(ऐ रसूल से) पूछो तो कि जो ज़ीनत (के साज़ों सामान) और खाने की साफ सुथरी चीज़ें ख़ुदा ने अपने बन्दो के वास्ते पैदा की हैं किसने हराम कर दी तुम ख़ुद कह दो कि सब पाक़ीज़ा चीज़े क़यामत के दिन उन लोगों के लिए ख़ास हैं जो दुनिया की (ज़रा सी) ज़िन्दगी में ईमान लाते थे हम यूँ अपनी आयतें समझदार लोगों के वास्ते तफसीलदार बयान करतें हैं
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پوچھو تو کہ جو زینت (وآرائش) اور کھانے (پینے) کی پاکیزہ چیزیں خدا نے اپنے بندوں کے لیے پیدا کی ہیں ان کو حرام کس نے کیا ہے؟ کہہ دو کہ یہ چیزیں دنیا کی زندگی میں ایمان والوں کے لیے ہیں اور قیامت کے دن خاص ان ہی کا حصہ ہوں گی۔ اسی طرح خدا اپنی آیتیں سمجھنے والوں کے لیے کھول کھول کر بیان فرماتا ہے
(ऐ रसूल से) पूछो तो कि जो ज़ीनत (के साज़ों सामान) और खाने की साफ सुथरी चीज़ें ख़ुदा ने अपने बन्दो के वास्ते पैदा की हैं किसने हराम कर दी तुम ख़ुद कह दो कि सब पाक़ीज़ा चीज़े क़यामत के दिन उन लोगों के लिए ख़ास हैं जो दुनिया की (ज़रा सी) ज़िन्दगी में ईमान लाते थे हम यूँ अपनी आयतें समझदार लोगों के वास्ते तफसीलदार बयान करतें हैं
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अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
زِينَةَ اللهِ: अल्लाह की वह सजावट और सुंदरता जो उसने अपने बंदों के लिए पैदा की, जैसे अच्छे कपड़े, पहनावा और शरीर को ढकने वाली चीज़ें।
الطَّيِّبَاتِ: पवित्र और हलाल चीज़ें, जैसे अच्छा भोजन, पेय और अन्य आजीविका की वस्तुएँ।
خَالِصَةً: विशेष रूप से केवल उन्हीं के लिए, जिसमें कोई साझेदार न हो।
तफ़सीर (व्याख्या):
हे नबी! उन लोगों से कहो जो अल्लाह की दी हुई नेमतों को हराम ठहराते हैं—जैसे सुंदर कपड़े पहनना और अच्छी हलाल चीज़ें खाना-पीना—कि किसने इन्हें हराम किया है? क्या अल्लाह ने ये चीज़ें अपने बंदों के लिए पैदा नहीं कीं? ये तो उसकी देन हैं जिनसे वह अपने बंदों को सजाता है और उनकी ज़िंदगी को आसान बनाता है। फिर किसे अधिकार है कि वह इन्हें हराम करे? यह तो अल्लाह का हक़ है कि वह हलाल और हराम का फ़ैसला करे, और उसने इन चीज़ों को हलाल किया है।
फिर कहो: ये सुंदर चीज़ें और पवित्र आजीविका दुनिया में सभी लोगों के लिए हैं—चाहे वे मोमिन हों या काफ़िर—सब इनसे लाभ उठाते हैं। लेकिन क़ियामत के दिन ये नेमतें केवल उन्हीं लोगों के लिए होंगी जो ईमान लाए, क्योंकि जन्नत की सारी नेमतें सिर्फ़ मोमिनों के लिए हैं, और काफ़िर उनसे महरूम रहेंगे। इस तरह अल्लाह अपनी आयतों को स्पष्ट रूप से समझाता है उन लोगों के लिए जो ज्ञान रखते हैं और समझना चाहते हैं।
फ़ायदे (शिक्षाएँ):
इस्लाम दीन-ए-फ़ितरत है—यह नेमतों को हराम नहीं करता, बल्कि उन्हें हलाल ठहराकर बंदों पर रहमत करता है। अल्लाह की दी हुई सुंदरता और अच्छी चीज़ों का इस्तेमाल करना जायज़ है, बशर्ते वह हलाल हो और अल्लाह की इताअत में हो।
यह आयत हमें सिखाती है कि हमें उन लोगों की बात नहीं माननी चाहिए जो अल्लाह की नेमतों को हराम ठहराते हैं—चाहे वे कितने भी बड़े दिखने वाले हों। हलाल और हराम का फ़ैसला सिर्फ़ अल्लाह और उसके रसूल का अधिकार है।
मोमिन की पहचान यह है कि वह दुनिया की नेमतों का इस्तेमाल करते हुए भी उन्हें अल्लाह की याद से नहीं भूलता, और उसकी नज़र आख़िरत पर रहती है—जहाँ उसे ये नेमतें ख़ालिस तौर पर मिलेंगी।
यह आयत हमें अल्लाह के एहसानों का शुक्र अदा करने की तरग़ीब देती है, क्योंकि ये सब उसी की देन हैं, और शुक्र अदा करने से नेमतें बढ़ती हैं।
अल्लाह का तरीक़ा यह है कि वह अपने बंदों के लिए चीज़ों को आसान बनाता है और उन पर सख़्ती नहीं करता—यही इस्लाम की रूह है: आसानी और मध्यमता।
उसी तरह फिर (दोबारा) ज़िन्दा किये जाओगे उसी ने एक फरीक़ की हिदायत की और एक गिरोह (के सर) पर गुमराही सवार हो गई उन लोगों ने ख़ुदा को छोड़कर शैतानों को अपना सरपरस्त बना लिया और बावजूद उसके गुमराह करते हैं कि वह राह रास्ते पर है
(ऐ रसूल से) पूछो तो कि जो ज़ीनत (के साज़ों सामान) और खाने की साफ सुथरी चीज़ें ख़ुदा ने अपने बन्दो के वास्ते पैदा की हैं किसने हराम कर दी तुम ख़ुद कह दो कि सब पाक़ीज़ा चीज़े क़यामत के दिन उन लोगों के लिए ख़ास हैं जो दुनिया की (ज़रा सी) ज़िन्दगी में ईमान लाते थे हम यूँ अपनी आयतें समझदार लोगों के वास्ते तफसीलदार बयान करतें हैं
(ऐ रसूल) तुम साफ कह दो कि हमारे परवरदिगार ने तो तमाम बदकारियों को ख्वाह (चाहे) ज़ाहिरी हो या बातिनी और गुनाह और नाहक़ ज्यादती करने को हराम किया है और इस बात को कि तुम किसी को ख़ुदा का शरीक बनाओ जिनकी उनसे कोई दलील न ही नाज़िल फरमाई और ये भी कि बे समझे बूझे ख़ुदा पर बोहतान बॉधों
सूराकुरान वेबसाइट की स्थापना पवित्र किताब और पाक सुन्नत की सेवा, अल्लाह की ओर बुलावा, और कुरान व सुन्नत के मार्ग पर धार्मिक विज्ञान को सुगम बनाने के एक विनम्र प्रयास के रूप में की गई थी। हम अल्लाह की प्रशंसा और उसके अनुग्रह के लिए धन्यवाद करते हैं, और उससे प्रार्थना करते हैं कि वह हमारे कार्यों को स्वीकार करे और उन्हें केवल उसके महान चेहरे के लिए विशुद्ध बनाए।