराया जा सकता है? यह सबसे बड़ा अन्याय और सबसे बड़ी मूर्खता है कि इंसान ऐसी बेबस चीज़ों को अल्लाह के साथ साझीदार बनाए।
फ़ायदे:
- इस आयत से हमें यह शिक्षा मिलती है कि सच्ची सहायता और मदद केवल अल्लाह ही से माँगनी चाहिए, क्योंकि वही सब कुछ कर सकता है।
- हमें अपनी अक़्ल का इस्तेमाल करना चाहिए और उन चीज़ों की पूजा नहीं करनी चाहिए जो न तो किसी को फ़ायदा पहुँचा सकें और न नुक़सान से बचा सकें।
- यह आयत हमें तौहीद (एकेश्वरवाद) की ओर बुलाती है और शिर्क (बहुदेववाद) की बुराई से आगाह करती है।
- इस्लाम एक ऐसा दीन है जो इंसान को बेबस और लाचार चीज़ों की गुलामी से आज़ाद करके उस सर्वशक्तिमान अल्लाह की इबादत की ओर ले जाता है जो सुनता है, देखता है और हर मुश्किल में मदद कर सकता है।
📜 आयत 190-194 — अल-आराफ
अनुवाद — अल-आराफ 192
सूरा अल-आराफ आयत 192 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और न उनकी मदद की कुदरत रखते हैं और न…सूरा आयत 192/206 — अल-आराफ الأعراف (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-आराफ सुनें, अल-आराफ अनुवाद, अल-आराफ mp3, अल-आराफ pdf. आयत 190–194. हिंदी अर्थ: اردو.
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Tuesday, August 18, 2026
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