अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- اهْبِطُوا: नीचे उतरो, उतर जाओ।
- بَعْضُكُمْ لِبَعْضٍ عَدُوٌّ: तुममें से एक-दूसरे के शत्रु होंगे।
- مُسْتَقَرٌّ: ठहरने की जगह, निवास स्थान।
- مَتَاعٌ: लाभ उठाने की चीज़ें, सांसारिक सुख-सामग्री।
- إِلَى حِينٍ: एक निश्चित समय तक, अर्थात् मृत्यु के समय तक।
व्याख्या:
जब आदम (अलैहिस्सलाम) और हव्वा ने उस पेड़ का फल खा लिया जो अल्लाह ने उन्हें मना किया था, और शैतान के बहकावे में आकर उनसे यह ग़लती हुई, तो अल्लाह तआला ने उन्हें जन्नत से नीचे उतरने का आदेश दिया। यह आदेश आदम, हव्वा और इब्लीस तीनों को संबोधित था। अल्लाह ने फ़रमाया: "तुम सब यहाँ से उतरो, अब तुम्हारे बीच आपस में दुश्मनी होगी—आदम और उनकी संतान एक तरफ़, और इब्लीस और उसके साथी दूसरी तरफ़। यह दुश्मनी तब तक जारी रहेगी जब तक दुनिया क़ायम है।"
फिर अल्लाह ने यह भी बताया कि धरती पर तुम्हारे लिए एक ठहरने की जगह है और जीवन-निर्वाह की सामग्री है—खाने-पीने की चीज़ें, कपड़े, घर, और अन्य सुख-साधन। यह सब कुछ एक निश्चित समय तक है, यानी तुम्हारी मृत्यु के समय तक। इसके बाद तुम्हें अपने कर्मों का हिसाब देना होगा। यह कोई स्थायी जीवन नहीं है, बल्कि एक अस्थायी परीक्षा का स्थान है।
शिक्षाएँ और लाभ:
- शैतान हमारा खुला दुश्मन है: यह आयत हमें स्पष्ट करती है कि शैतान हमारा सबसे बड़ा दुश्मन है और उसकी दुश्मनी बहुत पुरानी है—आदम (अलैहिस्सलाम) के समय से। हमें हमेशा उसके बहकावे से सावधान रहना चाहिए और उसके नुकसानदेह रास्तों पर चलने से बचना चाहिए।
- दुनिया अस्थायी है: यह आयत हमें याद दिलाती है कि यह दुनिया हमारा स्थायी घर नहीं है। यहाँ का जीवन एक निश्चित समय तक है, और असली जीवन आख़िरत का है। इसलिए हमें दुनिया को अपना अंतिम लक्ष्य नहीं बनाना चाहिए, बल्कि इसे आख़िरत की तैयारी का ज़रिया बनाना चाहिए।
- अल्लाह की रहमत और इंसाफ़: अल्लाह ने ग़लती के बाद आदम (अलैहिस्सलाम) को माफ़ किया और उन्हें धरती पर भेजकर जीवन-निर्वाह की सामग्री दी। यह दिखाता है कि अल्लाह बहुत दयालु है और अपने बंदों को मौका देता है। साथ ही, यह भी सिखाता है कि ग़लती के बाद तौबा करना और अल्लाह की ओर लौटना बहुत बड़ी नेमत है।
- ज़िम्मेदारी का एहसास: धरती पर भेजे जाने के बाद इंसान को यह समझना चाहिए कि उसे यहाँ एक ज़िम्मेदारी निभानी है—अल्लाह की इबादत करना, उसके हुक्मों का पालन करना, और शैतान के रास्ते से बचना। यह जीवन एक परीक्षा है, और हमें इसे गंभीरता से लेना चाहिए।
📜 आयत 22-26 — अल-आराफ
अनुवाद — अल-आराफ 24
सूरा अल-आराफ आयत 24 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : हुक्म हुआ तुम (मियां बीबी शैतान) सब के सब बेहशत…सूरा आयत 24/206 — अल-आराफ الأعراف (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-आराफ सुनें, अल-आराफ अनुवाद, अल-आराफ mp3, अल-आराफ pdf. आयत 22–26. हिंदी अर्थ: اردو.
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Tuesday, August 18, 2026
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