Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- इस्तवा: अर्श पर ऊँचा होना, जो अल्लाह की शान के अनुकूल हो, जिसकी कैफियत (आकार) हम नहीं जान सकते।
- युग्शी: ढकना, छिपाना।
- हसीसन: तेज़ी से, बिना देर किए।
- मुसख्खरात: वश में किए हुए, आज्ञाकारी।
- तबारक: बहुत बरकत वाला, बड़ा और पवित्र।
तफसीर (व्याख्या):
ऐ लोगों! तुम्हारा रब वही अल्लाह है जिसने आसमानों और ज़मीन को छः दिनों में पैदा किया। यहाँ "दिन" से मतलब उस समय की अवधि है, क्योंकि उस वक़्त न तो सूरज था और न ही दिन-रात का तसव्वुर। इसके बाद वह अर्श पर ऊँचा हुआ — यह ऊँचाई उसकी महानता और जलाल के लायक़ है, जिसकी हकीकत हमारी समझ से परे है। वह रात को दिन पर ओढ़ता है, यानी रात की तारीकी से दिन की रोशनी को ढक देता है, और दिन को रात पर ओढ़ता है, ताकि एक दूसरे का पीछा करता रहे। दोनों एक-दूसरे के पीछे इस तेज़ी से आते हैं कि कोई देर नहीं होती। उसी ने सूरज, चाँद और सितारों को पैदा किया, और उन्हें अपने हुक्म के ताबेदार बनाया — वे सब उसी के इशारे पर चलते हैं। याद रखो! पैदा करना भी उसी का काम है और हुक्म देना भी उसी का। वही सब कुछ चलाता है। बहुत बरकत वाला है अल्लाह, जो सारे जहानों का पालनहार है। उसकी ज़ात हर अयब से पाक है, उसके गुण बेहद कमाल हैं, और उसकी रहमत और एहसान का कोई अंत नहीं।
दावत और नसीहत:
यह आयत हमें अपने रब की पहचान कराती है — वह जो कायनात का ख़ालिक़ है, जिसने हर चीज़ को तदबीर से बनाया। जब हम इस निज़ाम को देखते हैं — रात और दिन का बदलना, सूरज और चाँद की गति, सितारों का वश में होना — तो हमारा दिल उसकी अज़मत के सामने झुक जाता है। यही वह अल्लाह है जो हमारा रब है, और वही हमारी हर ज़रूरत को पूरा करता है। इसलिए हमें अपनी ज़िंदगी उसी के हुक्म के मुताबिक़ बनानी चाहिए, क्योंकि पैदा करना भी उसी का है और हुक्म देना भी उसी का। जिस रब ने इतनी बड़ी कायनात को इस तरह सँभाला है, क्या वह हमारी छोटी-छोटी ज़रूरतों को नहीं जानता? बेशक वह सब कुछ सुनता और देखता है। आओ, हम उसी की इबादत करें, उसी से मदद माँगें, और उसी के दिए हुए दीन (इस्लाम) पर चलें — यही हमारी कामयाबी है। तबारक अल्लाह रब्बुल आलमीन — उसकी बरकतें और रहमतें हम पर हमेशा बनी रहें।
📜 आयत 52-56 — सूरा अल-आराफ
अनुवाद — अल-आराफ 54
सूरा अल-आराफ आयत 54 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : बेशक उन लोगों ने अपना सख्त घाटा किया और जो…सूरा आयत 54/206 — सूरा अल-आराफ الأعراف (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अल-आराफ सुनें, सूरा अल-आराफ अनुवाद, सूरा अल-आराफ mp3, सूरा अल-आराफ pdf. आयत 52–56. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Wednesday, September 30, 2026
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