अल-आराफ · 196/206
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-आराफ
إِنَّ وَلِيِّيَ اللَّهُ الَّذِي نَزَّلَ الْكِتَابَ ۖ وَهُوَ يَتَوَلَّى الصَّالِحِينَ ۝١٩٦
Inna waliyyial laahul lazee nazzalal Kitaaba wa Huwa yatawallas saaliheen
📖 हिंदी अर्थ
(फिर देखो मेरा क्या बना सकते हो) बेशक मेरा मालिक व मुमताज़ तो बस ख़ुदा है जिस ने किताब क़ुरान को नाज़िल फरमाया और वही (अपने) नेक बन्दों का हाली (मददगार) है

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • वली (وَلِيِّ) – मित्र, सहायक, संरक्षक और कार्य संभालने वाला।
  • नज़्ज़लल किताब (نَزَّلَ الْكِتَابَ) – जिसने किताब (क़ुरआन) उतारा।
  • यतवल्ला (يَتَوَلَّى) – वह संभालता है, संरक्षण करता है, सहायता करता है।
  • सालिहीन (الصَّالِحِينَ) – नेक लोग, जो अल्लाह के साथ किसी को साझी नहीं बनाते और उसकी आज्ञा का पालन करते हैं।

तफ़सीर (व्याख्या):

यह आयत नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) की ओर से उन लोगों को स्पष्ट उत्तर है जो उन्हें डराते थे कि वे मूर्तियों की पूजा करने से बाज़ न आएँ तो उन्हें बुरा अंजाम भुगतना पड़ेगा। अल्लाह तआला ने अपने नबी को सिखाया कि वे कहें: "मेरा मित्र, सहायक और संरक्षक अल्लाह है – वही जिसने मुझ पर क़ुरआन उतारा। मैं उसी पर भरोसा करता हूँ, उसी से सहायता माँगता हूँ, और तुम्हारी मूर्तियों या तुम्हारी धमकियों से मुझे कोई भय नहीं। वही मेरी रक्षा करता है और मुझे तुम्हारे नुक़्सान से बचाता है।"

फिर अल्लाह ने यह भी बताया कि यह सिर्फ़ नबी के साथ ख़ास नहीं है, बल्कि उसका यह संरक्षण और सहायता उन सभी नेक लोगों के साथ है जो उसकी इबादत करते हैं, उसके साथ किसी को साझी नहीं बनाते, और उसकी राह में चलते हैं। अल्लाह उन्हें संभालता है, उनकी हिफ़ाज़त करता है, और उन्हें उनके दुश्मनों पर विजय प्रदान करता है। वह उन्हें कभी अकेला नहीं छोड़ता और न ही उन्हें निराश करता है।

फ़ायदे और सबक़:

  1. अल्लाह पर भरोसा ही असली ताक़त है – जब इंसान को यक़ीन हो जाए कि उसका संरक्षक अल्लाह है, तो उसे किसी इंसान या ताक़त का डर नहीं रहता। यही वह चीज़ है जो मुसलमान को बहादुर और साहसी बनाती है।
  2. क़ुरआन अल्लाह की तरफ़ से है – यह आयत इस बात की गवाही देती है कि क़ुरआन अल्लाह का उतारा हुआ कलाम है, और इस पर अमल करने वालों को अल्लाह की ख़ास निगरानी हासिल होती है।
  3. नेकी का इनाम अल्लाह की संगत है – अल्लाह उन लोगों को प्यार करता है और उनका साथ देता है जो नेक हैं। यह सबसे बड़ी ख़ुशख़बरी है कि अगर हम सीधी राह पर चलें, तो अल्लाह ख़ुद हमारा संरक्षक बन जाता है।
  4. डर से मुक्ति – इस आयत से सीख मिलती है कि सच्चे मोमिन को किसी मख़लूक़ (प्राणी) का डर नहीं होता, चाहे वह कितना भी ताक़तवर क्यों न हो, क्योंकि उसका भरोसा उस ज़ात पर है जो सबसे ऊपर और सबसे ताक़तवर है।
  5. अल्लाह की राह पर चलने वालों के लिए ख़ुशख़बरी – यह आयत हर उस इंसान के लिए उम्मीद की किरण है जो अल्लाह की इबादत करता है और उसकी राह में मुश्किलों का सामना करता है – अल्लाह उसे अकेला नहीं छोड़ेगा।


