Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- أُمَّةٍ (उम्मत): यहाँ इससे आशय उस समुदाय या जनसमूह से है जो किसी नबी के पास भेजे गए संदेश को झुठलाने और कुफ्र पर इकट्ठा होने वाला हो।
- أَجَلٌ (अजल): निर्धारित समय, मियाद, वह वक्त जो अल्लाह ने किसी क़ौम के लिए तय कर दिया हो।
- لَا يَسْتَأْخِرُونَ (ला यस्तख़िरून): वे पीछे नहीं हटेंगे, न ही उसमें देर होगी।
- يَسْتَقْدِمُونَ (यस्तक़दिमून): वे आगे नहीं बढ़ेंगे, न ही उससे पहले आएगा।
तफ़सीर:
हर उम्मत और हर ज़माने के लोगों के लिए अल्लाह ने एक निश्चित समय और मियाद तय कर रखी है। यह मियाद उनकी ज़िंदगी की अवधि भी हो सकती है और उन पर अज़ाब के नाज़िल होने का वक्त भी। जब वह निर्धारित समय आ जाता है, तो न तो वे उससे एक पल के लिए भी पीछे हट सकते हैं और न ही उससे पहले उन पर कोई आफत आ सकती है। यह बात उन काफिरों के लिए एक सख्त चेतावनी है जो अल्लाह के अज़ाब को जल्दी मांगते थे और मज़ाक उड़ाते थे। अल्लाह फ़रमाता है कि हर क़ौम के लिए एक मुकर्रर वक्त है, जब वह आ जाएगा, तो उसमें एक घड़ी की भी देर या जल्दी नहीं होगी। यह अल्लाह की सुन्नत (क़ानून) है जो कभी बदलती नहीं। इसी तरह जब किसी क़ौम का अंतिम समय आता है, तो उसे टाला नहीं जा सकता, चाहे वे कितनी भी कोशिश कर लें।
फ़ायदे:
- इस आयत से हमें यह सीख मिलती है कि अल्लाह का फैसला और उसकी तय की हुई मियाद अटल है। उसमें कोई बदलाव या टाल-मटोल नहीं हो सकती। इसलिए इंसान को चाहिए कि वह अल्लाह के हुक्मों को माने और उसकी पकड़ से डरे।
- यह आयत हमें सब्र और भरोसे की तालीम देती है। जिस तरह अज़ाब के लिए एक वक्त मुकर्रर है, उसी तरह रिज़्क़, कामयाबी और हर चीज़ के लिए अल्लाह ने एक वक्त तय कर रखा है। इसलिए हमें जल्दबाज़ी नहीं करनी चाहिए और अल्लाह पर पूरा भरोसा रखना चाहिए।
- यह आयत हमें याद दिलाती है कि ज़िंदगी की मुहलत को ग़नीमत समझना चाहिए। जब तक हमारा वक्त बाकी है, हमें तौबा कर लेनी चाहिए और अच्छे काम करने चाहिए, क्योंकि जब अजल आ जाएगी, तो एक पल की भी मोहलत नहीं मिलेगी।
- इस आयत से मालूम होता है कि अल्लाह की रहमत और उसका इंसाफ़ दोनों पूरे हैं। वह किसी पर जल्दी अज़ाब नहीं भेजता, बल्कि हर क़ौम को उसकी मुकर्रर मुद्दत तक मोहलत देता है, ताकि वे सुधर जाएँ। यह अल्लाह की बड़ी मेहरबानी है।
📜 आयत 32-36 — सूरा अल-आराफ
अनुवाद — अल-आराफ 34
सूरा अल-आराफ आयत 34 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और हर गिरोह (के न पैदा होने) का एक ख़ास…सूरा आयत 34/206 — सूरा अल-आराफ الأعراف (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अल-आराफ सुनें, सूरा अल-आराफ अनुवाद, सूरा अल-आराफ mp3, सूरा अल-आराफ pdf. आयत 32–36. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Monday, September 28, 2026
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