अल-आराफ · 25/206
अनुवाद उच्चारण — अल-आराफ
قَالَ فِيهَا تَحْيَوْنَ وَفِيهَا تَمُوتُونَ وَمِنْهَا تُخْرَجُونَ ۝٢٥
Qaala feehaa tahyawna wa feehaa tamootoona wa minhaa tukhrajoon
📖 हिंदी अर्थ
ख़ुदा ने (ये भी) फरमाया कि तुम ज़मीन ही में जिन्दगी बसर करोगे और इसी में मरोगे

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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • تَحْيَوْنَ: तुम जीवित रहोगे, जीवन व्यतीत करोगे।
  • تَمُوتُونَ: तुम मरोगे।
  • تُخْرَجُونَ: तुम निकाले जाओगे (क़ब्रों से उठाए जाओगे)।

व्याख्या:

इस आयत में अल्लाह तआला ने आदम (अलैहिस्सलाम), हव्वा और उनकी सभी संतानों को सम्बोधित करते हुए फ़रमाया कि यह धरती ही तुम्हारा स्थायी निवास स्थान है। इसी धरती पर तुम अपनी निर्धारित आयु तक जीवन व्यतीत करोगे, यहीं तुम्हारा जन्म होगा, यहीं तुम बढ़ोगे और यहीं तुम अपनी जीवन यात्रा पूरी करोगे। फिर इसी धरती पर तुम मरोगे और इसी की मिट्टी में दफ़न किए जाओगे। अंततः उसी दिन, जब अल्लाह चाहेगा, तुम्हें इसी धरती से निकालकर हश्र के मैदान में इकट्ठा किया जाएगा और अपने रब के सामने प्रस्तुत किए जाओगे। यह अल्लाह की ओर से आदम (अलैहिस्सलाम) के लिए एक स्पष्ट घोषणा थी कि जन्नत से निकाले जाने के बाद अब तुम्हारा ठिकाना धरती ही है, और यहीं से पुनरुत्थान होगा। यह बात केवल आदम और हव्वा तक सीमित नहीं, बल्कि उनकी पूरी संतान के लिए है, जो क़ियामत तक आने वाली है।

फ़ायदे:

  1. यह आयत हमें सिखाती है कि यह दुनिया किसी के लिए स्थायी निवास नहीं है, बल्कि यह एक अस्थायी पड़ाव है। हमें यहाँ की ज़िन्दगी को आख़िरत की तैयारी का ज़रिया बनाना चाहिए, न कि इसे ही सब कुछ समझ लेना चाहिए।
  2. मृत्यु का स्मरण हमें ग़फ़लत से बचाता है और अच्छे कर्मों की ओर प्रेरित करता है। जब हमें यक़ीन हो कि हमें इसी धरती से उठाया जाना है और अपने कर्मों का हिसाब देना है, तो हम अपनी ज़िन्दगी को सही दिशा में ढालने की कोशिश करते हैं।
  3. यह आयत पुनरुत्थान (आख़िरत) पर ईमान की ताक़ीद करती है, जो इस्लाम के मूल सिद्धांतों में से है। यह विश्वास इंसान को ज़िम्मेदार बनाता है और उसे यह एहसास दिलाता है कि उसका कोई भी अच्छा या बुरा काम बेकार नहीं जाएगा।
  4. इस आयत से यह भी पता चलता है कि अल्लाह अपने बन्दों पर रहम करने वाला है। उसने आदम (अलैहिस्सलाम) को जन्नत से निकालने के बाद भी उन्हें निराश नहीं किया, बल्कि धरती पर जीने का तरीक़ा सिखाया और यह आशा दी कि एक दिन वे फिर से उठाए जाएँगे और अपने रब के सामने हाज़िर होंगे। यह हमें सिखाता है कि चाहे कितनी भी बड़ी ग़लती हो जाए, अल्लाह की रहमत से निराश नहीं होना चाहिए।