📜 आयत 194-198 — सूरा अल-आराफ

194إِنَّ الَّذِينَ تَدْعُونَ مِن دُونِ اللَّهِ عِبَادٌ أَمْثَالُكُمْ ۖ فَادْعُوهُمْ فَلْيَسْتَجِيبُوا لَكُمْ إِن كُنتُمْ صَادِقِينَ
बेशक वह लोग जिनकी तुम ख़ुदा को छोड़कर हाजत करते हो वह (भी) तुम्हारी तरह (ख़ुदा के) बन्दे हैं भला तुम उन्हें पुकार के देखो तो अगर तुम सच्चे हो तो वह तुम्हारी कुछ सुन लें
195أَلَهُمْ أَرْجُلٌ يَمْشُونَ بِهَا ۖ أَمْ لَهُمْ أَيْدٍ يَبْطِشُونَ بِهَا ۖ أَمْ لَهُمْ أَعْيُنٌ يُبْصِرُونَ بِهَا ۖ أَمْ لَهُمْ آذَانٌ يَسْمَعُونَ بِهَا ۗ قُلِ ادْعُوا شُرَكَاءَكُمْ ثُمَّ كِيدُونِ فَلَا تُنظِرُونِ
क्या उनके ऐसे पॉव भी हैं जिनसे चल सकें या उनके ऐसे हाथ भी हैं जिनसे (किसी चीज़ को) पकड़ सके या उनकी ऐसी ऑखे भी है जिनसे देख सकें या उनके ऐसे कान हैं जिनसे सुन सकें (ऐ रसूल उन लोगों से) कह दो कि तुम अपने बनाए हुए शरीको को बुलाओ फिर सब मिलकर मुझ पर दॉव चले फिर (मुझे) मोहलत न दो
196إِنَّ وَلِيِّيَ اللَّهُ الَّذِي نَزَّلَ الْكِتَابَ ۖ وَهُوَ يَتَوَلَّى الصَّالِحِينَ
(फिर देखो मेरा क्या बना सकते हो) बेशक मेरा मालिक व मुमताज़ तो बस ख़ुदा है जिस ने किताब क़ुरान को नाज़िल फरमाया और वही (अपने) नेक बन्दों का हाली (मददगार) है
197وَالَّذِينَ تَدْعُونَ مِن دُونِهِ لَا يَسْتَطِيعُونَ نَصْرَكُمْ وَلَا أَنفُسَهُمْ يَنصُرُونَ
और वह लोग (बुत) जिन्हें तुम ख़ुदा के सिवा (अपनी मदद को) पुकारते हो न तो वह तुम्हारी मदद की कुदरत रखते हैं और न ही अपनी मदद कर सकते हैं
198وَإِن تَدْعُوهُمْ إِلَى الْهُدَىٰ لَا يَسْمَعُوا ۖ وَتَرَاهُمْ يَنظُرُونَ إِلَيْكَ وَهُمْ لَا يُبْصِرُونَ
और अगर उन्हें हिदायत की तरफ बुलाएगा भी तो ये सुन ही नहीं सकते और तू तो समझता है कि वह तुझे (ऑखें खोले) देख रहे हैं हालॉकि वह देखते नहीं
अल-आराफकुरान सूची
206आयत
मक्कीअवतरण स्थान
196आयत

अनुवाद — अल-आराफ 196

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Wednesday, September 30, 2026

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