Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- تَحْيَوْنَ: तुम जीवित रहोगे, जीवन व्यतीत करोगे।
- تَمُوتُونَ: तुम मरोगे।
- تُخْرَجُونَ: तुम निकाले जाओगे (क़ब्रों से उठाए जाओगे)।
व्याख्या:
इस आयत में अल्लाह तआला ने आदम (अलैहिस्सलाम), हव्वा और उनकी सभी संतानों को सम्बोधित करते हुए फ़रमाया कि यह धरती ही तुम्हारा स्थायी निवास स्थान है। इसी धरती पर तुम अपनी निर्धारित आयु तक जीवन व्यतीत करोगे, यहीं तुम्हारा जन्म होगा, यहीं तुम बढ़ोगे और यहीं तुम अपनी जीवन यात्रा पूरी करोगे। फिर इसी धरती पर तुम मरोगे और इसी की मिट्टी में दफ़न किए जाओगे। अंततः उसी दिन, जब अल्लाह चाहेगा, तुम्हें इसी धरती से निकालकर हश्र के मैदान में इकट्ठा किया जाएगा और अपने रब के सामने प्रस्तुत किए जाओगे। यह अल्लाह की ओर से आदम (अलैहिस्सलाम) के लिए एक स्पष्ट घोषणा थी कि जन्नत से निकाले जाने के बाद अब तुम्हारा ठिकाना धरती ही है, और यहीं से पुनरुत्थान होगा। यह बात केवल आदम और हव्वा तक सीमित नहीं, बल्कि उनकी पूरी संतान के लिए है, जो क़ियामत तक आने वाली है।
फ़ायदे:
- यह आयत हमें सिखाती है कि यह दुनिया किसी के लिए स्थायी निवास नहीं है, बल्कि यह एक अस्थायी पड़ाव है। हमें यहाँ की ज़िन्दगी को आख़िरत की तैयारी का ज़रिया बनाना चाहिए, न कि इसे ही सब कुछ समझ लेना चाहिए।
- मृत्यु का स्मरण हमें ग़फ़लत से बचाता है और अच्छे कर्मों की ओर प्रेरित करता है। जब हमें यक़ीन हो कि हमें इसी धरती से उठाया जाना है और अपने कर्मों का हिसाब देना है, तो हम अपनी ज़िन्दगी को सही दिशा में ढालने की कोशिश करते हैं।
- यह आयत पुनरुत्थान (आख़िरत) पर ईमान की ताक़ीद करती है, जो इस्लाम के मूल सिद्धांतों में से है। यह विश्वास इंसान को ज़िम्मेदार बनाता है और उसे यह एहसास दिलाता है कि उसका कोई भी अच्छा या बुरा काम बेकार नहीं जाएगा।
- इस आयत से यह भी पता चलता है कि अल्लाह अपने बन्दों पर रहम करने वाला है। उसने आदम (अलैहिस्सलाम) को जन्नत से निकालने के बाद भी उन्हें निराश नहीं किया, बल्कि धरती पर जीने का तरीक़ा सिखाया और यह आशा दी कि एक दिन वे फिर से उठाए जाएँगे और अपने रब के सामने हाज़िर होंगे। यह हमें सिखाता है कि चाहे कितनी भी बड़ी ग़लती हो जाए, अल्लाह की रहमत से निराश नहीं होना चाहिए।
📜 आयत 23-27 — सूरा अल-आराफ
अनुवाद — अल-आराफ 25
सूरा अल-आराफ आयत 25 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : ख़ुदा ने (ये भी) फरमाया कि तुम ज़मीन ही में…सूरा आयत 25/206 — सूरा अल-आराफ الأعراف (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अल-आराफ सुनें, सूरा अल-आराफ अनुवाद, सूरा अल-आराफ mp3, सूरा अल-आराफ pdf. आयत 23–27. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Monday, September 28, 2026
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