अल-आराफ · 22/206
अनुवाद उच्चारण — अल-आराफ
فَدَلَّاهُمَا بِغُرُورٍ ۚ فَلَمَّا ذَاقَا الشَّجَرَةَ بَدَتْ لَهُمَا سَوْآتُهُمَا وَطَفِقَا يَخْصِفَانِ عَلَيْهِمَا مِن وَرَقِ الْجَنَّةِ ۖ وَنَادَاهُمَا رَبُّهُمَا أَلَمْ أَنْهَكُمَا عَن تِلْكُمَا الشَّجَرَةِ وَأَقُل لَّكُمَا إِنَّ الشَّيْطَانَ لَكُمَا عَدُوٌّ مُّبِينٌ ۝٢٢
Fadallaahumaa bighuroor; falammaa zaaqash shajarata badat lahumaa saw aatuhumaa wa tafiqaa yakhsifaani `alaihimaa minw waraqil jannati wa naadaahumaa Rabbuhumaaa alam anhakumaa `an tilkumash shajarati wa aqul lakumaaa innash Shaitaana lakumaa `aduwwum mubeen
📖 हिंदी अर्थ
ग़रज़ धोखे से उन दोनों को उस (के खाने) की तरफ ले गया ग़रज़ जो ही उन दोनों ने इस दरख्त (के फल) को चखा कि (बेहश्ती लिबास गिर गया और समझ पैदा हुई) उन पर उनकी शर्मगाहें ज़ाहिर हो गयीं और बेहश्त के पत्ते (तोड़ जोड़ कर) अपने ऊपर ढापने लगे तब उनको परवरदिगार ने उनको आवाज़ दी कि क्यों मैंने तुम दोनों को इस दरख्त के पास (जाने) से मना नहीं किया था और (क्या) ये न जता दिया था कि शैतान तुम्हारा यक़ीनन खुला हुआ दुश्मन है

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • فَدَلَّاهُمَا (फ़दल्लाहुमा): उन दोनों को उनके ऊँचे पद से गिरा दिया।
  • بِغُرُورٍ (बिग़ुरूर): धोखे और झूठे वादों के द्वारा।
  • بَدَتْ (बदत): प्रकट हो गई।
  • سَوْآتُهُمَا (सव्आतुहुमा): उन दोनों के शर्मगाह (गुप्त अंग)।
  • طَفِقَا (तफ़िक़ा): वे दोनों लगे / आरंभ किया।
  • يَخْصِفَانِ (यख़्सिफ़ानि): वे दोनों पत्तों को जोड़-जोड़कर चिपका रहे थे (एक को दूसरे के ऊपर रखना)।

व्याख्या:

इस आयत में बताया गया है कि शैतान ने आदम (अलैहिस्सलाम) और हव्वा (अलैहिस्सलाम) को अपने झूठी क़समों और धोखे से बहकाया, और उन्हें उस ऊँचे पद से गिरा दिया जिस पर अल्लाह ने उन्हें रखा था। उसने उन्हें यह वादा किया था कि यह पेड़ उन्हें अमर बना देगा और उनका राज्य कभी समाप्त न होगा, लेकिन यह सब झूठ था। जब उन दोनों ने उस पेड़ का फल चखा, तो उनके शर्मगाह (गुप्त अंग) खुल गए और उनका वह वस्त्र जो अल्लाह ने उन्हें पहनाया था, छिन गया। तब वे दोनों शर्मिंदा होकर जन्नत के पत्तों को जोड़-जोड़कर अपने शरीर को ढकने लगे। उसी समय उनके रब ने उन्हें पुकारा और फटकारते हुए फ़रमाया: "क्या मैंने तुम दोनों को उस पेड़ के पास जाने से मना नहीं किया था? और क्या मैंने तुमसे नहीं कहा था कि शैतान तुम्हारा खुला दुश्मन है?" यह पुकार उनके लिए एक कड़ी चेतावनी और अफसोस का कारण बनी, क्योंकि उन्होंने अल्लाह की स्पष्ट नसीहत के बावजूद शैतान की बात मान ली।


फ़ायदे (सबक):