📜 आयत 23-27 — अल-आराफ

23قَالَا رَبَّنَا ظَلَمْنَا أَنفُسَنَا وَإِن لَّمْ تَغْفِرْ لَنَا وَتَرْحَمْنَا لَنَكُونَنَّ مِنَ الْخَاسِرِينَ
ये दोनों अर्ज क़रने लगे ऐ हमारे पालने वाले हमने अपना आप नुकसान किया और अगर तू हमें माफ न फरमाएगा और हम पर रहम न करेगा तो हम बिल्कुल घाटे में ही रहेगें
24قَالَ اهْبِطُوا بَعْضُكُمْ لِبَعْضٍ عَدُوٌّ ۖ وَلَكُمْ فِي الْأَرْضِ مُسْتَقَرٌّ وَمَتَاعٌ إِلَىٰ حِينٍ
हुक्म हुआ तुम (मियां बीबी शैतान) सब के सब बेहशत से नीचे उतरो तुममें से एक का एक दुश्मन है और (एक ख़ास) वक्त तक तुम्हारा ज़मीन में ठहराव (ठिकाना) और ज़िन्दगी का सामना है
25قَالَ فِيهَا تَحْيَوْنَ وَفِيهَا تَمُوتُونَ وَمِنْهَا تُخْرَجُونَ
ख़ुदा ने (ये भी) फरमाया कि तुम ज़मीन ही में जिन्दगी बसर करोगे और इसी में मरोगे
26يَا بَنِي آدَمَ قَدْ أَنزَلْنَا عَلَيْكُمْ لِبَاسًا يُوَارِي سَوْآتِكُمْ وَرِيشًا ۖ وَلِبَاسُ التَّقْوَىٰ ذَٰلِكَ خَيْرٌ ۚ ذَٰلِكَ مِنْ آيَاتِ اللَّهِ لَعَلَّهُمْ يَذَّكَّرُونَ
और उसी में से (और) उसी में से फिर दोबारा तुम ज़िन्दा करके निकाले जाओगे ऐ आदम की औलाद हमने तुम्हारे लिए पोशाक नाज़िल की जो तुम्हारे शर्मगाहों को छिपाती है और ज़ीनत के लिए कपड़े और इसके अलावा परहेज़गारी का लिबास है और ये सब (लिबासों) से बेहतर है ये (लिबास) भी ख़ुदा (की कुदरत) की निशानियों से है
27يَا بَنِي آدَمَ لَا يَفْتِنَنَّكُمُ الشَّيْطَانُ كَمَا أَخْرَجَ أَبَوَيْكُم مِّنَ الْجَنَّةِ يَنزِعُ عَنْهُمَا لِبَاسَهُمَا لِيُرِيَهُمَا سَوْآتِهِمَا ۗ إِنَّهُ يَرَاكُمْ هُوَ وَقَبِيلُهُ مِنْ حَيْثُ لَا تَرَوْنَهُمْ ۗ إِنَّا جَعَلْنَا الشَّيَاطِينَ أَوْلِيَاءَ لِلَّذِينَ لَا يُؤْمِنُونَ
ताकि लोग नसीहत व इबरत हासिल करें ऐ औलादे आदम (होशियार रहो) कहीं तुम्हें शैतान बहका न दे जिस तरह उसने तुम्हारे बाप माँ आदम व हव्वा को बेहश्त से निकलवा छोड़ा उसी ने उन दोनों से (बेहश्ती) पोशाक उतरवाई ताकि उन दोनों को उनकी शर्मगाहें दिखा दे वह और उसका क़ुनबा ज़रूर तुम्हें इस तरह देखता रहता है कि तुम उन्हे नहीं देखने पाते हमने शैतानों को उन्हीं लोगों का रफीक़ क़रार दिया है
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अनुवाद — अल-आराफ 25

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Tuesday, August 18, 2026

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