Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- वली (وَلِيِّ) – मित्र, सहायक, संरक्षक और कार्य संभालने वाला।
- नज़्ज़लल किताब (نَزَّلَ الْكِتَابَ) – जिसने किताब (क़ुरआन) उतारा।
- यतवल्ला (يَتَوَلَّى) – वह संभालता है, संरक्षण करता है, सहायता करता है।
- सालिहीन (الصَّالِحِينَ) – नेक लोग, जो अल्लाह के साथ किसी को साझी नहीं बनाते और उसकी आज्ञा का पालन करते हैं।
तफ़सीर (व्याख्या):
यह आयत नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) की ओर से उन लोगों को स्पष्ट उत्तर है जो उन्हें डराते थे कि वे मूर्तियों की पूजा करने से बाज़ न आएँ तो उन्हें बुरा अंजाम भुगतना पड़ेगा। अल्लाह तआला ने अपने नबी को सिखाया कि वे कहें: "मेरा मित्र, सहायक और संरक्षक अल्लाह है – वही जिसने मुझ पर क़ुरआन उतारा। मैं उसी पर भरोसा करता हूँ, उसी से सहायता माँगता हूँ, और तुम्हारी मूर्तियों या तुम्हारी धमकियों से मुझे कोई भय नहीं। वही मेरी रक्षा करता है और मुझे तुम्हारे नुक़्सान से बचाता है।"
फिर अल्लाह ने यह भी बताया कि यह सिर्फ़ नबी के साथ ख़ास नहीं है, बल्कि उसका यह संरक्षण और सहायता उन सभी नेक लोगों के साथ है जो उसकी इबादत करते हैं, उसके साथ किसी को साझी नहीं बनाते, और उसकी राह में चलते हैं। अल्लाह उन्हें संभालता है, उनकी हिफ़ाज़त करता है, और उन्हें उनके दुश्मनों पर विजय प्रदान करता है। वह उन्हें कभी अकेला नहीं छोड़ता और न ही उन्हें निराश करता है।
फ़ायदे और सबक़:
- अल्लाह पर भरोसा ही असली ताक़त है – जब इंसान को यक़ीन हो जाए कि उसका संरक्षक अल्लाह है, तो उसे किसी इंसान या ताक़त का डर नहीं रहता। यही वह चीज़ है जो मुसलमान को बहादुर और साहसी बनाती है।
- क़ुरआन अल्लाह की तरफ़ से है – यह आयत इस बात की गवाही देती है कि क़ुरआन अल्लाह का उतारा हुआ कलाम है, और इस पर अमल करने वालों को अल्लाह की ख़ास निगरानी हासिल होती है।
- नेकी का इनाम अल्लाह की संगत है – अल्लाह उन लोगों को प्यार करता है और उनका साथ देता है जो नेक हैं। यह सबसे बड़ी ख़ुशख़बरी है कि अगर हम सीधी राह पर चलें, तो अल्लाह ख़ुद हमारा संरक्षक बन जाता है।
- डर से मुक्ति – इस आयत से सीख मिलती है कि सच्चे मोमिन को किसी मख़लूक़ (प्राणी) का डर नहीं होता, चाहे वह कितना भी ताक़तवर क्यों न हो, क्योंकि उसका भरोसा उस ज़ात पर है जो सबसे ऊपर और सबसे ताक़तवर है।
- अल्लाह की राह पर चलने वालों के लिए ख़ुशख़बरी – यह आयत हर उस इंसान के लिए उम्मीद की किरण है जो अल्लाह की इबादत करता है और उसकी राह में मुश्किलों का सामना करता है – अल्लाह उसे अकेला नहीं छोड़ेगा।
📜 आयत 194-198 — सूरा अल-आराफ
अनुवाद — अल-आराफ 196
सूरा अल-आराफ आयत 196 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : (फिर देखो मेरा क्या बना सकते हो) बेशक मेरा मालिक…सूरा आयत 196/206 — सूरा अल-आराफ الأعراف (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अल-आराफ सुनें, सूरा अल-आराफ अनुवाद, सूरा अल-आराफ mp3, सूरा अल-आराफ pdf. आयत 194–198. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Wednesday, September 30, 2026
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