  1. शैतान की दुश्मनी स्पष्ट है: यह आयत हमें सिखाती है कि शैतान इंसान का खुला दुश्मन है और वह हर हाल में उसे बहकाने की कोशिश करता है। इसलिए हमें उसके धोखों से हमेशा सावधान रहना चाहिए और अल्लाह की आज्ञा को ही सबसे ऊपर मानना चाहिए।
  2. पाप का परिणाम शर्म और पछतावा है: जब इंसान अल्लाह की नाफ़रमानी करता है, तो उसे शर्मिंदगी और पछतावा उठाना पड़ता है। यहाँ आदम और हव्वा (अलैहिमुस्सलाम) को भी अपनी गलती का एहसास हुआ और वे तुरंत ढकने की कोशिश करने लगे, जो दिखाता है कि पाप के बाद इंसान का फ़ितरत (स्वभाव) उसे शर्म और सुधार की ओर ले जाता है।
  3. अल्लाह की पुकार रहमत भरी है: अल्लाह ने उन्हें फटकारते हुए भी उन्हें रास्ता दिखाया और उनकी तौबा क़बूल की। यह हमें सिखाता है कि अल्लाह अपने बंदों से बहुत प्यार करता है और गलती के बाद भी अगर वे सच्चे दिल से तौबा करें, तो वह उन्हें माफ़ कर देता है।
  4. शर्म और हया की अहमियत: इस आयत से पता चलता है कि शर्मगाह ढकना इंसान की फ़ितरत है और यह हमेशा से एक अच्छी चीज़ रही है। इसलिए हमें अपने कपड़ों और व्यवहार में शर्म और हया को अपनाना चाहिए।
  5. अल्लाह की नसीहत को गंभीरता से लेना: अल्लाह ने आदम (अलैहिस्सलाम) को पहले ही चेतावनी दे दी थी, लेकिन शैतान के धोखे में आकर उन्होंने उसे भुला दिया। यह हमें सिखाता है कि अल्लाह की हिदायतों को कभी हल्के में नहीं लेना चाहिए, चाहे हालात कैसे भी हों।


📜 आयत 20-24 — अल-आराफ

20فَوَسْوَسَ لَهُمَا الشَّيْطَانُ لِيُبْدِيَ لَهُمَا مَا وُورِيَ عَنْهُمَا مِن سَوْآتِهِمَا وَقَالَ مَا نَهَاكُمَا رَبُّكُمَا عَنْ هَٰذِهِ الشَّجَرَةِ إِلَّا أَن تَكُونَا مَلَكَيْنِ أَوْ تَكُونَا مِنَ الْخَالِدِينَ
फिर शैतान ने उन दोनों को वसवसा (शक) दिलाया ताकि (नाफरमानी की वजह से) उनके अस्तर की चीज़े जो उनकी नज़र से बेहश्ती लिबास की वजह से पोशीदा थी खोल डाले कहने लगा कि तुम्हारे परवरदिगार ने दोनों को दरख्त (के फल खाने) से सिर्फ इसलिए मना किया है (कि मुबादा) तुम दोनों फरिश्ते बन जाओ या हमेशा (ज़िन्दा) रह जाओ
21وَقَاسَمَهُمَا إِنِّي لَكُمَا لَمِنَ النَّاصِحِينَ
और उन दोनों के सामने क़समें खायीं कि मैं यक़ीनन तुम्हारा ख़ैर ख्वाह हूँ
22فَدَلَّاهُمَا بِغُرُورٍ ۚ فَلَمَّا ذَاقَا الشَّجَرَةَ بَدَتْ لَهُمَا سَوْآتُهُمَا وَطَفِقَا يَخْصِفَانِ عَلَيْهِمَا مِن وَرَقِ الْجَنَّةِ ۖ وَنَادَاهُمَا رَبُّهُمَا أَلَمْ أَنْهَكُمَا عَن تِلْكُمَا الشَّجَرَةِ وَأَقُل لَّكُمَا إِنَّ الشَّيْطَانَ لَكُمَا عَدُوٌّ مُّبِينٌ
ग़रज़ धोखे से उन दोनों को उस (के खाने) की तरफ ले गया ग़रज़ जो ही उन दोनों ने इस दरख्त (के फल) को चखा कि (बेहश्ती लिबास गिर गया और समझ पैदा हुई) उन पर उनकी शर्मगाहें ज़ाहिर हो गयीं और बेहश्त के पत्ते (तोड़ जोड़ कर) अपने ऊपर ढापने लगे तब उनको परवरदिगार ने उनको आवाज़ दी कि क्यों मैंने तुम दोनों को इस दरख्त के पास (जाने) से मना नहीं किया था और (क्या) ये न जता दिया था कि शैतान तुम्हारा यक़ीनन खुला हुआ दुश्मन है
23قَالَا رَبَّنَا ظَلَمْنَا أَنفُسَنَا وَإِن لَّمْ تَغْفِرْ لَنَا وَتَرْحَمْنَا لَنَكُونَنَّ مِنَ الْخَاسِرِينَ
ये दोनों अर्ज क़रने लगे ऐ हमारे पालने वाले हमने अपना आप नुकसान किया और अगर तू हमें माफ न फरमाएगा और हम पर रहम न करेगा तो हम बिल्कुल घाटे में ही रहेगें
24قَالَ اهْبِطُوا بَعْضُكُمْ لِبَعْضٍ عَدُوٌّ ۖ وَلَكُمْ فِي الْأَرْضِ مُسْتَقَرٌّ وَمَتَاعٌ إِلَىٰ حِينٍ
हुक्म हुआ तुम (मियां बीबी शैतान) सब के सब बेहशत से नीचे उतरो तुममें से एक का एक दुश्मन है और (एक ख़ास) वक्त तक तुम्हारा ज़मीन में ठहराव (ठिकाना) और ज़िन्दगी का सामना है
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अनुवाद — अल-आराफ 22

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Tuesday, August 18, 2026

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