अल-आराफ · 21/206
अनुवाद उच्चारण — अल-आराफ
وَقَاسَمَهُمَا إِنِّي لَكُمَا لَمِنَ النَّاصِحِينَ ۝٢١
Wa qaasamahumaaa innee lakumaa laminan naasiheen
📖 हिंदी अर्थ
और उन दोनों के सामने क़समें खायीं कि मैं यक़ीनन तुम्हारा ख़ैर ख्वाह हूँ

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • وَ قَاسَمَهُمَا: उन दोनों (आदम और हव्वा) के सामने क़सम खाई, यानी भगवान की क़सम खाकर उन्हें यक़ीन दिलाया।
  • لَمِنَ النَّاصِحِينَ: निश्चित रूप से मैं तुम दोनों का भला चाहने वालों में से हूँ।

तफ़सीर:

जब शैतान ने देखा कि आदम और हव्वा उसकी बात पर पूरी तरह यक़ीन नहीं कर रहे और उनके दिलों में झिझक है, तो उसने अपनी चाल का आख़िरी हथियार इस्तेमाल किया — उसने अल्लाह की क़सम खाकर उन दोनों से कहा: "मैं तुम दोनों का सच्चा शुभचिंतक हूँ।" उसने अपनी सलाह को सच्चा और अपने इरादे को ख़ालिस भलाई वाला साबित करने के लिए झूठी क़सम खाई। वह जानता था कि इंसान आम तौर पर क़सम को सच्चाई की गारंटी समझता है, इसलिए उसने इसी कमज़ोरी का फ़ायदा उठाया। यह पहला मौक़ा था जब किसी ने अल्लाह के नाम पर झूठी क़सम खाई — और यह झूठी क़सम शैतान की तरफ़ से थी, जो उसके धोखे की इंतिहा थी। उसने यह क़सम सिर्फ़ इसलिए खाई ताकि आदम और हव्वा का भरोसा जीत सके और उन्हें उस पेड़ के फल खाने पर मजबूर कर सके, जिससे अल्लाह ने उन्हें मना किया था।

फ़ायदे और सबक:

  1. शैतान का सबसे बड़ा हथियार झूठ और धोखा है — वह कभी-कभी अल्लाह की क़सम तक खा लेता है ताकि इंसान को गुमराह कर सके। इसलिए हर बात को सिर्फ़ क़सम की वजह से सच नहीं मान लेना चाहिए।
  2. यह आयत हमें सिखाती है कि क़सम एक बहुत बड़ी ज़िम्मेदारी है — अल्लाह के नाम पर झूठी क़सम खाना सबसे बड़े गुनाहों में से है, और शैतान ने इसी से इंसान को गुमराह करने की शुरुआत की।
  3. इंसान को चाहिए कि वह हर नसीहत और सलाह को अक़्ल और दिल से परखे, सिर्फ़ इसलिए न मान ले कि सामने वाला क़सम खा रहा है — क्योंकि धोखेबाज़ लोग क़समों का इस्तेमाल भरोसा जीतने के लिए करते हैं।
  4. यहाँ से हमें यह भी सबक मिलता है कि अल्लाह की नाफ़रमानी की तरफ़ ले जाने वाली हर बात — चाहे वह कितनी भी अच्छी लगे या कोई कितनी भी क़सम खाए — उसे क़बूल नहीं करना चाहिए। अल्लाह का हुक्म सबसे ऊपर है।
  5. यह आयत हमें शैतान की मक्कारी से बचने की ताक़त देती है और बताती है कि असली नसीहत और भलाई सिर्फ़ अल्लाह और उसके रसूल की तरफ़ से आती है — जो इंसान को जन्नत और खुशियों की राह दिखाती है, न कि गुमराही और हलाकत की तरफ़।


📜 आयत 19-23 — अल-आराफ

19وَيَا آدَمُ اسْكُنْ أَنتَ وَزَوْجُكَ الْجَنَّةَ فَكُلَا مِنْ حَيْثُ شِئْتُمَا وَلَا تَقْرَبَا هَٰذِهِ الشَّجَرَةَ فَتَكُونَا مِنَ الظَّالِمِينَ
और (आदम से कहा) ऐ आदम तुम और तुम्हारी बीबी (दोनों) बेहश्त में रहा सहा करो और जहाँ से चाहो खाओ (पियो) मगर (ख़बरदार) उस दरख्त के करीब न जाना वरना तुम अपना आप नुक़सान करोगे
20فَوَسْوَسَ لَهُمَا الشَّيْطَانُ لِيُبْدِيَ لَهُمَا مَا وُورِيَ عَنْهُمَا مِن سَوْآتِهِمَا وَقَالَ مَا نَهَاكُمَا رَبُّكُمَا عَنْ هَٰذِهِ الشَّجَرَةِ إِلَّا أَن تَكُونَا مَلَكَيْنِ أَوْ تَكُونَا مِنَ الْخَالِدِينَ
फिर शैतान ने उन दोनों को वसवसा (शक) दिलाया ताकि (नाफरमानी की वजह से) उनके अस्तर की चीज़े जो उनकी नज़र से बेहश्ती लिबास की वजह से पोशीदा थी खोल डाले कहने लगा कि तुम्हारे परवरदिगार ने दोनों को दरख्त (के फल खाने) से सिर्फ इसलिए मना किया है (कि मुबादा) तुम दोनों फरिश्ते बन जाओ या हमेशा (ज़िन्दा) रह जाओ
21وَقَاسَمَهُمَا إِنِّي لَكُمَا لَمِنَ النَّاصِحِينَ
और उन दोनों के सामने क़समें खायीं कि मैं यक़ीनन तुम्हारा ख़ैर ख्वाह हूँ
22فَدَلَّاهُمَا بِغُرُورٍ ۚ فَلَمَّا ذَاقَا الشَّجَرَةَ بَدَتْ لَهُمَا سَوْآتُهُمَا وَطَفِقَا يَخْصِفَانِ عَلَيْهِمَا مِن وَرَقِ الْجَنَّةِ ۖ وَنَادَاهُمَا رَبُّهُمَا أَلَمْ أَنْهَكُمَا عَن تِلْكُمَا الشَّجَرَةِ وَأَقُل لَّكُمَا إِنَّ الشَّيْطَانَ لَكُمَا عَدُوٌّ مُّبِينٌ
ग़रज़ धोखे से उन दोनों को उस (के खाने) की तरफ ले गया ग़रज़ जो ही उन दोनों ने इस दरख्त (के फल) को चखा कि (बेहश्ती लिबास गिर गया और समझ पैदा हुई) उन पर उनकी शर्मगाहें ज़ाहिर हो गयीं और बेहश्त के पत्ते (तोड़ जोड़ कर) अपने ऊपर ढापने लगे तब उनको परवरदिगार ने उनको आवाज़ दी कि क्यों मैंने तुम दोनों को इस दरख्त के पास (जाने) से मना नहीं किया था और (क्या) ये न जता दिया था कि शैतान तुम्हारा यक़ीनन खुला हुआ दुश्मन है
23قَالَا رَبَّنَا ظَلَمْنَا أَنفُسَنَا وَإِن لَّمْ تَغْفِرْ لَنَا وَتَرْحَمْنَا لَنَكُونَنَّ مِنَ الْخَاسِرِينَ
ये दोनों अर्ज क़रने लगे ऐ हमारे पालने वाले हमने अपना आप नुकसान किया और अगर तू हमें माफ न फरमाएगा और हम पर रहम न करेगा तो हम बिल्कुल घाटे में ही रहेगें
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अनुवाद — अल-आराफ 21

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Tuesday, August 18, 2026

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